सीबीआई ने इंडियन बैंक में चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट की 100 करोड़ रुपये से अधिक की सावधि जमा (टर्म डिपॉजिट) को ठगने के आरोप में बैंक कर्मचारियों सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया

इंडियन बैंक गलत कारणों से चर्चा में बना हुआ है क्योंकि उसके अधिकारियों ने चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट की सावधि जमा (टर्म डिपॉजिट) को ठगा है!

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चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट धोखाधड़ी में सीबीआई ने बैंक कर्मचारी समेत 9 को किया गिरफ्तार
चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट धोखाधड़ी में सीबीआई ने बैंक कर्मचारी समेत 9 को किया गिरफ्तार

सीबीआई ने इंडियन बैंक धोखाधड़ी मामले में सीपीटी की 100 करोड़ रुपये से अधिक की सावधि जमा की कथित धोखाधड़ी के मामले में 9 को गिरफ्तार किया

अधिकारियों ने मंगलवार को कहा, इंडियन बैंक में चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट (सीपीटी) की 100 करोड़ रुपये से अधिक की सावधि जमा को प्रतिबंधित (फोरक्लोज़) करके कथित रूप से ठगने के आरोप में सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा, कि एजेंसी ने 31 जुलाई, 2020 को बैंक के अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ बैंक में जमा 100.57 करोड़ रुपये से अधिक की सीपीटी की सावधि जमा को साजिश करके बंद करने और राशि निकालकर विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर दिये जाने के आरोपों में जांच शुरू की थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो के प्रवक्ता आरसी जोशी ने कहा – “यह भी आरोप लगाया गया था कि इंडियन बैंक को कई सावधि जमाओं को फोरक्लोजिंग / प्री-क्लोजिंग के माध्यम से 45.40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।”

एक साल से अधिक समय की विस्तृत जांच के बाद, सीबीआई ने सोमवार रात नौ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान गणेश नटराजन, वी मणिमोझी, जे सेल्वाकुमार, के जाकिर हुसैन, एम विजय हेराल्ड, एम राजेश सिंह, एस सियाद, एस अफसर और वी सुदलाईमुथु के रूप में हुई। उन्होंने कहा कि चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट नियमित रूप से सावधि जमा में निवेश करता है, जिसके लिए उसकी खुली निविदाएं थीं, जिसे इंडियन बैंक की कोयम्बेडु शाखा ने हासिल किया था।

सीबीआई ने चेन्नई, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और नागरकोइल सहित 22 स्थानों पर तलाशी ली, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई।

जोशी ने कहा – “उस प्रक्रिया में, कुल 100.57 करोड़ रुपये (लगभग) सीपीटी से पांच निवेशों में स्थानांतरित किए गए थे, जिसके लिए विभिन्न राशियों के 45 सावधि जमा बनाए गए थे। धोखाधड़ी का पता लगाए जाने के बाद निवेश की गई कुल राशि में से, 55.19 करोड़ रुपये को फ्रीज (बचा पाना) किया जा सका और शेष 45.40 करोड़ रुपये आरोपियों द्वारा ठग लिए गए।” एक बार जमा हो जाने के बाद, नटराजन खुद को चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट के उप निदेशक (वित्त) के रूप में पेश करते हुए शाखा में गए, जहां उन्होंने जाली दस्तावेजों के आधार पर शाखा में सीपीटी के नाम पर एक नकली चालू खाता खोला।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

जोशी ने कहा – “हर अवसर पर सीपीटी से निवेश की प्राप्ति के बाद, बैंक ने उक्त निवेश के लिए सावधि जमा रसीदें (बॉन्ड) बनाई और उक्त बॉण्ड आरोपी (नटराजन) को सीधे बैंक से प्राप्त हुआ। मूल बॉण्ड को सीपीटी को देने के बजाय, आरोपी ने डुप्लीकेट बॉण्ड बनाए और जाली बॉण्ड सीपीटी को सौंपे।” मूल बॉण्ड उनके पास होने के कारण, आरोपियों ने कथित तौर पर बैंक से संपर्क किया और खातों के खुलने के कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें बन्द करा दिया। राशि को बैंक में बनाए गए सीपीटी के फर्जी खातों में स्थानांतरित कर दिया गया और आगे इसे 28 अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। जोशी ने कहा – “राशि को बाद में 28 अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसे खाताधारकों ने निकाल लिया और आरोपी व्यक्तियों को सौंप दिया।”

उन्होंने कहा कि सीबीआई ने चेन्नई, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और नागरकोइल सहित 22 स्थानों पर तलाशी ली, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई। जोशी ने कहा कि गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों में से आठ को सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश (चेन्नई) के समक्ष पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि तिरुनेलवेली से गिरफ्तार किए गए शेष एक आरोपी को सक्षम न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड पर पुलिस हिरासत में लिया गया।

[पीटीआई इनपुट्स के साथ]

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