अवमानना मामलों में भ्रष्ट लेफ्ट-लिबरल (वामपंथी-उदारवादी) तंत्र का कपट। प्रशांत भूषण के लिए रो रहा है, लेकिन गुरुमूर्ति को जेल होने की कामना करता है

प्रशांत भूषण के लिए वामपंथी लिबरल रो रहे हैं, जिन्हें अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया था। लेकिन जब गुरुमूर्ति न्यायमूर्ति मुरलीधर की आलोचना के लिए दो अवमानना आरोपों का सामना कर रहे थे, तो वे कहां थे?

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प्रशांत भूषण के लिए वामपंथी लिबरल रो रहे हैं, जिन्हें अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया था। लेकिन जब गुरुमूर्ति न्यायमूर्ति मुरलीधर की आलोचना के लिए दो अवमानना आरोपों का सामना कर रहे थे, तो वे कहां थे?
प्रशांत भूषण के लिए वामपंथी लिबरल रो रहे हैं, जिन्हें अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया था। लेकिन जब गुरुमूर्ति न्यायमूर्ति मुरलीधर की आलोचना के लिए दो अवमानना आरोपों का सामना कर रहे थे, तो वे कहां थे?

लेफ्ट-लिबराटी (वामपंथी और तथाकथित उदारवादी) ने हमेशा दोहरा चरित्र दिखाया है। नवीनतम प्रयास प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले पर उनका विलाप है[1]न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा (जिन पर हमेशा इन भ्रष्ट लोगों द्वारा आरोप लगाया जाता है) की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा प्रशांत भूषण को अदालत की अवमानना का दोषी पाए जाने के बाद सभी विलाप करने लगे और फैसले के खिलाफ हस्ताक्षर करने वाली ‘प्रख्यात व्यक्तियों’ की सामूहिक याचिका वाला अपना पुराना ड्रामा शुरू कर दिया। लेकिन यहां यह सवाल उठता है कि जब विख्यात वित्तीय विश्लेषक, संपादक और दक्षिण पंथी एस गुरुमूर्ति, न्यायमूर्ति मुरलीधर की आलोचना के लिए दो अवमानना के आरोपों का सामना कर रहे थे, तब ये लोग कहां थे? कई लोग गुरुमूर्ति को जेल में देखना चाहते थे और अब जब पासा पलट गया है, तो वे विलाप कर रहे हैं। कपट भी इन भ्रष्ट लोगों को विश्लेषित करने में अक्षम है।

गुरुमूर्ति के खिलाफ अवमानना के आरोप क्या थे? उन्होंने न्यायमूर्ति मुरलीधर पर आपत्ति जताई, जो भ्रष्ट और आरोपी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के करीबी होने के लिए जाने जाते थे, एजेंसियों के खिलाफ चिदंबरम के बेटे कार्ति की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। गुरुमूर्ति ने ट्वीट किया था कि कभी, न्यायमूर्ति मुरलीधर चिदंबरम के जूनियर अधिवक्ता थे[2]। तकनीकी रूप से मुरलीधर नहीं थे लेकिन सभी जानते थे कि; यह भी सच है कि मुरलीधर चिदंबरम और उनकी पत्नी नलिनी को अच्छी तरह जानते थे। कुछ अधिवक्ताओं के संघ ने एक शिकायत दर्ज की थी जो एक अवमानना के मामले में बदल गयी। किसी तरह यह मामला खत्म हुआ। आदर्श रूप से, न्यायमूर्ति मुरलीधर को खुद को पूरे मामले से दूर करना चाहिए था जब कार्ति की एक याचिका उनके सामने आई थी क्योंकि वह कार्ति के परिवार को अच्छी तरह जानते थे। बाद में एजेंसियों द्वारा चुनौती दिए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने यह याचिका ली।

गुरुमूर्ति के खिलाफ दूसरा मामला क्या था? उन्होंने न्यायमूर्ति मुरलीधर के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के आरोपी – अब जेल में – गौतम नवलखा की याचिकाओं के खिलाफ ट्वीट किया[3]। भारत विरोधी गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध नवलखा, एक शहरी नक्सल, न्यायमूर्ति मुरलीधर की पत्नी उषा रामनाथन का बहुत करीबी सहयोगी है। उनकी पत्नी भी शहरी नक्सलियों की बड़ी समर्थक है। वह मामला भी समाप्त हो गया और न्यायमूर्ति मुरलीधर अब दिल्ली उच्च न्यायालय से बाहर स्थानांतरित हो गए। कई तथाकथित उदारवादी और वामपंथी भ्रष्ट गुरुमूर्ति के लिए जेल की मांग कर रहे थे। अब वे प्रशांत भूषण के लिए विलाप कर रहे हैं।

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गुरुमूर्ति ने किसी न्यायाधीश के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया था। उन्होंने याचिकाकर्ताओं या अभियुक्तों के साथ जज की निकटता पर वैध सवाल उठाए थे, जो सभी की जानकारी में थी और अब सार्वजनिक दृष्टिकोण में है। प्रशांत भूषण एक विख्यात वकील और अदालत के अधिकारी हैं, अपने ट्वीट में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि प्रशांत भूषण एक अच्छे सार्वजनिक उत्साही वकील हैं। लेकिन इससे उन्हें जजों को गाली देने की या उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की आजादी नहीं मिलती। प्रशांत भूषण पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर नखरे करने और दुर्भावनापूर्ण और गलत आरोपों का इस्तेमाल करने के लिए पहले से ही 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उस जुर्माने का भुगतान करना अभी बाकी है[4]। वह और उनके सहयोगी दुर्व्यवहार करके बच नहीं सकते। चलिए हम इंतजार करते हैं कि शीर्ष न्यायालय प्रशांत भूषण के लिए सजा क्या तय करता है। कानून सब से ऊपर है। किसी को भी वामपंथी और तथाकथित उदारवादियों की परवाह नहीं है। उन्हें याचिका पर हस्ताक्षर करने दें और कानून को अपनी कार्रवाई करने दें। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।

संदर्भ:

[1] Noted lawyer Prashant Bhushan falls flat on young lawyer Mehek Maheshwari’s case on Contempt of CourtAug 15, 2020, PGurus.com

[2] Court Raps S Gurumurthy for Falsely Linking Judge to ChidambaramMar 14, 2018, The Quint

[3] Delhi High Court seeks NIA’s response on Gautam Navlakha’s bail pleaMay 22, 2020, The Hindu

[4] What the Supreme Court Said While Holding Prashant Bhushan in ContemptAug 14, 2020, The Wire