विरोध और दंगों के साथ पीएम और एचएम को बदनाम करने की योजनाबद्ध रणनीति

दिल्ली बहुत सोच समझकर चुना हुआ स्थान था, क्योंकि पुलिस सीधे केंद्र के नियंत्रण में है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने में चूक के लिए पीएम और एचएम को दोष देना आसान हो जाता है।

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दिल्ली बहुत सोच समझकर चुना हुआ स्थान था, क्योंकि पुलिस सीधे केंद्र के नियंत्रण में है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने में चूक के लिए पीएम और एचएम को दोष देना आसान हो जाता है।
दिल्ली बहुत सोच समझकर चुना हुआ स्थान था, क्योंकि पुलिस सीधे केंद्र के नियंत्रण में है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने में चूक के लिए पीएम और एचएम को दोष देना आसान हो जाता है।

दिल्ली के दंगों के समय को लेकर एक गहरी साजिश को महसूस किया जा सकता है। इन दंगों का श्रेय नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को दिया गया। वास्तव में, अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त करना, ट्रिपल तालक और अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले ही विपक्ष में हलचल थी। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के अस्थिर मिजाज को भांप लिया और उन्हें यह मनगढ़ंत कहानी बनाकर भड़काया कि सीएए एक अन्यायपूर्ण कानून है जो उनकी नागरिकता छीन लेगा। इसने समुदाय को चपेट में ले लिया और वे जाल में फंस गए।

भड़काने के बाद, देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए धन मुहैया कराया गया। विपक्ष प्रधानमंत्री (पीएम)  नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री (एचएम) अमित शाह को निशाना बनाना चाहता था। इस मामले को भड़काने के लिए अखाड़े के रूप में दिल्ली का चयन किया गया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), जामिया मिलिया और दिल्ली की कुछ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। ये प्रयोगशाला के प्रयोगों की तरह थे जिन्हें बाद में बड़ी तैनाती के लिए आजमाया जा रहा था।

गृह मंत्रालय और प्रशासन हिंसा के अपराधियों के संदिग्ध योजना को पढ़ने में पूरी तरह से विफल रहे।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों पर भुगतान की नीति, योगी के प्रभावी कार्यान्वयन ने उन्हें रणनीति बदलने के लिए मजबूर किया। शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन एक अच्छी तरह से प्रबंधित अभ्यास था और इसने राष्ट्रव्यापी ध्यान आकर्षित किया। प्रतिभागियों को प्रतिदिन के आधार पर भुगतान किया गया था, जो कथित रूप से दिन के विरोध के लिए 500 रुपये, रात तक 800 रुपये और रात भर के लिए 1000 रुपये था। किसी को भी आश्चर्य होगा कि यह सारा पैसा कहां से आया? क्या नकली मुद्रा के प्रसार के कारण यह भारत में पहले से ही था?

दिल्ली के चुनाव में बहुत कुछ दांव पर था। दिल्ली में सत्तारूढ़ पार्टी, जो दौड़ में कहीं भी नहीं थी, इस अवसर को अपनी पहचान बनाने के लिए भुना लिया। सबसे पुरानी (ग्रैंड ओल्ड) पार्टी पहले से ही आंतरिक रूप से कमजोर थी, लेकिन यह जानती थी कि अपने वोटों को कैसे स्थानांतरित किया जाए। केंद्रीय सत्तारूढ़ पार्टी ने हल्के 2020 वित्तीय बजट के बावजूद, वोट शेयर प्रतिशत के मामले में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया। चुनाव से पहले सीएए प्रदर्शनकारियों पर की गई छोटी-मोटी कार्रवाई ने कई मतदाताओं को असंतुष्ट करने में योगदान दिया। कांग्रेस से थोक वोट स्थानांतरण ने सत्ताधारी पार्टी के साथ एक बार फिर से आरामदायक बहुमत के साथ चुनाव जीतने की चाल चली। चाहो न चाहो, मतदाता आश्वस्त होना पसन्द करते हैं। इसे कैसे हल किया जा सकता है यह एक अन्य लेख का विषय है।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

सरकार की सबसे बड़ी भूल शाहीनबाग पर नरम व्यवहार था; उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ कड़ा व्यवहार करने की सलाह का पालन नहीं किया। विपक्ष ने सरकार के रुख में कमजोरी देखी और सरकार को शर्मिंदा करने के लिए प्रयोग को आगे बढ़ाने और पीएम मोदी और एचएम अमित शाह को निशाना बनाने का फैसला किया।

दिल्ली बहुत सोच समझकर चुना हुआ स्थान था, क्योंकि पुलिस सीधे केंद्र के नियंत्रण में है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने में चूक के लिए पीएम और एचएम को दोष देना आसान हो जाता है। केजरीवाल के लिए कई विशेषण उपयोग कर सकते हैं परन्तु मूर्ख उनमें से एक नहीं है।

हैरानी की बात यह है कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग विपक्ष और उसकी विशाल योजना को नहीं समझ सके और जाल में फंस गए। गृह मंत्रालय और प्रशासन हिंसा के अपराधियों के संदिग्ध योजना को पढ़ने में पूरी तरह से विफल रहे।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पहले से तय यात्रा की घोषणा के साथ, दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करने और पीएम मोदी की छवि खराब करने की रणनीति बनाई गई। पिछले कुछ दिनों में आगजनी में हुई मौतों ने सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाया है। यह समाज में नफरत, अराजकता और भ्रम पैदा करने के लिए मानव निर्मित कुचेष्टा है।

पीएम और एचएम उस परेशानी को पढ़ने में असफल रहे, जिसमें वे आगे बढ़ रहे थे। अब सरकार के पास सख्ती के साथ स्थिति को संभालने और किसी भी अन्य नुकसान को रोकने का समय है।

सरकार को भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करनी चाहिए, चल रहे अदालती मामलों को निष्पक्ष अभियोजन के साथ तार्किक रूप से समाप्त करना चाहिए। कुछ भ्रष्ट बाबू सरकार के प्रयासों को रोक रहे हैं। ऐसे कई ईमानदार अधिकारी हैं जिन पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं। इस दुर्भावनापूर्ण बुराई को नष्ट किया जाना चाहिए।

दृढ़ संकल्प के साथ आवश्यक कार्रवाई समय की आवश्यकता है।

ध्यान दें:
1. यहां व्यक्त विचार लेखक के हैं और पी गुरुस के विचारों का जरूरी प्रतिनिधित्व या प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

3 COMMENTS

  1. Sir,

    You should have also pointed out how Modi & Amit Shah did not act in timely manner and was sitting cross legged when all these riots are being prepared, right from the protests in Shaheen Bagh.

    I respect PGurus, please let it not become a mouthpiece of BJP/RSS. It will loose its legitimacy.

    Thanks and regards

  2. Waao what a great story but what about the facts, ignorance of police, no action from central government, transfer of the Judge.
    The center Govt claims to fight with Pakistan, but they can’t handle internal matters. Everyone can see and judge the fact. People have right to protest, you have to convince then not kill them. I supported BJP till this incident but BJP brought shame to the nation and the democracy.
    Shame on Indian media as well, all works for money.

    • Judge’s transfer was already conveyed on 12th Feb, many days before these incident.
      And if one is so fragile ideologically, then nobody can help. This is the only govt who is fighting with internal and external enemies with honest intents of making nation secure.

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