वो कौम जिसके लिए विधि नहीं विध्वंस महत्वपूर्ण है!

आसमानी किताब कहती है कि जब तक एक भी काफ़िर जीवित है लड़ाई चलते रहनी चाहिए। तो यदि लड़ाई सतत है तो हथियारों के अविष्कार भी सतत है।

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मुसलमान को वीरता का प्रदर्शन नहीं, विजय चाहिए। और मुसलमान आसमानी किताब को अक्षरस सत्य मानता है।
मुसलमान को वीरता का प्रदर्शन नहीं, विजय चाहिए। और मुसलमान आसमानी किताब को अक्षरस सत्य मानता है।

मुसलमान को वीरता का प्रदर्शन नहीं, विजय चाहिए। और मुसलमान आसमानी किताब को अक्षरस सत्य मानता है।

हमारे सब से बड़े युद्ध, महाभारत, के केंद्र में एक धनुर्धर -अर्जुन- था।

हमारा सबसे प्रसिद्ध व अंतिम राजा – प्रथ्विराज चौहान – एक बहुत बड़ा धनुर्धर माना जाता है।

लेकिन जब मोहम्मद बिन क़ासिम आया तो उसके नफ्था में बुझे बाणो का हमारे पास कोई उत्तर नहीं था।
जब मंगोल घुडसवार घोड़े पर से ही बाण चलाने की विद्या लेकर आए तो हमारे पास कोई उत्तर नहीं था।
जब बाबर तोपें लेकर आया तो हमारे पास कोई उत्तर नहीं था। जब अब्दाली ऊँट पर रखी घूम सकने वाली तोपें लेकर आया तो हमारे पास कोई उत्तर नहीं था। धनुर्विद्या भूल चुके थे हम।

अभी पिछले सप्ताह हमास ने इसरायल पर लगभग पाँच सौ रोकेट दागे। इसरायल लगभग एक चौथाई ही रोक पाया।
रोकेट किसने अविष्कार किए व प्रयोग किए?

आप परीक्षा में नक़ल की जुगत ढूँढे, भर्ती परीक्षा से पार पाने के नए तरीक़े खोजे, दहेज की नित नयी लिस्ट बनाए; मुसलमान का अनदेखा, अनसुना हथियार आता ही होगा।

हैदर अली, टीपू के पिता ने।

अंग्रेजो के विरुद्ध पहली लड़ाई में उसके एक रोकेट ने अंग्रेजो के हथियार के भंडार में ही विस्फोट कर दिया व अंग्रेज़ हार गए। टीपू ने भी हर युद्ध में रोकेट प्रयोग किए। टीपू का अंत भी रोकेट से ही हुआ। अंग्रेजो का एक गोला उसके क़िले में रखे रोकेट के भंडार पर जा गिरा व भयानक विस्फोट हुआ व अंग्रेज़ अंदर घुस गए व टीपू मारा गया। अंग्रेजो ने टीपू के रोकेट का अध्ययन किया, उसमें सुधार किया व नेपोलीयन के विरुद्ध उनका प्रयोग भी किया।

पोस्ट का उद्देश्य केवल ये बताना है कि मुसलमान सदा ऐसी लड़ाई लड़ता है जिसमें दुश्मन का जानोमाल का नुक़सान हो, मुसलमान का न हो। लड़ाई की क़ीमत अपने ऊपर कम रखने के लिए हर तरह के उपाय करता है मुसलमान – प्रहार कर भागना सबसे प्रिय है उसे। इतना ही प्रिय है अपने लिए एक अभेद्य बेस बनाना व काफ़िर के लिए कोई स्थान सुरक्षित न छोड़ना। फिर अपने बेस से बिना बाहर आए काफ़िर पर वार कर सकने लायक हथियार का अविष्कार कर लेना।

मुसलमान को वीरता का प्रदर्शन नहीं, विजय चाहिए। और मुसलमान आसमानी किताब को अक्षरस सत्य मानता है। आसमानी किताब कहती है कि जब तक एक भी काफ़िर जीवित है लड़ाई चलते रहनी चाहिए।

तो यदि लड़ाई सतत है तो हथियारों के अविष्कार भी सतत है।

आप परीक्षा में नक़ल की जुगत ढूँढे, भर्ती परीक्षा से पार पाने के नए तरीक़े खोजे, दहेज की नित नयी लिस्ट बनाए; मुसलमान का अनदेखा, अनसुना हथियार आता ही होगा।

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