डीके शिवकुमार ने 114 फीट लंबी जीसस की मूर्ति के निर्माण को प्रायोजित किया। बीजेपी का आरोप है कि यह पीसीसी अध्यक्ष बनने के लिए सोनिया को खुश करने के लिए था

क्या शिवकुमार की जीसस की 114-फीट की प्रतिमा बनाने का प्रयास कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो को प्रभावित करने के लिए अधिक नकल करने का प्रयास है?

0
411
क्या शिवकुमार की जीसस की 114-फीट की प्रतिमा बनाने का प्रयास कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो को प्रभावित करने के लिए अधिक नकल करने का प्रयास है?
क्या शिवकुमार की जीसस की 114-फीट की प्रतिमा बनाने का प्रयास कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो को प्रभावित करने के लिए अधिक नकल करने का प्रयास है?

ईसाई आबादी को खुश करने के लिए, सैकड़ों करोड़ के धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोपों का सामना कर रहे विवादास्पद कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में जीसस की 114 फुट ऊंची प्रतिमा को प्रायोजित किया है। एक ईसाई आबादी वाले इलाके, हरोबेले गांव के कपालिबेटा में 13 फीट ऊँचे एक मूर्तितल या चबूतरे पर प्रस्तावित 101 फुट की प्रतिमा बनने जा रही है। शिवकुमार के कार्यालय ने कहा कि शिवकुमार ने अपने स्वयं के धन के साथ, प्रतिमा का निर्माण करने वाले ट्रस्ट के लिए सरकार से कपालीबेटा में 10 एकड़ जमीन खरीदी थी, और यह दावा भी किया कि यह दुनिया में जीसस की सबसे ऊंची अखंड मूर्ति होगी।

25 दिसंबर को, शिवकुमार ने एक प्रार्थना सभा में नींव रखी और परियोजना के लिए शीर्षक विलेख (टाइटल डीड) सौंप दिया। यह पता चला है कि शिवकुमार इस परियोजना के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। कुछ भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि शिवकुमार ने जेल में समय बिताने के बाद ईसाई धर्म अपना लिया है। कुछ लोगों का आरोप है कि यह कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने हेतु सोनिया गांधी को खुश करने का प्रयास था।

शिवकुमार का विरोध करते हुए, ग्रामीण विकास मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने कहा कि भारत में पैदा हुए भगवान राम के लिए मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले कांग्रेस नेता जीसस की मूर्ति के निर्माण के लिए धन देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, एक ट्वीट में, उन्होंने उल्लेख किया कि जीसस का जन्म बेथलहम के बजाय वेटिकन में हुआ था।

ईश्वरप्पा ने ट्वीट किया – “अपने नेता को खुश करने के लिए, कांग्रेस में, जिन्होंने हमारे पवित्र देश में पैदा हुए भगवान राम को समर्पित एक भव्य मंदिर के निर्माण का विरोध किया, वे अपने स्वयं के धन से वेटिकन में पैदा हुए जीसस की मूर्ति बनाने जा रहे हैं”, उन्होंने आगे जोड़ा – “यहां तक कि सिद्धारमैया (कांग्रेस नेता) भी उन्हें (शिवकुमार) केपीसीसी अध्यक्ष बनने से नहीं रोक सकते।”

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनंतकुमार हेगड़े ने भी इस मुद्दे पर शिवकुमार को निशाने पर लिया और ट्वीट किया, “ये तिहाड़ से लौटे महान व्यक्ति हैं, जो एक पद के लिए, जीसस की एक विशाल मूर्ति स्थापित करके इतालवी महिला को खुश करना चाहते हैं, यह उनके आडम्बर को प्रदर्शित करता है। यह आश्चर्य की बात नहीं होगी यदि कांग्रेस के भीतर अधिक गुलाम तुष्टिकरण की राजनीति करने के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करें।”

“इतालवी महिला केवल उन लोगों को महत्व देती है जो ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं को कम से कम अब, आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और अपनी पार्टी में गुलामी की मानसिकता को अस्वीकार करना चाहिए और उससे बाहर आना चाहिए,” उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा। मैसूरु के एक अन्य भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा ने प्रतिमा स्थापित करने के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया और यह जानने की मांग की कि क्या यह कनकपुरा के वोक्कालिगाओं को धर्मांतरित करने की योजना थी।

एक ट्वीट में, उन्होंने शिवकुमार से आगे पूछा कि क्या वह सिद्धगंगा, सुत्तूर और आदिचुंचनगिरि जैसे मठों के सिद्ध संतों को भूल गए हैं। “शिवकुमार स्वामीजी (सिद्दागंगा मठ) की मूर्ति को स्थापित करना कपालिबेटा पर एक मुकुट की तरह होता है- है ना?”।

आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, शिवकुमार ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में सैकड़ों हिंदू मंदिर बनाए गए हैं और वह किसी भी प्रचार के लिए ऐसा नहीं कर रहे हैं। उनके खिलाफ आलोचना उनके धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण के प्रति ‘ईर्ष्या’ के कारण है, उन्होंने कहा। “मैंने उनसे (लोगों से) दो साल पहले वादा किया था, उन्हें सरकारी जमीन पर कुछ भी नहीं करने के लिए कहा था। क्रिसमस के दिन मैंने उन्हें शीर्षक विलेख (टाइटल डीड) सौंप दिया।”

[पीटीआई इनपुट्स के साथ]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.