कैसे सेबी ने एमसीएक्स के मामलों में आंखें मूंद रखी हैं!

आईजीआईडीआर के प्रोफेसर सुसान थॉमस और अजय शाह गिरोह के सदस्यों द्वारा की गई डेटा चोरी की जांच धीमी आंच पर डाल दी गई; कपास (कॉटन) व्यापार घोटाले ने मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में अपना सिर उठाया।

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कैसे सेबी ने एमसीएक्स के मामलों में आंखें मूंद रखी हैं!
कैसे सेबी ने एमसीएक्स के मामलों में आंखें मूंद रखी हैं!

लुई ड्रेफस कंपनी ने हमारी पोस्ट पर प्रतिक्रिया भेजी है और नीचे पुन: प्रस्तुत की गई है:

Response from the Louis Dreyfus (LD) by PGurus on Scribd

भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) की गैरकानूनी सूचना प्रेषण (डेटा-शेयरिंग) घोटाले और एमसीएक्स पर गंभीर कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दों पर चुप्पी इसकी अक्षमता की एक बानगी के रूप में सामने आ रही है, जबकि नए खुलासे भी मामले में बाहर उजागर हो रहे हैं।

अध्यक्ष के अधीन नियामक अजय त्यागी और मुख्य पूर्णकालिक सदस्य संतोष कुमार मोहंती, जो पूर्व फॉरवर्ड मार्केट कमीशन के चेयरमैन रमेश अभिषेक अग्रवाल के करीबी थे और अब मुख्य रूप से एमसीएक्स में अपने कार्य पोर्टफोलियो के हिस्से के रूप में दिखते हैं, ने इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च (आईजीआईडीआर) के प्रोफेसर सुसान थॉमस और एमसीएक्स में डेटा चोरी अजय शाह के तंत्र से जुड़े पात्रों की ओर आंखें मूंद ली हैं। थॉमस शाह की पत्नी हैं, जो पलान्यप्पन चिदंबरम का विश्वासपात्र आदमी था और दोनों को एक साथ सबसे बड़े बाजारों नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और एमसीएक्स में व्यापारिक डेटा के दोहन के लिए जाना जाता है। दोनों एक्सचेंजों के बीच विलय की बातचीत, जो वर्तमान में छुपाकर रखी जा रही है, के भी जटिल अनपेक्षित परिणाम होंगे।

मुखबिर ने बताया है कि एक पूर्व एमसीएक्स अधिकारी, जो अब अपनी खुद की पूंजी निवेश करके एक कमोडिटी फंड में शामिल हो गया है, ने एक बड़े विदेशी दलाल, जो यूरोप में एमसीएक्स पर व्यापार कर रहा था, से मुलाकात की और उससे अपनी सम्पत्ति भारत में अन्य मार्ग से लाने के तरीके की जानकारी हासिल की।

थॉमस और डेटा घोटाले में अन्य लोगों की भूमिका के स्पष्ट और अपरिहार्य सबूत होने के बावजूद उनके खिलाफ सेबी की निष्क्रियता, ने एमसीएक्स में अधिकारियों को प्रोत्साहित किया है जो अब कपास व्यापार से सम्बंधित एक्सचेंज में एक और बड़ी गड़बड़ी को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। एक मुखबिर ने 9 अगस्त को एक पत्र के माध्यम से सेबी से शिकायत की कि उसके व्यापारिक सदस्यों को एक्सचेंज द्वारा बड़ी मात्रा में उप-मानक और गीले कपास की गांठें कैसे पारित की जा रही हैं। सेबी के अध्यक्ष को संबोधित पत्र में सेबी की मुख्य सतर्कता अधिकारी आरती छाबड़िया और वित्त मंत्रालय के अन्य अधिकारियों को भी चिह्नित किया गया था।

मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि एमसीएक्स को अपने गोदाम पर पड़ी कपास की गांठों की गुणवत्ता के संबंध में शिकायतें मिली हैं और व्यापारी डिलीवरी लेने के अनिक्षुक हैं। जैसा कि बाजार के खिलाड़ियों को पता चला है कि एमसीएक्स गोदाम में बड़ी मात्रा में कपास की गांठें अनुबंध में निर्दिष्ट से कम गुणवत्ता की थीं, बाजार में हाजिर कपास गांठों की कीमत कुछ हफ्तों पहले वायदा अनुबंध की तुलना में उच्च दर पर उद्धृत की गई थी। यह जांचना दिलचस्प होगा कि इन खराब गुणवत्ता वाले कपास गांठें एमसीएक्स से जुड़े गोदाम में कैसे पहुँचीं। मुखबिर ने बताया है कि एक प्रमुख पूर्व और वर्तमान में एमसीएक्स के सेवारत अधिकारी लुईस ड्रेफस (एलडी) के साथ प्रशय थे, जो कि भारत में व्यापार कर रही स्विट्जरलैंड स्थित कंपनी है, और ग्लेनकोर एग्रीकल्चर। एमसीएक्स के व्यापारिक डेटा से पता चलता है कि एलडी वर्ष के शुरुआत में ही अपने कपास की स्थिति से बाहर निकल गया और कोई डिलीवरी नहीं ली। एलडी से कपास की गांठें खरीदने वाले व्यापारी ने एमसीएक्स से खराब गुणवत्ता के बारे में शिकायत की थी, जो अब ठीक है क्योंकि माल की गुणवत्ता एमसीएक्स अनुबंध विनिर्देशों से नीचे हो सकती है।

यह पता चला है कि एमसीएक्स के अधिकारी अब उस व्यापारी के पीछे पड़े हुए हैं जिसने उनसे गांठ की खराब गुणवत्ता के बारे में शिकायत की थी और उन पर बाजार में हेरफेर करने का आरोप लगाकर, उसे ब्लैकलिस्ट करने की योजना बना रहे हैं। जिस व्यापारी की बात हो रही है उसने कपास की डिलीवरी के लिए 200 से 250 करोड़ रुपये का भुगतान किया और अब वह एक तरफ कुआं एक तरफ खाई के बीच फंस गया है जबकि सेबी तमाशा देख रहा है।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

मुखबिर ने बताया है कि एक पूर्व एमसीएक्स अधिकारी, जो अब अपनी खुद की पूंजी निवेश करके एक कमोडिटी फंड में शामिल हो गया है, ने एक बड़े विदेशी दलाल, जो यूरोप में एमसीएक्स पर व्यापार कर रहा था, से मुलाकात की और उससे अपनी सम्पत्ति भारत में अन्य मार्ग से लाने के तरीके की जानकारी हासिल की। क्या ये सभी लेन-देन एमसीएक्स डेटा घोटाले में उत्पन्न रिश्वत या पैसों से जुड़े हैं, जिसे देखने के लिए सेबी इतना अनिच्छुक है? डेटा घोटाले में मुख्य षड्यंत्रकारियों के खिलाफ सेबी की चुप्पी और उसके उदार रुख से सबसे ज्यादा फायदा किसे हुआ और अब कपास के कारोबार में गड़बड़ी को छुपाने के लिए एमसीएक्स को पूरा मौका दे रहा है? एमसीएक्स गोदामों में खराब गुणवत्ता वाले कपास की कितनी मात्रा आई और कैसे?

मुखबिर ने बताया कि व्यापारिक सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए एक यूरोप की कंपनी को एमसीएक्स द्वारा 20 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया गया था। इस अनुबंध को बाद में बदल दिया गया और अतिरिक्त आवश्यकताओं की आड़ में इसका मूल्य कई गुना बढ़ गया। एमसीएक्स में किसने इस अनुबंध को बदल दिया? क्या सॉफ्टवेयर को समय पर यूरोपीय कंपनी द्वारा एमसीएक्स को सुपुर्द किया गया?

पीगुरूज को पता चला है कि एमसीएक्स पिछले महीने में स्वर्ण अनुबंधों के निपटारण के साथ संघर्ष कर रहा था क्योंकि सोने की कीमत तेजी से बढ़ी थी[1]। मुखबिर ने अपने पत्र में कहा है कि एमएमटीसी-पीएएमपी को 4000 टन सोना पहुंचाना था, ऐसा कुछ जो एमसीएक्स प्लेटफॉर्म पर पहले कभी नहीं हुआ है। कुछ एमसीएक्स कर्मचारी घबरा गए क्योंकि इसके लिए पर्याप्त जोखिम रक्षा नहीं थी और सोना-चांदी कोष्ठ उनके हिसाब से नहीं चलते। सोना-चांदी व्यापरियों और दलालों को फोन लगाए गए और दूसरी तरफ पर अपनी स्थिति की बराबरी करने के लिए दबाव बनाया गया।

सन्दर्भ :
[1] It’s a delivery dilemma for MCX, with cotton and goldAug 12, 2019, The Hindu Business Line

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