सेबी और देने की कला

सेबी ने पीएस रेड्डी (एमडी, सीईओ एमसीएक्स) को लेने से अधिक दिया?

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सेबी और देने की कला
सेबी और देने की कला

बिना किसी निष्क्रिय समयावधि के एमसीएक्स में उनके नाम को मंजूरी दे दी गई या हम कहते हैं कि “बिना ज्यादा हलचल के” तब भी जब सीडीएसएल में उनके खिलाफ कंपनी नियंत्रण के मामले लंबित थे।

पीएस रेड्डी, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के वर्तमान एमडी और सीईओ, को अपने पिछले नियोक्ता सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज इंडिया लिमिटेड (सीडीएसएल) से उन्हें प्राप्य रु 2. 5-2.8 मिलियन (25-28 लाख) के बीच राशि को भूल जाना होगा जब तक वह कंपनी और बाजार नियामक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को चुनौती देने का फैसला करते है। सूत्रों ने पीगुरुस को बताया कि यह राशि जो उसे नहीं चुकाई जाएगी, वह खराब कॉर्पोरेट प्रशासन प्रथाओं के लिए सेबी के आदेशों पर सीडीडीएल द्वारा लगाया गया दंड है।

तथाकथित दंड राशि का रेड्डी की वित्तीय स्थिति पर दूरगामी परिणाम नहीं होगा क्योंकि वह सिर्फ एमसीएक्स से वेतन में 30 मिलियन रुपये से अधिक सालाना कमाता है, लेकिन सेबी ने आदेश ने रेड्डी के संबंध में कई सवाल उठाए हैं जिन्हें केवल तब समझा जा सकता है जब हम उस पर थोपी गई जुर्माना की पृष्ठभूमि की ओर ध्यान दे।

रेड्डी को पहली बार तीन साल के लिए अप्रैल 2012 में सीडीएसएल में एमडी और सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक तीन और वर्षों के लिए फिर से नियुक्त किया गया और “भाग्यशाली” तरह से सीडीएसएल शासक के रूप में एक और साल का विस्तार पाया। रेड्डी को “दुगना सौभाग्य” मिला जब एमडी और सीईओ का पद एमसीएक्स में खाली हो गया जैसे ही सीडीएसएल में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ।

11 सितंबर को लिखे पत्र में, सेबी ने सीडीएसएल को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए रेड्डी के चर भुगतान को वापस लेने को कहा। सेबी ने सीडीएसएल बोर्ड को ‘कंपनी नियंत्रण गलतीयों’ के लिए रेड्डी के खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।

सीडीएसएल को पत्र में उल्लिखित सेबी की अपनी टिप्पणियों से स्पष्ट रूप से विश्लेषण किया जा सकता है कि रेड्डी ने मुख्य रूप से डिपॉजिटरी कंपनी में अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी की, जब तक कि उसे एमसीएक्स में शीर्ष नौकरी पर नहीं मिली।

सीडीएसएल के एमडी और सीईओ के रूप में रेड्डी का कार्यकाल 31 मार्च, 2019 को समाप्त हो रहा था। सेबी अवलोकन के अनुसार, रेड्डी ने सीडीएसएल में मई तक नए एमडी और सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी की, जो उनके अब दंडित किए जाने के महत्वपूर्ण कारणों में से एक है। रेड्डी की स्थिति की खराब निर्वहण के कारण, सीडीएसएल को महीनों तक पूर्णकालिक एमडी और सीईओ के बिना काम करना पड़ा। रेड्डी ने मई में एमसीएक्स में कार्यभार संभाला जिसके बाद सीडीएसएल नए एमडी और सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

सेबी ने अपने पत्र में आगे कहा है कि रेड्डी को सीडीएसएल के अनुपालन अधिकारी के रूप में भी उनकी भूमिका में प्रतिद्वन्द्व में थे क्योंकि वह सीडीएसएल में अपनी नियुक्ति की चर्चा से खुद को दूर करने में विफल रहे।

सेबी के पत्र से पता चलता है कि सीडीएसएल को रेड्डी का कार्यकाल समाप्त होने से काफी पहले नए एमडी और सीईओ की नियुक्ति के लिए एक नामांकन और पारिश्रमिक नीति तैयार करनी थी। ‘हालाँकि, रेड्डी के कंपनी से बाहर चले जाने के बाद ऐसी पॉलिसी 30 मई को ही सीडीएसएल द्वारा प्रस्तुत की गई थी।’ इतना ही नहीं, बल्कि सेबी को 28 मार्च को सीडीएसएल को नीति प्रस्तुत करने के लिए याद दिलाना पड़ा , जिसके बावजूद ऐसा नहीं किया गया। आमतौर पर, इस तरह की नीति को एक्सचेंज या डिपॉजिटरी की तरह किसी भी बाज़ार अवसंरचना संसथान (मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन – एमआईआई) में प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों के कार्यकाल के पूरा होने के महीनों या हफ्तों पहले तैयार किया जाना चाहिए। लेकिन रेड्डी ने ऐसा नहीं किया जब वह सीडीएसएल का प्रबंधकर्ता था।

सूत्रों का कहना है कि फरवरी में एमसीएक्स में शीर्ष नौकरी के लिए उनके नाम की घोषणा होने तक और बाद में जब तक सेबी द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की गई थी, तब तक रेड्डी प्रक्रियाओं में शिथिल थे। अप्रैल 2019 में मीडिया द्वारा सीडीएसएल में कंपनी नियंत्रण के मुद्दों की सूचना दी गई।

सेबी आगे कहता है कि सीडीएसएल द्वारा प्रस्तुत पारिश्रमिक नीति भी मानदंडों के साथ असंगत थी। परिणामस्वरूप, एक मुख्य एमआईआई, सीडीएसएल, को पूर्णकालिक एमडी और सीईओ के बिना कार्य करना पड़ा।

सेबी का कहना है कि सीडीएसएल में रेड्डी के हित-संघर्ष मामला भी था।

“श्री पीएस रेड्डी ने खुद को हित-संघर्ष मामला से जुड़े विषयों की कार्यसूची की चर्चाओं से ना हटाकर न केवल सेबी के प्रावधानों का पालन नहीं किया बल्कि अनुपालन अधिकारी के रूप में भी अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहे।”

सेबी का यह भी कहना है कि रेड्डी अपने दूसरे कर्तव्य में भी असफल हो गए क्योंकि सीडीएसएल अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए एक प्रक्रिया शुरू करने के संबंध में अवलंबी अध्यक्ष ने अपनी सेवानिवृत्ति की आयु पार कर ली।

सेबी का कहना है, “यह पूर्व-एमडी, सीईओ (रेड्डी) की जिम्मेदारी थी कि वह जनहित निदेशक आयु सीमा पर आवश्यक कार्रवाई के लिए सेबी के निर्देशों की मांग का संचालक मंडल (सीडीएसएल के) के निर्देशों का पालन करें।”

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

सबसे अहम सवाल जो जवाब की मांग करता है, वह यह है कि इस तरह के कंपनी नियंत्रण के मामलों के बावजूद, सर्वप्रथम रेड्डी को सेबी द्वारा एमसीएक्स में शीर्ष नौकरी के लिए क्यों अनुमोदित किया गया? क्या कोई और नाम नहीं थे? आमतौर पर, जब कोई एमआईआई सिर्फ एक नाम जमा करता है, तो सेबी कुछ और नामों की मांग करता है। इस पर कुछ स्पष्टता की आवश्यकता है क्योंकि एमसीएक्स स्वयं गंभीर शासन से संबंधित मुद्दों से गुजर रहा है जैसा कि पीगुरुस द्वारा स्पष्ट किया गया है। कमोडिटी एक्सचेंज में किसी को कम से कम शासन से संबंधित मामलों में साफ पगडंडी वाले व्यक्ति आवश्यक था और सेबी और एमसीएक्स बोर्ड दोनों एक महत्वपूर्ण समय में इस महत्वपूर्ण मानदंड को स्पष्ट रूप से भूल गए। रेड्डी और सीडीएसएल ने ईमेल सवाल का जवाब नहीं दिया।

सेबी और इसके अस्पष्ट मानदंड

सेबी के मानदंड, मुख्य रूप से एक्सचेंज और डिपॉजिटरी में मुख्य प्रबंधकीय व्यक्तियों की नियुक्ति पर, कहते हैं कि उनकी नियुक्ति प्रत्येक के लिए “अधिकतम दो कार्यकाल पांच साल के लिए” हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि सेबी ने यह अनिवार्य कर दिया है कि एक्सचेंजों और डिपॉजिटरी के बोर्ड के सार्वजनिक हित निदेशकों को अन्य एमआईआई के बोर्ड में नियुक्त नहीं किया जा सकता, एमडी और सीईओ के लिए ऐसी किसी भी आवश्यकता पर मानदंड चुप हैं। मानदंड यह भी स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट नहीं करते हैं कि क्या किसी एमडी और सीईओ को दूसरे एमआईआई में नियुक्त किया जा सकता है यदि उसने एक एमआईआई में अपनी दो सत्र पूरी की हैं। स्पष्ट रूप से, रेड्डी सेबी द्वारा इस तरह के अस्पष्ट मानदंड के लाभार्थी रहे हैं क्योंकि उन्होंने एक प्रमुख एमआईआई सीडीएसएल में अपनी दो कार्यकाल पूरी की थीं और फिर भी एक अन्य एमआईआईआई एमसीएक्स में नियुक्त हुए।

इससे भी ज्यादा चौकाने वाली बात यह है कि जब सेबी चाहता है कि एक एमआईआई में सार्वजनिक हित निदेशक किसी अन्य एमआईआई में नियुक्त न हों, जब तक कि कम से कम निष्क्रिय समयावधि खत्म न हो, किसी अन्य एमआईआई से आने वाले ‘सीईओ या एमडी’ के लिए निष्क्रिय समयावधि’ की कोई आवश्यकता नहीं है। फिर से, यह रेड्डी के लिए लाभदायक साबित हुआ क्योंकि वह एमआईआई के नियुक्ति-संबंधी मानदंडों के बनने के बाद नियुक्त होने वाले सबसे हाल ही व्यक्ति थे।

रेड्डी को पहली बार तीन साल के लिए अप्रैल 2012 में सीडीएसएल में एमडी और सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक तीन और वर्षों के लिए फिर से नियुक्त किया गया और “भाग्यशाली” तरह से सीडीएसएल शासक के रूप में एक और साल का विस्तार पाया। रेड्डी को “दुगना सौभाग्य” मिला जब एमडी और सीईओ का पद एमसीएक्स में खाली हो गया जैसे ही सीडीएसएल में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ। बिना किसी निष्क्रिय समयावधि के एमसीएक्स में उनके नाम को मंजूरी दे दी गई या हम कहते हैं कि “बिना ज्यादा हलचल के” तब भी जब सीडीएसएल में उनके खिलाफ कंपनी नियंत्रण के मामले लंबित थे। सेबी कितना दयालु है जो रेड्डी सेे लेने से ज्यादा दे रहा है? क्यों?

अनुलेख: पीगुरुस आने वाले दिनों में इस विषय पर और अधिक लिखेगा कि कैसे एमसीएक्स और एनएसई विलय चुपचाप आकार ले रहा है … एक एकाधिकार संरचना की धीरे धीरे निर्माण।

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