उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई द्वारा कराये जाने के उच्च न्यायालय के निर्देश, के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआई जांच के खिलाफ उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पहुंचे उच्चतम न्यायालय, पत्रकार ने दर्ज किया था मामला!

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भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआई जांच के खिलाफ उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पहुंचे उच्चतम न्यायालय, पत्रकार ने दर्ज किया था मामला!
भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआई जांच के खिलाफ उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पहुंचे उच्चतम न्यायालय, पत्रकार ने दर्ज किया था मामला!

विपक्षी दलों द्वारा उनके इस्तीफे की मांग के साथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के उच्च न्यायालय के निर्देश के खिलाफ, बुधवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए एक पत्रकार के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि झारखंड के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के बैंक खाते में नोटबंदी के बाद (पोस्ट-डिमैनेटाइजेशन) जमा किया था। पत्रकार द्वारा प्रस्तुत, मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों को धन हस्तांतरण के बारे में, रिपोर्ट और दस्तावेजों को देखकर, न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी ने सीबीआई जांच का आदेश दिया।

पत्रकार उमेश शर्मा ने अदालत में एक याचिका दायर की थी, जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट के लिए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि झारखंड के एक अमृतेश चौहान ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निजी लाभ के लिए हरेंद्र सिंह रावत और उनकी पत्नी सविता रावत के बैंक खाते में विमुद्रीकरण के बाद पैसा जमा किया था। आरोपों के समर्थन वाली पोस्ट के साथ बैंक स्टेटमेंट भी संलग्न किए गए थे। शर्मा ने दावा किया था कि सविता रावत मुख्यमंत्री की पत्नी की बहन हैं। हरेंद्र सिंह रावत ने 31 जुलाई को देहरादून पुलिस स्टेशन में शर्मा के खिलाफ भयादोहन (ब्लैकमेलिंग) का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पत्रकार का प्रतिनिधित्व किया। पक्षों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति मैथानी ने शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी को खारिज कर दिया और मामले की जांच हेतु सीबीआई को निर्देश जारी किए।

हरीश रावत ने अदालत के आदेश को “गंभीर” बताया और मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच की सुविधा हेतु पद छोड़ने के लिए कहा।

एक अन्य पत्रकार शिव प्रसाद सेमवाल ने भी मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की रिपोर्टिंग करने के लिए दर्ज हुई एफआईआर को रद्द करने के लिए ऐसे ही मामले पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री रावत, जो उस समय भाजपा के झारखंड प्रभारी थे, पर आरोप लगाया कि, उन्होंने 2016 में गौ सेवा अयोग का प्रमुख बनाने के लिए उस राज्य में एक व्यक्ति की नियुक्ति का समर्थन करने के लिए अपने रिश्तेदारों के खातों में धन हस्तांतरित कराया था।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से इस्तीफे की मांग की। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उत्तराखंड के लिए नव नियुक्त पार्टी प्रभारी देवेंद्र यादव के साथ आयोजित देहरादून में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राज्य कांग्रेस प्रमुख प्रीतम सिंह ने बताया, “एक मुख्यमंत्री, जो भ्रष्टाचार के प्रति राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस (बर्दाश्त न करना) नीति का ढिंढोरा पीटते नहीं थकता, उस मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का कोई हक नहीं!” सिंह ने कहा कि पार्टी राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के साथ इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए मुलाकात का वक्त मिलने का इंतजार कर रही है।

हरीश रावत ने अदालत के आदेश को “गंभीर” बताया और मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच की सुविधा हेतु पद छोड़ने के लिए कहा। उन्होंने कहा, “उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, मुख्यमंत्री को तुरंत अपने खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच का मार्ग प्रशस्त करने हेतु अपना पद छोड़ देना चाहिए।”

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