सुब्रमण्यम स्वामी ने सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिकाओं के सूचीबद्ध करने में देरी करने के लिए कानून अधिकारियों द्वारा चालें चले जाने का आरोप लगाया। इसके बजाय नेशनल हेराल्ड के मामलों में तेजी लाने के लिए कहा

शीर्ष न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने से उनके मामलों को रोकने के लिए चालें चलाने वाले कानून अधिकारियों पर सुब्रमण्यम स्वामी ने नाराजगी व्यक्त की!

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शीर्ष न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने से उनके मामलों को रोकने के लिए चालें चलाने वाले कानून अधिकारियों पर सुब्रमण्यम स्वामी ने नाराजगी व्यक्त की!
शीर्ष न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने से उनके मामलों को रोकने के लिए चालें चलाने वाले कानून अधिकारियों पर सुब्रमण्यम स्वामी ने नाराजगी व्यक्त की!

स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्धता में देरी के लिए कानून अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त की!

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने रविवार को शीर्ष न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने से उनके मामलों को रोकने के लिए चालें चलाने वाले सरकारी कानून अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कानून अधिकारियों को उनके मामले को सूचीबद्ध होने में देरी करने के बजाय, आयकर और हेराल्ड हाउस बेदखली के मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा नेशनल हेराल्ड की अपील में हो रही दो साल से ज्यादा देरी की प्रक्रिया तेज करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के बेहद करीबी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का नाम लिए बिना ट्वीट किया।

कुछ दिन पहले स्वामी ने नाराजगी जाहिर की जब उनकी पहले दर्ज की गयी पूजास्थल अधिनियम के खिलाफ याचिका को सूचीबद्ध नहीं किया गया था और जबकि भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की एक अन्य याचिका को सूचीबद्ध कर दिया गया था। स्वामी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे के समक्ष शीर्ष न्यायालय की रजिस्ट्री और लिस्टिंग कार्यालयों में इस अस्पष्टीकृत देरी और विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया। शीर्ष न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और याचिका को उपाध्याय की याचिका के साथ टैग किया है। यह मामला जो काशी विश्वनाथ और मथुरा श्री कृष्ण मंदिरों की बहाली के लिए गति प्रदान करेगा, भाजपा नियंत्रित केंद्र सरकार के लिए तनावपूर्ण है[1]

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

कुछ दिन पहले अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए, स्वामी ने यह भी ट्वीट किया था कि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिकाओं के सूचीबद्ध होने में देरी के पीछे कुछ कानून अधिकारियों की चालों पर लगाम लगाना चाहिए। स्वामी ने यह भी कहा था कि आजकल चीजें कानून मंत्री के हाथों में नहीं हैं क्योंकि मोदी के शासन ने प्रोटोकॉल (नियम) में बदलाव किया है। यह सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पर एक स्पष्ट दोष के रूप में देखा गया है, जो कानूनी मामलों में मोदी और शाह के अगुआ हैं।

414 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी के नेशनल हेराल्ड मामले में, सोनिया और राहुल ने आयकर न्यायाधिकरणों से दिल्ली उच्च न्यायालय तक सभी मंचों पर हार का सामना किया है और उन्होंने आयकर विभाग के खिलाफ शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन पिछले दो वर्षों से, इस महत्वपूर्ण मामले को सूचीबद्ध नहीं किया गया है। ऐसा ही हाल दिल्ली में हेराल्ड हाउस की बेदखली का है। सभी मंचों में कांग्रेस के नेता केस हार गए और यह मामला भी पिछले दो साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इसके अलावा, सुब्रमण्यम स्वामी के तीन महत्वपूर्ण मामले पिछले एक साल से सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध नहीं हुए हैं। एक मामला सार्वजनिक हित याचिका है जो बढ़ते गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) और व्यवसायियों (कॉर्पोरेट्स) को दिये गए भारी ऋण को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक से दिशानिर्देश की मांग करती है। अपनी याचिका में स्वामी ने भारत में प्रमुख 10 कॉर्पोरेट घरानों को 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निपटारण हेतु लंबित ऋण को उजागर करने वाली क्रेडिट सुइस रिपोर्ट का प्रस्तुतिकरण किया है। प्रसिद्ध वित्तीय विश्लेषक और वकील एमआर वेंकटेश द्वारा सहायता प्राप्त स्वामी द्वारा दायर एक दूसरा मामला आरबीआई अधिकारियों पर बड़े ऋणों को मंजूरी देने के मामले में जांच की मांग करने का है, ऐसे ऋण जो बाद में एनपीए हो गए और उनमें बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले दर्ज करने की भी मांग की। स्वामी का एक तीसरा मामला जो अभी तक सूचीबद्ध नहीं है, वह है बीजेपी शासित उत्तराखंड सरकार द्वारा केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर सहित 51 मंदिरों के अधिग्रहण के खिलाफ उनकी अपील

संदर्भ:

[1] सुब्रमण्यम स्वामी की पूजास्थल अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को नोटिस जारी कियाMar 26, 2021, hindi.pgurus.com

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