अमेरिकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए, भारत एस-400 मिसाइल प्रणाली संचालन के प्रशिक्षण के लिए जल्द ही 100 वायुसेना अधिकारियों को मास्को भेजेगा। आपूर्ति दिसंबर 2021 में शुरू होगी!

अमेरिका को क्रोधित करने का जोखिम उठाते हुए, भारत एस-400 हेतु प्रशिक्षित करने के लिए 100 वायुसेना अधिकारियों को रूस भेजेगा!

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अमेरिका को क्रोधित करने का जोखिम उठाते हुए, भारत एस-400 हेतु प्रशिक्षित करने के लिए 100 वायुसेना अधिकारियों को रूस भेजेगा!
अमेरिका को क्रोधित करने का जोखिम उठाते हुए, भारत एस-400 हेतु प्रशिक्षित करने के लिए 100 वायुसेना अधिकारियों को रूस भेजेगा!

पहला एस-400 इस साल के अंत तक भारत में आ जाएगा और शेष चार प्रणालियों को 2023 तक सौंपा जाएगा

प्रतिबंध लागू करने की अमेरिकी धमकी को नजरअंदाज करते हुए, भारतीय वायु सेना के अधिकारियों का पहला जत्था जल्द ही एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों के संचालन हेतु प्रशिक्षण के लिए मास्को के लिए रवाना होगा। भारत और रूस ने 2018 में पांच रक्षा प्रणालियों के लिए छह बिलियन-डॉलर से अधिक (45,000 करोड़ रुपये) का सौदा किया था। पीगुरूज ने पहले बताया था कि कैसे रूस ने दिसंबर 2021 तक आपूर्ति शुरू करने की देरी करके एस-400 सौदे में भारत को मूर्ख बनाया था, जबकि चीन ने भारत के खिलाफ पहले ही लद्दाख की ओर तिब्बत क्षेत्र में एस-400 स्थापित कर दी थीं। अमेरिका ने रूस से एस-400 खरीदने के लिए पहले ही प्रतिबंध लगा दिए थे और यह एक सर्वविदित तथ्य है कि एस-400 में चीनी सॉफ्टवेयर लगे हैं। उन्नत मिसाइलों के अमेरिकी प्रस्ताव को नजरअंदाज करते हुए, नरेंद्र मोदी सरकार ने रूसी एस-400 खरीदना पसंद किया जो चीनी प्रणालियों पर काम कर रहा है। भारत के सामने आने वाली समस्या और रूस के धोखे के बारे में पीगुरूज ने विस्तार से बताया है[1]

भारतीय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पहला एस-400 इस साल के अंत तक भारत में आ जाएगा और शेष चार प्रणालियों को 2023 तक सौंपा जाएगा। चीन ने पहले ही छह एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों को शामिल कर लिया है और भारत को अपने वायु क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए इसकी आवश्यकता है। एस-400, 500 किमी से अधिक की दूरी से आने वाले शत्रु विमान या मिसाइल का पता लगा सकता है और इसे मार गिरा सकता है। चीन ने लद्दाख पर ध्यान केंद्रित करते हुए तिब्बत क्षेत्र में अपना एस-400 तैनात किया है।

भारत और रूस ने अमेरिका की आपत्तियों और अमेरिका द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों के विरोध हेतु बनाए गए दंडात्मक अधिनियम (सीएएटीएसए) के तहत प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद पांच एस-400 मिसाइल प्रणालियों के सौदे को पूरा किया।

भारतीय टीम के मास्को जाने के बारे में जानकारी देते हुए रूसी राजदूत निकोलाय कुदाशेव ने मंगलवार को बताया कि यह एक उल्लेखनीय अवसर है जो हमारी रणनीतिक साझेदारी में एक नए चरण की शुरूआत करेगा। अधिकारियों और एयरमैन सहित 100 से अधिक वायु कर्मी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए इस महीने के अंत तक रूस के लिए रवाना होंगे। राजदूत ने दूतावास के एक समारोह में भारतीय दल की मेजबानी करते हुए कहा – “एस-400 आपूर्ति पहल रूसी-भारतीय सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग में प्रमुख परियोजनाओं में से एक है, जो ऐतिहासिक रूप से हमारे दोनों मित्र देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के मुख्य स्तंभ का गठन करती है।”

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

उन्होंने कहा कि भारत और रूस ने अमेरिका की आपत्तियों और अमेरिका द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों के विरोध हेतु बनाए गए दंडात्मक अधिनियम (सीएएटीएसए) के तहत प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद पांच एस-400 मिसाइल प्रणालियों के सौदे को पूरा किया। संयोग से, अमेरिका ने तुर्की के खिलाफ, रूस के साथ एस-400 के मर्मभेदी समझौते के लिए, प्रतिबंध लगाए हैं। इस महीने की शुरुआत में एक विदाई संबोधन में, निवर्तमान अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या अमेरिका एस-400 खरीद पर भारत के खिलाफ सीएएटीएसए प्रतिबंधों को लागू करेगा, लेकिन यह कहा कि भारत को ऐसी खरीद के प्रभाव पर विचार करना चाहिए जो प्रौद्योगिकी और भारत और अमेरिका के बीच अन्य रक्षा सहयोग को बाधित करती है।

चल रहे रक्षा सहयोग पर, कुदाशेव ने कहा कि एस-400 के साथ, दोनों पक्ष सफलतापूर्वक ऐके-203 राइफल अनुबंध, 200 केए-226टी उपयोगिता हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति के कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश हिंद महासागर में समुद्री सहयोग को मजबूत करने के अलावा कल-पुर्जों के संयुक्त उत्पादन समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए तत्पर हैं।

जहां तक एस-400 सौदे का संबंध है, उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आधार पर न्यायसंगत और समान संबंधों के ढांचे पर आधारित है।

सौदे पर भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए, विदेश मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का हिस्सा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप रक्षा आवश्यकताओं का मार्गदर्शन करता है। मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। रूस के साथ भारत की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत ने हमेशा एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। यह हमारी रक्षा आवश्यकताओं और आपूर्ति पर भी लागू होता है, जो हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों द्वारा निर्देशित होता है।”

संदर्भ:

[1] S-400 deal – Did Russia ditch India by delaying start of supply to end 2021? China has already placed S-400 missiles system in Tibet aimed at LadakhDec 22, 2020, PGurus.com

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