बढ़ते कोविड-19 मामले: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जेलों से पैरोल और रिहाई को बढ़ाने के निर्देश दिये। जेलों में भीड़ कम करने हेतु गिरफ्तारियाँ सीमित करने का निर्देश!

शीर्ष न्यायालय ने एचपीसी को निर्देश दिया कि वह जेलों में भीड़ कम करने में मदद करे!

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शीर्ष न्यायालय ने एचपीसी को निर्देश दिया कि वह जेलों में भीड़ कम करने में मदद करे!
शीर्ष न्यायालय ने एचपीसी को निर्देश दिया कि वह जेलों में भीड़ कम करने में मदद करे!

महामारी के मद्देनजर, जेलों में भीड़ कम करने के लिए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शनिवार को एक आदेश पारित किया, जिसमें पैरोल और कैदियों की अस्थायी रिहाई को बढ़ाने की अनुमति दी एवं सभी राज्यों और न्यायालयों को गिरफ्तारी और कैदी को जेल भेजने की प्रक्रिया को सख्ती से सीमित करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति नागेश्वर राव और सूर्यकांत की खंडपीठ जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना कर रहे थे, ने आदेश दिया कि जेल मामलों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) को तत्काल कैदियों की अस्थायी रिहाई की सूची तैयार करने के लिए गठित किया जाना चाहिए और कोविड-19 मामलों के मद्देनजर जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों को रिहा कर देना चाहिए।

ऐसे कैदियों के अलावा, नई रिहाई हेतु एचपीसी को मानक संचालन प्रक्रिया और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देश सहित दिशानिर्देशों को जल्द से जल्द अपनाने पर विचार करना चाहिए। पीठ ने कहा कि जिन राज्यों ने पिछले साल उच्चाधिकार प्राप्त समितियों का गठन नहीं किया है, वे तुरंत करें। भारत के शीर्ष न्यायालय ने कहा, “एचपीसीएस को ताजा रिहाई पर विचार करने के अलावा उन सभी कैदियों को रिहा कर देना चाहिए, जिन्हें 23 मार्च, 2020 को हमारे आदेश के जारी होने से पूर्व रिहा किया गया था[1]।”

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन लोगों को पहले से ही पैरोल दी गई है, उन्हें महामारी की रोकथाम हेतु देश भर की जेलों में भीड़ कम करने के लिए 90 दिन की और छूट दी जानी चाहिए। वेबसाइट पर उपलब्ध दिल्ली जेल में कैदियों की संख्या की सराहना करते हुए, शीर्ष अदालत ने अन्य राज्यों को भी इस पद्धति का पालन करने का निर्देश दिया।

शीर्ष न्यायालय ने अधिकारियों और निचली अदालतों को महामारी के दौरान गिरफ्तार करने और व्यक्तियों को जेल भेजने की संख्या सीमित करने के लिए कहा – “महामारी के दौरान अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में इस न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोपियों को गिरफ्तार करने से अधिकारियों को सख्त नियंत्रित और सीमित करें।” आदेश ने राज्यों को पिछले साल राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए भी कहा।

संदर्भ:

[1] [BREAKING] Supreme Court orders re-release of all eligible prisoners to prevent COVID-19 spread in prisonsMay 08, 2021, Bar and Bench

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  1. […] से विदाई ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने बुधवार को कहा कि सर्वोच्च न्यायालय […]

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