एक अधिनियम (चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम) के माध्यम से राज्य द्वारा मंदिर अधिग्रहण को असंवैधानिक रूप से रद्द कर दिया गया था।

स्वामी ने सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि यह असंवैधानिक है

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स्वामी ने सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि यह असंवैधानिक है
स्वामी ने सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि यह असंवैधानिक है

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरुवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की, जिसमें केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों सहित राज्य सरकार द्वारा 51 मंदिरों के अधिग्रहण की पुष्टि की गई थी। अपनी विस्तृत अपील में, स्वामी ने बताया कि एक अधिनियम (चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम) के माध्यम से राज्य द्वारा मंदिर अधिग्रहण स्पष्ट रूप से असंवैधानिक था। उन्होंने कहा कि अधिनियम के माध्यम से मंदिर अधिग्रहण में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 31 ए (1) (बी), अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन हुआ है। अनुच्छेद 31 निजी स्वामित्व के अधिकार से संबंधित है, अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक संस्थानों और उनके विश्वासियों को अपने संस्थानों के प्रबंधन और संचालन का अधिकार देता है।

जुलाई में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भाजपा शासित राज्य सरकार द्वारा 51 मंदिरों के अधिग्रहण हेतु नए अधिनियम की पुष्टि की थी [1]। सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने के बाद, सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया:

सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों और नटराज मंदिर के फैसले पर उनके मामले का हवाला देते हुए, स्वामी ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा मंदिर अधिग्रहण के खिलाफ शीर्ष न्यायालय के निर्णयों पर विचार नहीं किया। उच्चतम न्यायालय ने कई फैसलों में कहा कि सरकार किसी अनिर्दिष्ट समय के लिए मंदिर का अधिग्रहण नहीं कर सकती है और इसे केवल प्रशासन और कुप्रबंधन की शिकायतों को सुधारने के लिए सीमित किया जाना चाहिए और फिर पुरानी स्थिति बहाल होनी चाहिए।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

स्वामी ने यह भी बताया कि विवादास्पद अधिनियम में मुख्यमंत्री को बोर्ड का प्रमुख बनाने का प्रावधान है और यदि मुख्यमंत्री हिंदू नहीं है, तो वरिष्ठतम हिंदू मंत्री को चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया जायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड में विधायकों और सांसदों को सदस्य बनाने और आईएएस अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त करने के कई गैर-कानूनी प्रावधान हैं। अपील में कहा गया है कि मंदिरों के पुजारियों की नियुक्ति में सीईओ के अनुमोदन का सुझाव देने वाले प्रावधान हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आने वाले हफ्तों में अपील को सूचीबद्ध किये जाने की उम्मीद है। उत्तराखंड के कई हिस्सों में पिछले 1 साल से विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कई कार्यकर्ताओं के साथ कई पुजारी भाजपा शासित राज्य सरकार के विवादास्पद अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं [2]

संदर्भ:

[1] उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित 51 मंदिरों के चार धाम अधिनियम अधिग्रहण को मंजूरी दीJul 22, 2020, Hindi.PGurus.com

[2] Protesting at Kedarnath shrine since June, priest airlifted to AIIMS as his health deterioratesSep 07, 2020, Hindustan Times

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