दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया मामले में भ्रष्ट चिदंबरम की जमानत को खारिज कर दिया, कोर्ट ने माना कि चिदंबरम धन शोधन में एक प्रमुख खिलाड़ी है

पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम मुश्किल में, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया मामले में जमानत खारिज कर दी।

0
1090
पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम मुश्किल में, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया मामले में जमानत खारिज कर दी।
पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम मुश्किल में, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया मामले में जमानत खारिज कर दी।

पूर्व भ्रष्ट मंत्री पी चिदंबरम के लिए एक नाकामयाबी में उसको जेल में डालने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। “मुझे पता है कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है लेकिन अगर इस मामले में जमानत दी जाती है तो समाज को एक गलत संदेश जाएगा,” प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आईएनएक्स मीडिया रिश्वतखोरी मामले में भ्रष्ट चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने वाले आदेश में न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने कहा।

वर्तमान में, चिदंबरम तिहाड़ जेल में बंद हैं और उनकी न्यायिक हिरासत 27 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी गई है। पूर्व वित्त और गृह मंत्री को 21 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किया गया था। पिछले 88 दिनों से वह सीबीआई और ईडी की हिरासत में और तिहाड़ जेल में हैं और कोर्ट द्वारा उनके खराब स्वास्थ्य के दावों को भी खारिज कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आईएनएक्स मीडिया रिश्वत मामले में धन शोधन में चिदंबरम एक प्रमुख खिलाड़ी है। उसके द्वारा सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की उम्मीद है।

गलत संदेश

न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने कहा कि अगर इस मामले में चिदंबरम को जमानत दी जाती है तो समाज को गलत संदेश जाएगा। फैसला सुनाते हुए, उन्होंने कहा कि ईडी ने धन शोधन मामले में जो सामग्री एकत्र की है, वह भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई द्वारा एकत्र की गई सामग्री की तुलना में स्पष्ट, अलग और स्वतंत्र है। यहां तक कि इस मामले में की गई जांच सीबीआई के मामले से अलग है, अदालत ने कहा, यह भी कहा कि आर्थिक अपराधों के मामलों में, पूरे के पूरे समुदाय प्रभावित होते हैं, न्यायाधीश ने पाया है।

ईडी ने उसे 16 अक्टूबर को धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था और वर्तमान में वह सुनवाई अदालत (ट्रायल कोर्ट) के आदेश के तहत 27 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में है। इससे पहले चिदंबरम ने जस्टिस आर भानुमति की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ से सीबीआई केस में जमानत प्राप्त की थी। सीबीआई ने इस पर एक संशोधन याचिका दायर की जिसमें कहा गया कि निर्णय में त्रुटियां थीं। सीबीआई ने कहा कि निर्णय में दो गवाहों के न्यायिक रूप से दर्ज बयानों पर विचार नहीं किया गया जिन्होंने कहा कि उन्हें चिदंबरम द्वारा जांचकर्ताओं से मामले को छुपाने के लिए संपर्क किया गया है[1]

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

उच्च न्यायालय में, महाधिवक्ता (सॉलिसिटर जनरल) तुषार मेहता ने ईडी का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा था कि धन शोधन मामले में साक्ष्यों का संग्रह और सीबीआई भ्रष्टाचार मामले के साक्ष्यों का संग्रह अलग-अलग है और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का मामला अधिक जघन्य और जितना लगता है उससे कहीं ज्यादा बड़ा अपराध है।

“यह गंभीर अपराध है क्योंकि यह एक आर्थिक अपराध है जो एक स्वचलित अपराध है,” उन्होंने तर्क दिया। चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने शुरू से ही कहा था कि जांच एजेंसी का ऐसा मामला कभी नहीं था कि कांग्रेस नेता ने गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन अचानक अक्टूबर में, जब वह हिरासत में थे, तो यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने मुख्य गवाहों पर दबाव डालने और उनको प्रभावित करने की कोशिश की।

आगन्तुक पुस्तिका (विज़िटर बुक) में प्रविष्टियों को किसने नष्ट किया?

इससे पहले एजेंसियों ने चिदंबरम पर आरोप लगाया था कि उसने इंद्राणी मुखर्जी और उसके पति और सह-अभियुक्त पीटर मुखर्जी के मिलने की बात को छुपाने के लिए वित्त मंत्रालय के विजिटर बुक रजिस्टर को नष्ट किया। बाद में सीबीआई ने होटल रजिस्टर (कार बुकिंग रजिस्टर) को यह साबित करने के लिए जब्त कर लिया कि वे वित्त मंत्रालय का दौरा कर चुके हैं। यह पता चला है कि 2017 के मध्य तक, वित्त मंत्रालय में चिदंबरम के कुछ दोस्तों ने आगंतुक पुस्तिका को नष्ट कर दिया था।

संदर्भ:

[1] त्रुटियों की ओर इशारा करते हुए, सीबीआई ने न्यायमूर्ति भानुमति की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा चिदंबरम को जमानत देने के फैसले की समीक्षा दायर कीOct 26, 2019, hindi.pgurus.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.