उत्तराखंड के 51 मंदिरों के अधिग्रहण का मामला: भाजपा सरकार ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर आपत्ति दर्ज की

सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मंदिर अधिग्रहण जनहित याचिका में, उत्तराखंड सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दायर की, स्वामी पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया

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सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मंदिर अधिग्रहण जनहित याचिका में, उत्तराखंड सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दायर की, स्वामी पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया
सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मंदिर अधिग्रहण जनहित याचिका में, उत्तराखंड सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दायर की, स्वामी पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया

सरकार के खिलाफ उनके ट्वीट का हवाला देते हुए उन पर निजी और राजनीतिक हित साधने का आरोप लगाया

उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर याचिका में केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित 51 मंदिरों के अधिगृहण को उच्च न्यायालय में जायज ठहराया और मंदिर के अधिग्रहण के खिलाफ स्वामी के ट्वीट पर भी नाराजगी जताई। सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका को खारिज करने के लिए भाजपा शासित उत्तराखंड सरकार ने दावा किया कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण और भविष्य में चार धाम तीर्थयात्रा का पारदर्शी संचालन करने के लिए मंदिर का अधिग्रहण आवश्यक था। हालाँकि, 21-पृष्ठ के हलफनामे में, सरकार ने सुब्रमण्यम स्वामी के मुख्य अंतर्विरोधों और नटराज मंदिर अधिग्रहण और मंदिरों के मामलों में सरकार के हस्तक्षेप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय, मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने नए चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम के खिलाफ स्वामी की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया था। 28 मई को, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 11 जून तक जवाब देने का निर्देश दिया था[1]। दिलचस्प बात यह है कि, उच्च न्यायालय के समक्ष दायर सरकार के 21 पन्नों के जवाब में स्वामी के मंदिरों के अधिग्रहण और मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष बनाये जाने के खिलाफ स्वामी कीट्वीट्स श्रृंखला के सात पृष्ठ शामिल हैं।

स्वामी के ट्वीट और अधिनियम पर स्वामी की नाराजगी के खिलाफ आशंकाओं पर कई पृष्ठों को समर्पित करने के बाद, सरकार ने कहा कि 2013 में प्राकृतिक आपदा के कारण चार धाम यात्रा प्रबंधन के अच्छे संचालन के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस हुई।

हलफनामे में कई क्षेत्रों में, भाजपा शासित सरकार ने दावा किया कि स्वामी की याचिका जनहित याचिका (पीआईएल) श्रेणी के अंतर्गत नहीं आएगी और स्वामी के ट्वीट पर अफसोस किया। “यहाँ यह बताना प्रासंगिक है कि, उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम, 2019 के लागू होने के बाद याचिकाकर्ता (सुब्रमण्यम स्वामी) ने कई ट्वीट्स किए और अपने ट्वीट में कहा कि यह अधिनियम पूरी तरह से हानिकर, असंवैधानिक और हिंदुत्व की विचारधारा के खिलाफ है। इतना ही नहीं अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम, 2019 को लागू करने से पहले उत्तराखंड के महाधिवक्ता को उनसे सलाह लेनी चाहिए थी।”

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“यह यथोचित रूप से माना जा सकता है कि याचिकाकर्ता ने उपस्थित जनहित याचिका को दायर करते हुए नाराजगी जताई कि राज्य के महाधिवक्ता ने इस अधिनियम के लागू होने से पहले उनसे सलाह नहीं ली है….. याचिकाकर्ता एक राजनीतिक व्यक्ति हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने वर्तमान में पीआईएल रिट याचिका, अपने निजी और राजनीतिक हित को साधने के लिए दायर की है,” हलफनामे में राज्य संस्कृति सचिव ने कहा

स्वामी के ट्वीट और अधिनियम पर स्वामी की नाराजगी के खिलाफ आशंकाओं पर कई पृष्ठों को समर्पित करने के बाद, सरकार ने कहा कि 2013 में प्राकृतिक आपदा के कारण चार धाम यात्रा प्रबंधन के अच्छे संचालन के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस हुई। दिलचस्प बात यह है कि सरकार के हलफनामे में यह भी दावा किया गया है कि वे जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मंदिर, साईं बाबा, जगन्नाथ और सोमनाथ मंदिर जैसा एक अच्छा प्रशासन चाहते थे। यह उत्सुकता है कि उत्तराखंड सरकार ने साईं बाबा की तुलना इस राज्य के विवादास्पद अधिनियम से कैसे की

“वर्ष 2013 में हुई प्राकृतिक आपदा की घटना के बाद वर्ष 2019 में, चार धाम यात्रा प्रबंधन के लिए आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की गई। इसके अलावा, बद्रीनाथ जी और केदारनाथ जी मंदिरों के दर्शन करने वाले अधिकांश तीर्थयात्री गंगोत्री और यमुनोत्री भी गए जो तीर्थयात्रियों के लिए समान रूप से प्रसिद्ध धार्मिक क्षेत्र हैं। इसलिए, नए ढांचे के तहत यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों को शामिल करने और गंगोत्री, यमुनोत्री और अन्य प्रसिद्ध मंदिरों को फिर से जीवंत करने के लिए, उत्तराखंड में स्थित मंदिरों और देवस्थानमों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान बनाने की आवश्यकता थी, जैसे जम्मू और कश्मीर में स्थापित श्री वैष्णो देवी माता मंदिर, साईं बाबा, जगन्नाथ, और सोमनाथ मंदिर, ताकि बेहतर प्रशासन, प्रबंधन और पारदर्शिता बनाए रखी जा सके, ताकि धन और संपत्ति के दुरुपयोग को रोका जा सके और तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं और स्वच्छता प्रदान की जा सके।” केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों सहित 51 मंदिरों को अधिगृहण करने वाले अधिनियम के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर आपत्ति जताते हुए उत्तराखंड सरकार के हलफनामे में कहा गया।

हाल ही में सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधान मंत्री से विवादित मंदिर अधिग्रहण अधिनियम को वापस लेने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित करने का आग्रह किया था।

हालांकि, पूरे प्रतिक्रिया हलफनामे में, चिदंबरम जिले में नटराज मंदिर के तमिलनाडु सरकार के अधिग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के 2014 के निर्णय पर स्वामी द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर सरकार ने जवाब नहीं दिया। यह मामला सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर किया था। इस मामले में निर्णय और उसके बाद के कई निर्णयों में, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंदिरों का प्रबंधन भक्तों द्वारा किया जाना चाहिए, न कि सरकार द्वारा[2]

“राज्य ने केवल चार धाम देवस्थानम के प्रशासन में ट्रस्टियों के साथ सहयोग करने का प्रयास किया है। उनकी धार्मिक गतिविधियों के साथ छेड़छाड़ नहीं की गयी है, न ही ट्रस्टियों की शक्तियों को निलंबित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा देवस्थाम के प्रबंधन की शक्ति केवल सीईओ को दी गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत न्यासियों को पूरी तरह से हटाने का कोई इरादा नहीं है और न ही उन्हें दिए गए अधिकार का उल्लंघन किया गया है,” भाजपा शासित उत्तराखंड सरकार के 51 मंदिरों के अधिगृहण को जायज ठहराने वाले शपथ पत्र में दावा किया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में कहा, “इस बीच, बुधवार (10 जून) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना की समीक्षा बैठक की।” हाल ही में सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधान मंत्री से विवादित मंदिर अधिग्रहण अधिनियम को वापस लेने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित करने का आग्रह किया था[3]

संदर्भ:

[1] उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर दो सप्ताह में राज्य सरकार को जवाब देने का निर्देश दियाMay 29, 2020, hindi.pgurus.com

[2] Temples should be managed by devotees, not government: SCApr 8, 2019, The Times of India

[3] सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधान मंत्री से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को 51 मंदिरों के अधिग्रहण कानून को वापस लेने का निर्देश देने का आग्रह कियाMay 27, 2020, hindi.pgurus.com