यूपी पुलिस ने केरल पत्रकार संघ (केयूडब्ल्यूजे) पर वित्तीय अनियमितताओं और जमीन हड़पने का आरोप लगाया

यूपी सरकार के हलफनामे से पीएफआई सचिव सिद्दीक कप्पन और केयूडब्ल्यूजे के छुपे हुए गन्दे रहस्य उजागर हो रहे हैं।

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यूपी सरकार के हलफनामे से पीएफआई सचिव सिद्दीक कप्पन और केयूडब्ल्यूजे के छुपे हुए गन्दे रहस्य उजागर हो रहे हैं।
यूपी सरकार के हलफनामे से पीएफआई सचिव सिद्दीक कप्पन और केयूडब्ल्यूजे के छुपे हुए गन्दे रहस्य उजागर हो रहे हैं।

केयूडब्ल्यूजे ने पत्रकारिता की आड़ में पीएफआई कार्यकर्ता सिद्दीक कप्पन को बचाने के लिए एक प्रतिनिधि याचिका दायर करने का आरोप लगाया

सर्वोच्च न्यायालय में उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार द्वारा दिये हलफनामे में केरल आधारित पत्रकार संघ केयूडब्ल्यूजे (केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) द्वारा की गयीं वित्तीय अनियमितताओं और जमीन हड़पने को उजागर किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि केयूडब्ल्यूजे एक गैर-विश्वसनीय संगठन है, जो वित्तीय गड़बड़ी के लिए केरल सरकार के सतर्कता विभाग की जांच का सामना कर रहा है और संगठन ने जिहादी-समर्थक संगठन पीएफआई के मथुरा जेल में बंद यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून) के आरोपी सिद्दीक कप्पन को बचाने के लिए एक प्रतिनिधि याचिकाकर्ता के रूप में काम किया है। यूपी सरकार के 59 पन्नों के हलफनामे में केयूडब्ल्यूजे, सिद्दीक कप्पन के पीएफआई से करीबी संबंध और उसकी विदेश यात्राओं और बैंक खाते के विवरणों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

सिद्दीक कप्पन को 5 अक्टूबर को अन्य तीन पीएफआई कार्यकर्ताओं और उसके छात्र विंग कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं के साथ हाथरस जाते हुए गिरफ्तार किया गया था। यूपी पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि सिद्दीक ने अभी तक जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है जबकि उसके सह-आरोपी व्यक्तियों ने किया था। पुलिस ने कहा कि सिद्दीक पत्रकारिता की आड़ में केयूडब्ल्यूजे का इस्तेमाल कर रहा था और कहा कि केयूडब्ल्यूजे के अधिवक्ता विल्स मैथ्यू ने भी शीर्ष अदालत से कई तथ्यों को छिपाया। हलफनामे में एक अन्य पीएफआई कार्यकर्ता और उसके छात्र नेता राऊफ शरीफ के विशाल वित्तीय लेनदेन और सिद्दीक के साथ उसके संबंधों को भी विस्तार से बताया गया है। राऊफ को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से ओमान की ओर भागते हुए पकड़ा था। यूपी पुलिस ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में सिद्दीक के बैंक खाते में भी संदिग्ध लेनदेन मिला है। सिर्फ एक साल में राऊफ के बैंक खाते में खाड़ी देशों से 2.21 करोड़ रुपए से अधिक जमा हुए और एजेंसियों को लगता है कि राऊफ शाहीन बाग और यूपी के अन्य क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले वित्तपोषकों में से एक था[1]

कई पत्रकार फर्जी अभियान में लगे हुए थे कि यूपी पुलिस सिद्दीक के लिए वकील की सेवाएं नहीं दे रही थी और उसके परिवार को गिरफ्तारी के बारे में सूचित नहीं किया गया था। हलफनामे में दिखाए गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि ये सफेद झूठ कई पत्रकारों द्वारा प्रचारित किए गए थे।

हलफनामे में कहा गया – “शुरुआत में, यह प्रस्तुत किया जाता है कि याचिकाकर्ता (केयूडब्ल्यूजे) के पास खुद ही प्रामाणिकता की कमी है और इसे माननीय न्यायालय से कोई राहत नहीं मिलना चाहिए। याचिकाकर्ता संगठन (केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) की दिल्ली इकाई, जिसका सचिव अभियुक्त सिद्दीक कप्पन है, स्वयं केरल राज्य में सरकारी धन के गबन और दुरुपयोग के लिए एक जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर सतर्कता विभाग की जांच का सामना कर रहा है।” केयूडब्ल्यूजे के ऊपर, त्रिशूर में एक मंदिर की भूमि को हड़पने का मामला भी चल रहा है। पिछले साल पीगुरूज ने केयूडब्ल्यूजे की वित्तीय अनियमितताओं की सूचना दी थी[2]

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

पत्रकारिता की आड़ में पीएफआई कार्यकर्ता सिद्दीक कप्पन को बचाने के लिए केयूडब्ल्यूजे द्वारा की गयी याचिका को प्रतिनिधि याचिका करार देते हुए यूपी पुलिस ने याचिका खारिज करने की मांग की। यूपी पुलिस ने कहा, “यह प्रस्तुत किया गया है कि न्यायिक हिरासत में उस व्यक्ति की भूमिका को देखते हुए, जिसकी ओर से यह प्रतिनिधि याचिका दायर की गई है, यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि वह सक्षम अदालत द्वारा अपनी भूमिका के परीक्षण का सामना नहीं करना चाहता है।”

59 पन्नों के हलफनामे में सिद्दीक कप्पन द्वारा जॉर्जिया की यात्रा और राउफ शरीफ के बैंक खाते में ओमान से पैसे के बड़े प्रवाह को दर्शाते हुए विवरण भी प्रस्तुत किया गया। यूपी पुलिस ने यह भी कहा कि सिद्दीक हाथरस की घटना और सांप्रदायिक झड़पें कराने हेतु पैसा इकट्ठा करने के लिए एक वेबसाइट चला रहा था। यूपी पुलिस ने कहा कि परिवार को सूचित नहीं करने और कानूनी सेवाओं से वंचित रखने के केयूडब्ल्यूजे द्वारा लगाए आरोपों को हलफनामे में दस्तावेज रखकर पूरी तरह से गलत साबित किया गया। कई पत्रकार फर्जी अभियान में लगे हुए थे कि यूपी पुलिस सिद्दीक के लिए वकील की सेवाएं नहीं दे रही थी और उसके परिवार को गिरफ्तारी के बारे में सूचित नहीं किया गया था। हलफनामे में दिखाए गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि ये सफेद झूठ कई पत्रकारों द्वारा प्रचारित किए गए थे।

सोमवार को, केयूडब्ल्यूजे ने यूपी पुलिस के हलफनामे पर प्रतिक्रिया देने के लिए समय मांगा और इसी के साथ मामला जनवरी 2021 के तीसरे सप्ताह तक स्थगित कर दिया गया।

संदर्भ:

[1] ईडी ने पीएफआई के छात्रसंघ नेता को ओमान भागने की कोशिश करते एयरपोर्ट से पकड़ा। पूछताछ में शामिल होगी यूपी पुलिस। बैंक खातों में दो करोड़ से अधिक मिला।Dec 14, 2020, hindi.pgurus.com

[2] Kerala’s journalist union leaders and Press Clubs face Vigilance probe for financial fraudsOct 25, 2020, PGurus.com

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