आंध्र में जातिवाद का शाप – रेड्डी और कम्मा राजनीति

यह तेलुगु लोगों की दुखद स्थिति है। इन राजनीतिक नेताओं में से अधिकांश ने लोगों का जाति, धर्म के आधार पर विभाजन किया और इस प्रक्रिया में खुद को और अपने जाति समूहों में अपने समर्थकों को समृद्ध किया।

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आंध्र में जातिवाद का शाप - रेड्डी और कम्मा राजनीति
आंध्र में जातिवाद का शाप - रेड्डी और कम्मा राजनीति

भाजपा को आंध्र के राजनेताओं से बहुत सावधान रहने की जरूरत है। मुझे रेड्डी/कम्मा के समान शक्तिशाली जाति समूहों में समान प्रवृत्तियाँ दिखाई देती हैं।

2019 में भाजपा की शानदार जीत पर बोलते हुए, जेटली जी ने टिप्पणी की, ‘आकांक्षावादी भारत शाही खानदान, राजवंश और जाति आधारित दलों को स्वीकार नहीं करता है।’ यह दक्षिणी राज्यों आंध्र, तमिलनाडु और केरल को छोड़कर अधिकांश राज्यों में सही साबित हुआ। प्रत्येक की अपनी गतिशीलता है लेकिन क्योंकि मैं आंध्र में पैदा हुआ, मैं यक़ीन के साथ कह सकता हूं कि आंध्र की राजनीति में जाति की राजनीति घिनौने स्तर पर खेलती है। 2019 के चुनावों में लड़ने वाले तीन मुख्य दल तीन कृषक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं – तीन अलग-अलग जातियां, अर्थात् रेड्डी, कम्मा और कापू

राज्य में सत्ता की बागडोर लगभग हमेशा रेड्डी और कम्मा समुदायों के हाथों में रही है, जहाँ ज्यादातर इन जाति समूहों में राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों ने खुद को समृद्ध किया है। केवल हाल ही में तीसरे कृषक समूह कापू अन्य दो समूहों द्वारा उपभोग किए गए सत्ता का अंश प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, परंतु अधिक सफल नहीं हो पाए हैं। हालांकि कुछ इस दुखद स्तिथि में भी कुछ अच्छाईयां हैं, परंतु दो शक्तिशाली राजनीतिक जाति-आधारित समूह, रेड्डी और कम्मा ने संयुक्त राज्य की नियति का निर्धारण किया जो राज्य के लिए विनाशकारी रहा। इसका नतीजा यह है कि संयुक्त आंध्र आज एक विभाजित राज्य है क्योंकि तेलंगाना क्षेत्र को लगा कि उन्हें राज्य के विकास के धन का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है और वे आंध्र से अलग हो गया, नकदी की कमी से झुंज रहे आंध्र को इस अहसास के साथ छोड़ दिया कि उन्हें इस बंटवारे में कच्चा सौदा मिला है।

फिर कई आरोप हैं कि कम्मा मुख्यमंत्री नायडू का साथ छोड़ने के लिए राज्य के कुछ सुवक्ता रेड्डी नेताओं द्वारा केंद्रीय भाजपा नेतृत्व का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है।

तीन दशक से अधिक समय पहले, आंध्र में मेरे किशोरावस्था के दौरान बड़े होते समय, जातिवाद के साथ मेरी पहली मुठभेड़ तब हुई थी जब मुझे बताया गया कि आंध्र में फिल्म उद्योग में तभी प्रवेश कर सकते है जब आप कम्मा जाती से हैं। मुझे आंध्र प्रदेश के रेड्डी मुख्यमंत्रियों, जैसे संजीव रेड्डी, ब्रह्मानंद रेड्डी और फिर चेन्ना रेड्डी, के दिन याद हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू की राजधानी हैदराबाद की यात्रा के दौरान, उस समय के रेड्डी मुख्यमंत्रियों में से एक ने अपने सभी मंत्रियों, जो हवाई अड्डे पर लाइन में खड़े थे, को नेहरू से मिलवाया था। आखिरी मंत्री के परिचय दिए जाने के बाद नेहरू ने रेड्डी से पूछा कि अंत में मिलवाया गया मंत्री रेड्डी कैसे नहीं था? मुझे याद है कि कैसे चेन्ना रेड्डी ने चुनाव से पहले जानबूझकर हिंदू / मुस्लिम दंगों की शुरुआत की थी और राज्य में बड़े पैमाने पर गुंडागर्दी हुई थी और लोगों ने कैसे असुरक्षित महसूस किया था।

कम्मा बनाम रेड्डी

इसके बाद कम्मा समुदाय के एक लोकप्रिय अभिनेता एन टी रामाराव (एनटीआर) आए, जिन्होंने राज्य की वर्षों केंद्र की तरफ से सौतेली मां का बर्ताव प्राप्त करने के बाद, लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने शुरू में ईमानदारी से शासन किया था, लेकिन जल्द ही वह भ्रष्ट होने के साथ-साथ कम्मा जाति की राजनीति में भी शामिल हो गए। वह बीमार हो गए और फिर उनके दामाद चंद्र बाबू नायडू ने अपने ससुर से सत्ता छीन ली। नायडू के पास राज्य के विकास के लिए एक परिकल्पना अवश्य थी और उसने हैदराबाद में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग का निर्माण किया। माना जाता है कि उन्होंने और उनकी जाति के मित्र मुरली मोहन ने हैदराबाद के इलेक्ट्रॉनिक सिटी के किसानों से लाखों की लूट की, जहाँ उन्होंने पहले किसानों की ज़मीनें कम दामों में खरीदीं और फिर इलेक्ट्रॉनिक शहर घोषित किया और लागत में कई गुना वृद्धि की। उनके अधिकांश लाभार्थी कम्मा जाति के हैं जिनमें एनाडू के संस्थापक रामोजी राव और अन्य शामिल हैं। जब उनकी पार्टी केंद्र में वाजपेयी भाजपा गठबंधन सरकार का हिस्सा थी, नायडू राज्य को आवंटित अधिक धनराशि प्राप्त करने में सक्षम रहे और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा करते हुए हैदराबाद में काफी विकास किया। यह वह समय है जब एक अलग तेलंगाना के लिए मांग शुरू हो गए क्योंकि वहां के लोगों को बहुत समय से लग रहा था कि उनके क्षेत्र को राज्य संसाधनों का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।

इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति अब आनेवाली थी। नायडू येदुगुरी संदिंटी (सैमुअल?) राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) से हार गए, जो एक कट्टरपंथी ईसाई मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने सोनिया गांधी के समर्थन के साथ ईसाईयों की 3% से कम की संख्या को लगभग 22% तक बढ़ा दिया जहां विदेशी मिशनरियों ने राज्य सरकार की मदत से खुलेआम सैकड़ों धर्मांतरण किए।यहां तक ​​कि संयुक्त आंध्र में सबसे दूरदराज के गांवों में भी एक चर्च होते है चाहे उस गांव में कोई ईसाई हो या नहीं। इससे भी बुरी बात यह है कि वाईएसआर ने हिंदू मंदिरों को लूटा और परिवार ने अरबों रुपये की ज़मीनें लूट लीं – कथित तौर पर एक बड़ा हिस्सा उन हिंदू मंदिर की जमीनों को बेचने से मिला होगा जो सरकारी नियंत्रण में थे। वाईएसआर की असामयिक मृत्यु हो गई, जो कुछ लोगों का मानना ​​है कि तिरुपति मंदिर के 7 में से 5 तिरुमला पहाड़ों को ईसाई मिशनरियों को देने की कोशिश में भगवान द्वारा दी गई सजा है। उसके बाद राज्य का विभाजन हुआ, तत्पश्चात चंद्र बाबू नायडू ने मोदी/भाजपा से हाथ मिलाया और 2014 में सत्ता में आए।

तब बाबू ने , एक असुरक्षित व्यक्ति जो जाति की राजनीति में उलझा हुआ था, राज्य को मिले कच्चे सौदे को संभालने में असमर्थ होने के कारण भाजपा का छोड़ दिया और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया, वही पार्टी जो उसकी अपनी पार्टी के अस्तित्व का कारण है। उन्होंने नरेंद्र मोदी को बुरा-भला कहा और मीडिया में अपने कम्मा मित्रों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया ताकि राज्य में मोदी के योगदान के एक भी तथ्य को जनता तक नहीं पहुंचाया जाए, केंद्रीय योजनाओं पर अपनी खुद की मुहर लगाकर झूठ बोला, पर अंत में वाईएसआर के बेटे जगन मोहन रेड्डी से बुरी तरह हारकर सत्ता खो दिया। दूसरी तरफ तेलंगाना पर केसीआर का शासन है, जो शुरू में अच्छा काम कर रहे थे, उन्हें लगा कि वह मुस्लिम तुष्टिकरण में उलझकर दिन पर दिन होशियार हो रहे हैं और यहां तक ​​कि उन्होंने गठबंधन की सरकार बनाने की योजना भी बना ली थी, अगर मोदी के एनडीए को 2019 में पर्याप्त संख्या नहीं मिली। केसीआर ने धृष्टता का प्रदर्शन करते हुए हैदराबाद से एक हिंदू संत को इसलिए निर्वासित किया क्योंकि उन्होंने स्थानीय रूप से समझौता किए गए एक मीडिया चैनलों में से एक पर श्री राम के दुरुपयोग का विरोध करने का दुस्साहस किया था, जबकि उन्होंने और उनके लोगों ने चुनावी रैलियों के दौरान हिंदुओं को खुलेआम गालियां दी थी।

यह तेलुगु लोगों की दुखद स्थिति है। इन राजनीतिक नेताओं में से अधिकांश ने लोगों का जाति, धर्म के आधार पर विभाजन किया और इस प्रक्रिया में खुद को और अपने जाति समूहों में अपने समर्थकों को समृद्ध किया। सभी बड़े महलनुमा घरों में रहते हैं जिनकी कीमत हजारों करोड़ है जबकि राज्य पीड़ित है। आंध्र के कहीं शहरों और बंगलौर में जगन रेड्डी के कुछ घरों का एक वीडियो बहुतायत और धन को प्रदर्शित करता है, जो कैलिफोर्निया में एक अरबपति उद्यमी भी प्राप्त करने का दावा नहीं कर सकता है। इनमें से कई राजनीतिक परिवार, विशेष रूप से रेड्डी परिवारों से (और शायद काम्मा भी) एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग पार्टियों से जोड़ा जाता है, ताकि राज्य में कोई भी पार्टी सत्ता में आए, उन्हें लाभ मिलता रहे! उन्हे अपनी जाति के लोगों, जिन्हे जाति विभाजन का लाभ मिलता है, द्वारा समर्थन मिलता हैं और ये लोग जाति विभाजन का समर्थन करते हैं। उन्हें यह पैसा कहां से मिल रहा है? यह वह पैसा है जो आंध्र के सभी लोगों का है।

वास्तव में वे आधुनिक समय के उच्च वर्ग के लुटेरे हैं, भारत के ठग, सामंतवादी जमींदार, जो सोचते हैं कि वे लोगों पर शासन करके एहसान कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी की विरासत जो देशभर में फैलकर देश की 1.2 बिलियन आबादी के आधे हिस्से को अब भी गरीबी में रखा है, हर दूसरा बच्चा कुपोषित, देश दुनिया के एक तिहाई गरीबों का घर है। जबकि चीन तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और उसने केवल तीन दशकों में 1+ बिलियन लोगों की गरीबी पूरी तरह से दूर कर दी है, भारत को इन ठगों द्वारा पीड़ित हैं, जिसकी वजह से आधा बिलियन लोग गरीबी का अभिशाप जी रहे हैं, यहां तक ​​कि घरों के नाम पर इनके पास केवल झोपड़ियां ही है जिनमे बुनियादी शौचालय की सुविधा भी नहीं। येही परिवार आनेवाले चुनाव जीतने के लिए भारी लूट से कमाई गई संपत्ति के एक हिस्सा का उपयोग करते हैं और फिर लूट जारी रखते हैं। वे अब चुनाव जीतने के लिए पेशेवर राजनीतिक रणनीतिकारों का उपयोग भी कर रहे हैं।

हालाँकि, मैंने राज्य के साथ संपर्क नहीं रखा है, लेकिन मुझे बताया गया कि आज भी आंध्र में बड़ा होने वाला हर बच्चा अपनी जाति के बारे में गहरी समझ रखता है। जब मैं सोशल मीडिया में कई युवा लोगों से बातचीत कर रहा था, तो मैं जाति के आधार पर समर्थन दिए जाने को लेकर आश्चर्यचकित रह गया। एक युवा रेड्डी वाईएसआर द्वारा धर्मांतरण और राज्य कोष के लूट के माध्यम से राज्य को पहुंचाए गए हानि के महत्व को कम करके बताना चाहता है और जगन द्वारा संभावित धर्मांतरण के किसी भी चिंता को नज़रअंदाज़ करता है। यहां तक ​​कि मैंने कई युवा रेड्डी को जगन को जगन ‘अन्ना‘, जगन भाई’ कहते हुए देखा है, भले ही उनका (रेड्डी होने के अलावा) कोई संबंध नहीं है। उनसे बात करें – वे रेड्डी नेताओं द्वारा किए गए किसी भी गलती को पर पर्दा डालना और नज़रअंदाज़ करना चाहते हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, चाहे वह कोई भी मामला क्यों न हो। फिर एक कम्मा हिंदू कार्यकर्ता है जो सोचता है कि मोदी मुसीबत है जिसे पराजित करने की आवश्यकता है क्योंकि उन्होंने राज्य के साथ न्याय नहीं किया, भले ही इसका मतलब यह हो कि कांग्रेस सत्ता में लौट आती है और देश की दुर्दशा हो जाए। मोदी से उनकी मुख्य शिकायत यह है कि उन्होंने उनके कम्मा मुख्यमंत्री और उनके कम्मा ‘बंधुओं’ के साथ अनुचित व्यावहार किया, जिन्होंने नई राजधानी अमरावती में संपत्ति लिया और अब उन्हें वह उसका प्रतिलाभ, जिसकी उन्हें उम्मीद थी, नहीं मिल सकता है । फिर कई आरोप हैं कि कम्मा मुख्यमंत्री नायडू का साथ छोड़ने के लिए राज्य के कुछ सुवक्ता रेड्डी नेताओं द्वारा केंद्रीय भाजपा नेतृत्व का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है।

हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम खुलकर सामने आएं और अपनी मातृभूमि की सेवा के रूप में एक आधुनिक भारत को बनाने में मदद करें, जिसके लिए मोदी जी प्रयत्नशील हैं, न कि उसी पिछड़ी प्रवृत्ति को आगे बढ़ाए।

बहुत सारे संघ?

यह कट्टर जातिवाद की भावना न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी है। आंध्र प्रदेश के विभाजित होने के बाद से तेलुगु लोगों के जाति और यहां तक ​​कि क्षेत्र के आधार पर सबसे अधिक उत्तर अमेरिकी तेलुगु संघ हैं। वे टीएएनए, एनएटीएस, एटीए, बीएटीए, टीएटीए हैं… सूची लंबी है। इस मानसिक विनाश में इस दृष्टि का अभाव है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े होने वाले उनके अपने बच्चे जाति की परवाह नहीं करते और यह माना जाता है कि उनमें से 50% भी भारतीय मूल के लोगों के साथ या उनके धर्म के भीतर भी शादी नहीं करते हैं। इनमें से प्रत्येक समूह प्रत्येक या दो साल में मेगा-इवेंट्स पर लाखों डॉलर खर्च करता है और आंध्र/तेलंगाना के राजनीतिक नेताओं को भारत से कुछ प्रभाव प्राप्त करने की उम्मीद में लाते है, जबकि अधिकांश भारतीय राजनेता यकीनन उन्हें उपयोगी ‘बेवकूफों’ के रूप में देखते हैं। त्रासदी यह है कि भारत ने उन्हें मुफ्त शिक्षा, परिवार और अनुशासन के माध्यम से इतना कुछ दिया कि उन्हें यहां समृद्ध होने में सफलता प्राप्त हुई और ये लोग इन भ्रष्ट जाति-आधारित भारतीय राजनेताओं का उपयोग करके गरीब देश से अधिक हड़पना चाहते हैं – जैसे कि अपनी खुद की माँ से लूटना जिसने आपके लिए बहुत कुछ किया। ये अमेरिका में लोगों को एक साथ लाने के विचार से नहीं किए जाते हैं, जहां नस्लवाद अभी भी अमेरिकी समाज का हिस्सा है।

आज एक हिंदू अमेरिकी समान न्याय पाने का दावा नहीं कर सकता है क्योंकि एक गोरे या यहूदी अमेरिकी और एशियाई छात्रों के बीच स्कूलों में प्रवेश में भेदभाव किया जाता है। अमेरिकी छात्रों को हिंदू धर्म के बारे में सबसे अपमानजनक चीजें सीखाई जाती हैं जो अपने स्वयं के धर्म और संस्कृति के लिए हिंदू अमेरिकी छात्रों में आत्म-सम्मान का अभाव या आत्मसम्मान की कमी पैदा करते हैं। वोट देने के लिए समुदाय के कुछ ही लोग पंजीकृत है और समुदाय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और अन्य समुदायों जैसे मुस्लिम अमेरिकियों की तुलना में राजनेताओं द्वारा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। जबकि पहली पीढ़ी धनी है और अगली पीढ़ी में कड़ी मेहनत जैसे कुछ लक्षण प्रदान किए गए हैं और इसलिए कुछ हद तक सुरक्षित है, हम आगे की पीढ़ियों के लिए समान गारंटी नहीं दे सकते। भारत में जाति-आधारित भेदभाव का समर्थन करने में, इन लोगों को इस पर विचार करना चाहिए कि यह किस तरह उस भेदभाव से अलग नहीं है, जिसका उन्होंने सामना किया और अब उनके बच्चे इस देश में नस्ल के आधार पर ऐसे ही भेदभाव का सामना करते हैं।

भाजपा – सावधानी के साथ आगे बढ़ें!

भाजपा को आंध्र के राजनेताओं से बहुत सावधान रहने की जरूरत है। मैंने रेड्डी/कम्मा की समान शक्तिशाली जाति समूहों में समान प्रवृत्तियाँ देखी हैं और मोदी/अमित शाह जी को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि राज्य की बड़ी भागीदारी हो, जैसे जेटली ने आकांक्षापूर्ण भारत के बारे में कहा था। कम्मा पुरंदेश्वरी को सीएम उम्मीदवार के रूप में चुनने की आवश्यकता नहीं है। उस से का कोई विशेष लाभ नहीं है और लोगों को परवाह नहीं है। भाजपा को केवल रेड्डी को बढ़ावा देने वाले भाजपा रेड्डी राजनेता या भाजपा कम्मा राजनेता जो सिर्फ कम्मा को पार्टी में शामिल करते हैं और न कि कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का चयन करते है, से सावधान रहने की जरूरत है। कार्यकर्ताओं से जमीन पर बात करें और वे कहते हैं कि राज्य के अधिकांश भाजपा नेताओं ने समझौता किया है और राज्य के सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के साथ जाति के आधार पर व्यापार और अन्य व्यवहार के रिश्ते हैं। एक कार्यकर्ता ने मुझे बताया, आंध्र और तेलंगाना दोनों में स्थानीय सत्तारूढ़ दल और स्थानीय भाजपा नेताओं के बीच का संबंध मालिक और मालकिन का है।

मुझे यह भी बताया गया कि जब भाजपा ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा था, तो उसे 2 लोकसभा सीटें मिलीं – एक संयुक्त आंध्र से थी (हारे हुए उम्मीदवार श्री पी वी नरसिम्हा राव थे!) और दूसरी गुजरात से। हालाँकि, गुजरात बढ़ने लगा और अब देश पर शासन करता है, आंध्र प्रदेश में कभी बढ़त मिली नहीं क्योंकि केंद्र और राज्य के स्थानीय भाजपा नेताओं और राज्य के सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के बीच संदेहात्मक संबंध है। अगर भाजपा आंध्र / तेलंगाना में सत्ता में आने की इच्छा रखती है, तो कई का कहना है कि यह तभी मुमकिन होगा जब यह राज्य में पूर्णतः नए नेतृत्व को लाएगी और सेवा करने की तुलना में लालच और शक्ति द्वारा संचालित और स्थापित शक्तिशाली जाति समूहों के सदस्यों के षड्यंत्र के प्रति बेहद सचेत होगी। (नोट: कई लोग कहते हैं कि स्थानीय भाजपा नेतृत्व के इस पूर्ण प्रतिस्थापन की आवश्यकता तमिलनाडु जैसे अन्य दक्षिणी राज्यों पर भी लागू होती है)।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

मुझे पता है कि इस लेख से मजबूत भावनाएं उमड़ते है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि तेलुगु लोग इसके बारे में खुलकर बात करें और ईमानदार हों। अपवाद हमेशा होते हैं और सभी समुदायों के लोग धर्म और देश के लिए बिना किसी जातिवाद के भावना या स्वार्थ के महान सेवा करते हैं। जाति कभी भी जन्म पर आधारित नहीं थी, लेकिन मानव प्रवृत्ति पर आधारित एक प्राकृतिक वर्गीकरण था, जिसका उपयोग विभाजन या भेदभाव के लिए नहीं, बल्कि समाज के कुशल संगठन के लिए किया जाता था। हम सभी जो विदेश में रहते है वे भारत में निवास करने वाले लोगों के लिए एक आदर्श बन सकते है।

अमेरिका ने गहरी नस्लवाद की चुनौतियों का सामना उसके बारे में खुले और ईमानदार होकर किया और जब हम खुले और स्वतंत्र रूप से बात करते हैं तो हमें इन बाधाओं को तोड़ने का मौका मिलेगा। वास्तव में, अमेरिकी सेना को इस खुले और ईमानदार संचार के कारण देश के बाकी हिस्सों की तुलना में कई दशक पहले से ही सबसे कम नस्लवादी माना जाता है। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम खुलकर सामने आएं और अपनी मातृभूमि की सेवा के रूप में एक आधुनिक भारत को बनाने में मदद करें, जिसके लिए मोदी जी प्रयत्नशील हैं, न कि उसी पिछड़ी प्रवृत्ति को आगे बढ़ाए। हम इस बात को समझ नहीं रहे हैं कि यह गहरी जातिवाद न केवल राज्य को नष्ट कर रहा है, बल्कि धर्मांतरण के लिए उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है और ब्रेकिंग इंडिया बलों को सशक्त बना रहा है।

ध्यान दें:
1. यहां व्यक्त विचार लेखक के हैं और पी गुरुस के विचारों का जरूरी प्रतिनिधित्व या प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

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