व्यवसायी और व्यापारिक घरानों ने 2018-19 में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को 876 करोड़ रुपये का दान दिया। बीजेपी को सबसे ज्यादा 698 करोड़ रुपये का चंदा मिला।

राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को दिये दस्तावेजों के आधार पर एडीआर द्वारा जारी किए गए आंकड़े दिखाते हैं कि बीजेपी को अधिकतम चंदा मिला!

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राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को दिये दस्तावेजों के आधार पर एडीआर द्वारा जारी किए गए आंकड़े दिखाते हैं कि बीजेपी को अधिकतम चंदा मिला!
राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को दिये दस्तावेजों के आधार पर एडीआर द्वारा जारी किए गए आंकड़े दिखाते हैं कि बीजेपी को अधिकतम चंदा मिला!

वित्तीय वर्ष 2018-19 (लोकसभा चुनाव वित्तीय वर्ष से पहले) में व्यवसायी घरानों ने विभिन्न राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को कुल मिलाकर 876 करोड़ रुपये का चंदा दिया और थिंक टैंक (प्रबुद्ध मंडल) एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) द्वारा किये गए एक अध्ययन के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे ज्यादा चंदा प्राप्त करने वाली पार्टी है। राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को दी गयी जानकारी के आधार पर एडीआर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को 698 करोड़ रुपये मिले, और दूसरे नम्बर पर कांग्रेस को 122.5 करोड़ रुपये मिले। नियम के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों को एक वित्तीय वर्ष में मिले 20,000 रुपये से अधिक के दान का ब्यौरा देना होगा।

राजनीतिक दलों के दस्तावेजों के अनुसार, औसतन 92 प्रतिशत दान व्यवसायी और व्यापारिक कंपनियों से आया है। पांच राष्ट्रीय दलों में से, भाजपा को 1,573 व्यवसायी दानकर्ताओं से 698.082 करोड़ रुपये का अधिकतम दान मिला, इसके बाद कांग्रेस को 122 व्यवसायियों से 122.5 करोड़ रुपये का कुल दान मिला, और एनसीपी को 17 व्यवसायी दाताओं से 11.345 करोड़ रुपये का चंदा मिला।

दिलचस्प बात यह है कि एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 319 दान जिनके माध्यम से राष्ट्रीय पार्टियों को 31.42 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, योगदान प्रपत्र में उनके पते का उल्लेख नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया – “वित्तीय वर्ष 2018-19 में 5 राष्ट्रीय दलों को व्यापारी/ व्यावसायिक घरानों द्वारा दान किए गए कुल 876.10 करोड़ रुपये में से 20.54 करोड़ रुपये अलग श्रेणी से प्राप्त हुए, जिसमें ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिनका ऑनलाइन कोई विवरण उपलब्ध नहीं है और उनके काम करने का तरीका स्पष्ट नहीं है।”

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

भारत में राष्ट्रीय दलों की स्थिति निम्नलिखित है। वे है भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [ सीपीआई (एम)] और मेघालय का राष्ट्रीय जनता दल है। अब टीएमसी, सीपीआई और एनसीपी लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद, अपना राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखने के लिए चुनाव आयोग के साथ बहस कर रहे हैं[1]

दिलचस्प बात यह है कि एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 319 दान जिनके माध्यम से राष्ट्रीय पार्टियों को 31.42 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, योगदान प्रपत्र में उनके पते का उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया – “राष्ट्रीय दलों ने 34 दान से 13.57 करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं, योगदान प्रपत्र में उनका पैन (पीएएन) विवरण नहीं है। कुल 13.364 करोड़ रुपये में से 13.33 करोड़ रुपये या 99.75 प्रतिशत धन, जिनका पैन विवरण और पते का उल्लेख नहीं है, का चंदा भाजपा को मिला है।”

कहा गया है कि – “कुल 13.364 करोड़ रुपये की रकम राष्ट्रीय दलों द्वारा 274 व्यवसायी दाताओं से, पैन विवरण और पते के विवरण के बिना प्राप्त किए गए। इस तरह के अपूर्ण दान रिपोर्ट को ईसीआई द्वारा पार्टियों को वापस किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें अधूरी जानकारी प्रदान करने से रोका जा सके।”

यह याद रखना चाहिए कि ये सभी राजनीतिक दलों की स्व-घोषणाएँ हैं। पिछले वर्ष, डीएमके की घोषणा ने सीपीआई (एम) और सीपीआई को बुरा फंसा दिया था। दोनों वाम दलों को डीएमके से कुल 25 करोड़ रुपये मिले थे और यह उनकी घोषणाओं में उल्लेखित नहीं था[2]

संदर्भ:

[1] TMC, CPI, NCP defend national party status before ECSep 9, 2019, India Today

[2] DMK affidavit to EC puts CPM, CPI in tight spotSep 23, 2019, The Pioneer

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