अरुण शौरी ने होटल बिक्री मामले में ट्रायल कोर्ट को जमानतनामा (जमानत बांड) दिया। जसवंत सिंह के बेटे और पत्नी ने जमानत दी। शौरी ने कहा, बिक्री वाजपेयी मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित थी!

मोदी के तहत सीबीआई बेवजह एनडीए -1 मंत्रीमंडल के विनिवेश के फैसले और शौरी का पीछा कर रही है। यह मौजूदा कैबिनेट मंत्रियों को डरा सकता है!

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मोदी के तहत सीबीआई बेवजह एनडीए -1 मंत्रीमंडल के विनिवेश के फैसले और शौरी का पीछा कर रही है। यह मौजूदा कैबिनेट मंत्रियों को डरा सकता है!
मोदी के तहत सीबीआई बेवजह एनडीए -1 मंत्रीमंडल के विनिवेश के फैसले और शौरी का पीछा कर रही है। यह मौजूदा कैबिनेट मंत्रियों को डरा सकता है!

बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए-2 के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी के रूप में, पूर्व केंद्रीय मंत्री और जाने माने पत्रकार अरुण शौरी ने बुधवार को जोधपुर की ट्रायल कोर्ट (सुनवाई न्यायालय) के समक्ष अटलबिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए उदयपुर के होटल लक्ष्मी विलास को बेचने के निर्णय के मामले में, जमानतनामा (जमानत बांड) और दो जमानती पेश किए। इस मामले को पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किया गया था और बाद में यह मामला बन्द कर दिया गया था। दिलचस्प बात यह है कि अरुण शौरी के लिए जमानत के तौर पर प्रत्येक व्यक्ति द्वारा एक-एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई, और ये व्यक्ति उनके पुराने सहयोगी जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह और उनकी पत्नी चित्रा सिंह थे। शौरी ने भी 2 लाख रुपये का जमानतनामा जमा किया।

मीडिया से बात करते हुए, अरुण शौरी ने कहा कि सीबीआई ने अगस्त 2014 में वित्त मंत्रालय के विनिवेश प्रभाग द्वारा अग्रेषित एक गुमनाम शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्णय लिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वाजपेयी की देखरेख में एक सख्त प्रक्रिया अपनाई गई थी। जोधपुर में संवाददाताओं से उन्होंने कहा, “यही मेरे सिद्धांत और अटलजी द्वारा प्रक्रिया के पालन हेतु दिशानिर्देश थे।”

सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद, शौरी और मोदी की दो दशक पुरानी दोस्ती ढह गई। यह विचित्र घटना प्राधिकरण का दुरुपयोग करने में नेताओं की ओछापन, प्रतिशोधी स्वभाव को दिखाती है।

शौरी ने जोर दिया कि यह मामला पहली बार एक अंतर-मंत्रालयी समिति के समक्ष आया था, जिसके बाद इसे सचिवों की एक समिति और फिर मंत्रिमंडल की विनिवेश समिति ने उठाया था, जिसका नेतृत्व दिवंगत प्रधानमंत्री कर रहे थे। उन्होंने कहा, “सीबीआई ने दो बार क्लोजर रिपोर्ट दायर की, जिसमें कहा गया कि सौदे में कोई अनियमितता नहीं है। सीबीआई के अवलोकन के समर्थन में 14 बिंदु थे और उच्च न्यायालय ने भी इसे स्वीकार किया,” उन्होंने कहा, यदि सीबीआई को लगता है कि कुछ गड़बड़ थी, पुन: जाँच होने दें।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

सीबीआई ने 2019 में एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की और उसे ट्रायल जज द्वारा खारिज कर दिया गया। न्यायाधीश ने अरुण शौरी को गिरफ्तार करने का आदेश तक दे दिया, जबकि अरुण शौरी का नाम सीबीआई की प्राथमिकी (एफआईआर) में भी नहीं था। ट्रायल कोर्ट ने होटल को जब्त करने और राज्य सरकार को सौंपने का भी आदेश दिया। बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश के कई पहलुओं पर विचार करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि शौरी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और उन्हें ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत दी जानी चाहिए।

नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा अरुण शौरी के खिलाफ थोपे गए इस संदिग्ध मामले के पीछे मूल कारण के बारे में पहले पीगुरूज ने विस्तार से एक लेख में बताया है[1]। 2014 के मध्य में, अरुण शौरी और मोदी के बीच कलह थी क्योंकि शौरी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था। यह चौंकाने वाला तथ्य है कि तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शौरी के खिलाफ सीबीआई को एक अनाम शिकायत भेजी थी। यह ध्यान रखना दिलचस्प है, इस होटल सौदे को कैबिनेट की मंजूरी से पहले वाजपेयी की सरकार में कानून मंत्री रहे अरुण जेटली ने तीन बार मंजूरी दी थी। और धोखाधड़ी को देखिये – उन्हीं जेटली ने, स्वयं के द्वारा अनुमोदित निर्णय पर सीबीआई को अनाम शिकायत भेजी और मोदी की अगुआई में सीबीआई ने वाजपेयी मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित निर्णय पर शिकायत दर्ज की! सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद, शौरी और मोदी की दो दशक पुरानी दोस्ती ढह गई। यह विचित्र घटना प्राधिकरण का दुरुपयोग करने में नेताओं की ओछापन, प्रतिशोधी स्वभाव को दिखाती है।

जोधपुर की सीबीआई अदालत ने मामले को गुरुवार (15 अक्टूबर) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इस मामले के अन्य आरोपी पूर्व विनिवेश सचिव प्रदीप बैजल, लेज़ार्ड इंडिया लिमिटेड के एमडी आशीष गुहा, भारत होटल्स लिमिटेड की एमडी ज्योत्सना सूरी और होटल के खरीदार कांतिलाल विकमसे हैं।

संदर्भ:

[1] नरेंद्र मोदी ने वाजपेयी मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित होटल विनिवेश के लिए सीबीआई को अरुण शौरी के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति क्यों दी?Sep 19, 2020, hindi.pgurus.com

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