श्री प्रधान मंत्री, आपको सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को बहाल करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पढ़ना चाहिए

किसकी सलाह पर प्रधानमंत्री ने कानूनी रूप से नियुक्त निदेशक से अवकाश पर जाने के लिए कहने की गलती की?

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श्री प्रधान मंत्री, आपको सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को बहाल करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पढ़ना चाहिए
श्री प्रधान मंत्री, आपको सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को बहाल करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पढ़ना चाहिए

आलोक वर्मा निदेशक के रूप में बहाल

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक आलोक वर्मा को बहाल करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंगलवार को प्रधान मंत्री (पीएम) के लिए अच्छी पठन सामग्री है। वास्तव में, फैसले का पहला पैराग्राफ सभी राजनेताओं द्वारा अवश्य पढ़ा जाना चाहिए। इसमें कहा गया, “कानून का शासन लोकतंत्र का आधार है। हालाँकि सिद्धांत से दृढ़ता से जुड़ा हो सकता है, यह उन परिस्थितियों में असंख्य हो जाता है जो समय-समय पर अदालतों का सामना करती हैं। वर्तमान में ऐसा ही एक अवसर है, “मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा लिखित जजमेंट का पहला पैराग्राफ, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को बहाल करना, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गैरकानूनी और संदिग्ध तरीके से छुट्टी पर भेज दिया था (प्रभावी रूप से समाप्त)।

मोदी ने 23 अक्टूबर को अलोक वर्मा पर मध्यरात्रि कार्यवाही करके दिल्ली पुलिस उनके कार्यालय में भेज कर, सुबह के 2.30 बजे उन्हें निकालने का निर्णय क्यों लिया और तत्पश्चात निदेशक के कार्यालय को ताला लगाकर उनके घर पर नोटिस भेजने का निर्णय क्यों लिया? साधारण कारण यह है कि मोदी अपने चहेते राकेश अस्थाना(सीबीआई में नम्बर 2) के खिलाफ रिश्वत लेने का मामला दर्ज करने के कारण आलोक वर्मा से नाराज थे, जिसे कई बार भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रबंधकों ने कई चाटुकार मीडिया में एक फर्जी कहानी पेश की कि आलोक वर्मा विवादास्पद राफेल सौदे की जांच करने जा रहे हैं। सच्चाई से आगे कुछ भी नहीं हो सकता है। कोई भी अधिकारी राफेल सौदे की जांच नहीं करेगा, क्योंकि यह मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। क्या किसी ने सभा में मोदी के दिमाग में कुछ डर बैठाया, या वह खुद डर गये? हम नहीं जानते। कोई भी समझदार अधिकारी देश के प्रधान मंत्री को निशाना बनाने के लिए मामला दर्ज नहीं करेगा।

दो घोड़ों की सवारी

यह वास्तविकता है कि मोदी ने 2016 के अंत से दागी राकेश अस्थाना की रक्षा करने और उनकी सहायता करने सामान्य से हटकर कार्य किए है। गुजरात कैडर के अधिकारी अस्थाना भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीबी हैं। यह याद रखना चाहिए कि अस्थाना कांग्रेस नेता अहमद पटेल के साथ भी घनिष्ठ हैं – गुजरात कैडर के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों जैसे जो दो घोड़ों की सवारी करते हैं। जब अहमद पटेल से जुड़े फर्म सैंडेसरा ग्रुप से लगभग 3.8 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में अस्थाना को पकड़ा गया, तो कांग्रेस चुप रही।

प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) से पीएम और संदिग्ध अधिकारियों के संरक्षण के साथ, राकेश अस्थाना आलोक वर्मा को बुरी तरह से बदनाम कर रहे थे, आलोक वर्मा के खिलाफ तुच्छ शिकायतें दर्ज करने की हद तक जा रहे थे और पीएम इन शिकायतों का तुरंत जवाब दे रहे थे।

बेवजह प्रधानमंत्री ने सीबीआई के कार्यकारी निदेशक के रूप में एक जूनियर रैंकिंग अस्थाना को पदस्थ करना चुना जब सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा दिसंबर 2016 के पहले सप्ताह में सेवानिवृत्त हुए। किसी को लोकपाल अधिनियम के तहत नियुक्त करने से एक महीने पहले, पीएम की अगुवाई में उच्च-शक्ति समिति की अध्यक्षता करनी पड़ती है, जिसमें विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक नया सीबीआई निदेशक चुनना होता है। मोदी ने इसका पालन नहीं किया और तत्कालीन नंबर: 2, आर के दत्ता को बिना किसी वाजिब कार्यप्रणाली के स्थानांतरित कर दिया और एक बहुत जूनियर नंबर: 3 राकेश अस्थाना को कार्यवाहक निदेशक बना दिया। जाने माने वकील प्रशांत भूषण द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस ज़बरदस्त उल्लंघन को उठाया गया था और उच्च शक्ति समिति का गठन किया गया था और जनवरी 2017 में आलोक वर्मा को चुना गया था।

लेकिन अस्थाना पीएम और भाजपा अध्यक्ष के साथ निकटता के कारण आलोक वर्मा के अधीनस्थ के रूप में काम करने के लिए इक्षुक नहीं थे और सीबीआई निदेशक वर्मा की अवज्ञा करने लगे, स्वीकार करने से पूर्णतः नकार दिया। उस समय सीबीआई ने तीन प्रधान आयकर आयुक्तों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की थी जिनके नाम सैंडेसरा स्टर्लिंग ग्रुप की डायरी में पाए गए थे। इसलिए आलोक वर्मा ने विशेष निदेशक के रूप में अस्थाना की पदोन्नति पर आपत्ति जताई क्योंकि उनका नाम भी 3.8 करोड़ रुपये स्वीकार करने के लिए उसी डायरी में था। अस्थाना का बेटा, अब भगोड़ा सैंडेसरा – स्टर्लिंग ग्रुप प्रमोटर्स में एक वरिष्ठ कर्मचारी था, जिसे 500 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के लिए पकड़ा गया था। इन भगोड़ों के फार्महाउस में अस्थाना की बेटी की शादी भी हुई थी और अस्थाना अपने घर को किराए पर देकर इस धोखाधड़ी समूह से अच्छा किराया कमा रहे थे[1]

इसके अलावा, अहमद पटेल, उनके बेटे और दामाद दागी फर्म सैंडेसरा से मोटी रकम वसूलने के मामले में सीबीआई और ईडी द्वारा मामलों में शामिल हैं [2]

चौंकाने वाली बात यह थी कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की आपत्तियों के वाबजूद अक्टूबर 2017 में एक अभूतपूर्व आधी रात के आदेश में प्रधानमंत्री द्वारा इस दागी चरित्र अस्थाना की पदोन्नति की गई। क्या जरूरत थी, श्रीमान प्रधानमंत्री? जब सीबीआई निदेशक ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के समक्ष आपत्ति का लिखित पत्र दे दिया था तो यह अपवित्र कर्म क्यों हुआ?इस बिंदु से आगे, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और प्रधान मंत्री बात करने की स्थिति में नहीं थे।

प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) से पीएम और संदिग्ध अधिकारियों के संरक्षण के साथ, राकेश अस्थाना आलोक वर्मा को बुरी तरह से बदनाम कर रहे थे, आलोक वर्मा के खिलाफ तुच्छ शिकायतें दर्ज करने की हद तक जा रहे थे और पीएम इन शिकायतों का तुरंत जवाब दे रहे थे।

एक बार सीबीआई ने राकेश अस्थाना के खिलाफ एक बयान जारी किया कि वे जेल में बंद बिचौलिए और संपादक उपेंद्र राय से निपटने के लिए छह मामलों की जाँच कर रहे हैं। अंत में राकेश अस्थाना पर विवादास्पद मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के गुर्गे सना सतीश बाबू से रिश्वत लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी।15 अक्टूबर, 2018 को सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, बाहरी खुफिया एजेंसी रॉ के दुबई चीफ सामंत गोयल भी इस जबरन वसूली रैकेट का हिस्सा हैं [3]। अस्थाना को पता था कि उन्हें उनकी ही एजेंसी सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया जाएगा और फिर आलोक वर्मा और अस्थाना दोनों को हटाकर पीएमओ से जबरदस्त कार्यवाही की जाएगी और अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की कार्यवाही को अवैध करार देते हुए आलोक वर्मा को बहाल कर दिया है।

अब, श्रीमान प्रधान मंत्री, शायद आपने सीबीआई मामलों को संभालने और एक भ्रष्ट अधिकारी राकेश अस्थाना को अनावश्यक रूप से संरक्षण देने में भूल कर दी। खैर, अतीत अतीत है। मैं आपसे फिर से सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट को पढ़ने का आग्रह करता हूं, जो आपको समझाएगा कि आप कहां गलत थे। आपको उस व्यक्ति पर कार्यवाही करनी चाहिए जिसने आपको ऐसा कठोर कदम उठाने की सलाह दी। वे आपके दोस्त नहीं हैं। वे खून चूसने वाले गिद्धों की तरह हैं, मई 2014 में भारत के लोगों द्वारा दिए गए आपको सद्भाव और जनादेश को चूस रहे हैं। कृपया याद रखें, “लोकतंत्र में शासकों को कानून के शासन का पालन करना चाहिए”!

यहां सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को बहाल करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की लिंक है[4]

References:

[1] Son of Asthana worked at Sterling Biotech, daughter’s marriage party at Sterling farmhouse, accuses Prashant BhushanNov 22, 2017, PGurus.com

[2] ED approaches Court to declare Ahmed Patel patronaged Sandesara-Sterling Group promoters as fugitivesOct 26, 2018, PGurus.com

[3] Very explosive affidavit in Supreme Court on CBI saga – Is Rakesh Asthana, the Duryodhana in the 2019 Mahabharata? Nov 19, 2018, PGurus.com

[4] Jugdment of SC re-instatement of Alok Verma as CBI DirectorJan 7, 2019, LiveLaw.In

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