श्री अरुण जेटली, उम्मीद है कि सोनिया परिवार को दिए लाड़ प्यार के लिए आपने सबक सीखा है। आपको माल्या के फरार होने पर जवाब देना है

लगता है कि जेटली के गाँधी परिवार के प्रति सभी अच्छे कर्मों को नजरअंदाज कर दिया गया है और राहुल वित्त मंत्री को आढ़े-हाथ लिया ले रहे हैं।

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श्री अरुण जेटली, उम्मीद है कि आपने सोनिया परिवार के साथ सौम्य रवैए से अपना सबक सीख लिया है।
श्री अरुण जेटली, उम्मीद है कि आपने सोनिया परिवार के साथ सौम्य रवैए से अपना सबक सीख लिया है।

खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे वित्त मंत्री अरुण जेटली को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा आढ़े-हाथ लिया जा रहा है । इस आक्रामक तेवर से जेटली को एक सबक सीखना चाहिए और भाजपा के भीतर भी सभी को, जो भारत के लगभग-लेकिन-कभी-पहले परिवार पर हमला करने के बारे में मितभाषी हैं। अरुण जेटली व्यापक रूप से परिवार के साथ एक बिचौलिए के रूप में देखे जाते रहे हैं और अतीत में, उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि उन पर कोई भी राजनीतिक हमला अच्छी तरह से निष्क्रिय किया गया हो। नेशनल हेराल्ड का मामला ही लें – जेटली ने संदिग्ध रूप से बरखा दत्त के साथ एक साक्षात्कार में उजागर किया और कहा कि मामला खत्म हो जाएगा, अगर वे 90 करोड़ रुपये का ऋण चुका देते हैं [1]। जब अदालतों के साथ-साथ आयकर विभाग, मामले की जांच पड़ताल में था तो वित्त मंत्री इस तरह झक्की कैसे दे सकते हैं? क्या वे इनकम टैक्स गुप्तचरों को ‘ सूचना ‘ देने की कोशिश कर रहे थे?

परिवार के साथ जेटली की सहानुभूति का एक और चमकदार उदाहरण बताया जाना चाहिए। अप्रैल 2016 में, राज्यसभा में, सुब्रमण्यम स्वामी को सोनिया गांधी से जुड़े अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाले पर बहस का नेतृत्व करना था।

जेटली और डीडीसीए

शीर्षक तस्वीर ये सब बयां करती है। दिल्ली के क्रिकेट मामले जेटली की प्रमुख कमजोरी थी और आज भी हैं। यह एक ज्ञात तथ्य है कि सोनिया गांधी की मर्जी के बिना, वह दिल्ली क्रिकेट संघ में एक मिनट के लिए भी नहीं रूक सकते थे जो दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के रूप में जाना जाता है । जेटली पिछले दो दशकों से इस शक्तिशाली क्रिकेट साम्राज्य पर नियंत्रण कर रहे थे और अब उनके दोस्त रजत शर्मा इस प्रतिष्ठित अनुभाग के प्रभारी हैं । इन नेताओं ने एक तरह से प्रतिष्ठित क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी और भाजपा के निलंबित सांसद कीर्ति आजाद, जो 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य थे, को बाहर कर दिया था।

देखिए कैसे परिवार के प्रति जेटली के उदार रवैए के दृष्टिकोण सामने आए हैं। ‘ कृतघ्न राहुल गांधी भगोड़े विजय माल्या के आरोपों पर एफएम को घेरने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। परिवार क्रूरता पर उतर जाता है जब उसे घेरा जाता है और ये घिनौना काम वो चाकरों या बिचौलियों को नहीं करने देता है। वित्त मंत्री के रूप में उन पर भ्रष्टाचार रोधी संबंधित कई मामलों को कमजोर करने का आरोप लगता रहा है, जो कि भाजपा को 2014 में पूर्ण बहुमत मिलने के मुख्य कारण थे। परिवार के लिए इन सब “करूणा” के बदले कुछ नहीं मिला!

जेटली को साथ रखना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलती थी, जो एक लोकसभा की सुरक्षित सीट खोने में कामयाब रहे, जो कई वर्षों से बीजेपी के पास रही है। इसमें साथ मोदी ने वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अलावा रक्षा, सूचना और प्रसारण जैसे अतिमहत्वपूर्ण पदों को आवंटित किया । जेटली के साथ मूल समस्या यह है कि वह हमेशा बॉम्बे क्लब, टाटा, अंबानी और एस्सार द्वारा नियंत्रित, के वकील रहे हैं । जेटली में अभियोजन पक्ष की ओर से किए जा रहे मुकदमों के बावजूद सीधे रक्षा पक्ष में कूदने की बुरी आदत है! यह अभी भी पता नहीं है कि प्रधानमंत्री को जेटली पर इतना भरोसा क्यों है, जो वित्त मंत्रालय में एक संक्रमण का खतरा हैं । यह पूरी तरह आश्चर्य की बात है क्योंकि पीयूष गोयल वित्त मंत्रालय में पूरी सक्षमता से कार्य कर रहे थे और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) की कई गलतियां को सुधार रहे थे और सकारात्मक कदम उठा रहे थे और लोगों की मांगों को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे थे ।

सोनिया गांधी और अगस्ता वेस्टलैंड सौदा

परिवार के साथ जेटली की सहानुभूति का एक और चमकदार उदाहरण बताया जाना चाहिए। अप्रैल 2016 में, राज्यसभा में, सुब्रमण्यम स्वामी को सोनिया गांधी से जुड़े अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाले पर बहस का नेतृत्व करना था। लेकिन रहस्यमय तरीके से, जब बहस शुरू हुई, एक राजनीतिक नौसिखिया, बीजेपी के भूपेंद्र यादव ने बहस शुरू कर दी और “सोनिया गांधी” का नाम बोले बिना सभा के 20 मिनट बर्बाद कर दिये! उस दिन जेटली सदन में मौजूद नहीं थे जैसे कि वह सोनिया पर स्वामी के हमले से खुद को दूर करना चाहते थे। यादव के उबाऊ भाषण के बाद, स्वामी को बोलने का मौका मिला और यह सोनिया गांधी पर एक करारा हमला था, भारतीय संसद में ऐसे किस्से दुर्लभ हैं [2]

अरुण जेटली को याद रखना चाहिए कि परिवार ने मजबूत उम्मीदवार खड़ा करके 2014 में जेटली की हार सुनिश्चित की और अब राहुल गांधी द्वारा निर्दयतापूर्वक हमला किया जा रहा है।

कुछ दिनों के बाद इस मुद्दे पर लोकसभा में बहस हुई और गैर-सदस्य जेटली एक मंत्री के रूप में मौजूद थे । सोनिया गांधी भी मौजूद थीं। लेकिन सोनिया क्यों मौजूद थीं? क्योंकि उसे एक आश्वासन मिला था कि राज्य सभा के जैसा हमला, दोबारा नहीं होने वाला है। यह शर्म की बात है कि लोकसभा में पूर्ण बहुमत के बावजूद बीजेपी ने कभी भी निचले सदन में अगस्ता मुद्दे पर सोनिया गांधी पर हमला नहीं किया! इस पर लिखे सभी दस्तावेजों पर जेटली के हस्ताक्षर हैं।

अपने दोस्त चिदंबरम की मदद के लिए एयरसेल-मैक्सिस में जेटली के गंदे खेल हम देख चुके हैं। हम जानते हैं कि जेटली की बेटी भगोड़ा मेहुल चोकसी और नीरव मोदी फर्म की कानूनी सलाहकार रही है, जेटली के स्वीकारोक्ति के अनुसार, उन्हें कुछ फीस मिली और जो बाद में दिसंबर 2017 में लौटा दी गई [3]! मीडिया में अपने अपार रसूख के कारण जेटली इस मामले को चुप कराने में कामयाब हो गए और कांग्रेस ने भी इसे तवज्जो नहीं दी । लेकिन अब कांग्रेस हताश हो रही है और सरकार पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है और जेटली गोला बारूद उपलब्ध कराते रहेंगे।

मुझे नहीं पता कि जेटली या उनके परिवार के सदस्य कभी भी विजय माल्या और उनकी फर्मों के एक कानूनी सलाहकार रहे हैं। लेकिन यह एक तथ्य है कि वह जेटली थे, जो तात्कालिक भाजपा के कर्नाटक के प्रभारी, अपनी कांग्रेस समर्थित अवधि समाप्त होने के बाद माल्या को राज्य सभा में प्रवेश करने में मदद की। यह एक ज्ञात तथ्य है कि विजय माल्या के जेटली से अच्छे संबंध रहे हैं। अन्यथा, भारतीय बैंक (एसबीआई) और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (आईडीबीआई) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2015 तक माल्या को जेल में डाल दिया होता।

राष्ट्र इन मामलों पर जेटली से जवाब चाहता है- क्या बैंकों को पता था कि सीबीआई द्वारा विजय माल्या के लुक आउट नोटिस को क्षीर्ण कर दिया गया था? यह आसानी से देखा जा सकता है कि सीबीआई ने बैंकों के इस संदेश के बाद ऐसा किया होगा कि वे उसके साथ निपटारे का प्रबंध कर सकें। तत्कालीन लचीला सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा जो एयरसेल-मैक्सी्स मामले में दो साल बर्बाद करते हैं वे पूरी तरह से अरुण जेटली के नियंत्रण में थे। यह एक ज्ञात तथ्य है।

हम सभी जानते हैं कि पीएम मोदी द्वारा मजबूत निर्देश दिए जाने के बाद सीबीआई के नए निदेशक आलोक वर्मा ने भ्रष्ट चिदंबरम वंश के खिलाफ कार्यवाही करना शुरू कर दिया।

अरुण जेटली को याद रखना चाहिए कि परिवार ने मजबूत उम्मीदवार खड़ा करके 2014 में जेटली की हार सुनिश्चित की और अब राहुल गांधी द्वारा निर्दयतापूर्वक हमला किया जा रहा है। परिवार के प्रति उनके सभी अच्छे कर्मों का परिणाम उन्हें अच्छा नहीं मिल रहा है।

संदर्भ:

[1] National Herald ‘prima facie a strong case, income tax inquiry on’ – Arun Jaitley to NDTVAug 5, 2014, NDTV.com

[2] Shri Subramanian Swamy’s speech during discussion on AgustaWestland dealApr 5, 2016, Bharatiya Janata Party Channel on YouTube

[3] Arun Jaitley must speak on the tainted firm Gitanjali Gems of the PNB Scam engaging daughter’s legal firmMar 18, 2018, PGurus.com

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