रमेश अभिषेक ने कोलकाता के माध्यम से अपना खुद का मेक इन इंडिया बनाया है!

आईएएस अधिकारी रमेश अभिषेक की संपत्ति पर एक महत्वपूर्ण नज़र अवैध लाभ को प्राप्त करने के लिए फर्जी खोल (शेल) कंपनियों का उपयोग करने के लिए एक मेक इन इंडिया मॉडल का खुलासा करती है।

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आईएएस अधिकारी रमेश अभिषेक की संपत्ति पर एक महत्वपूर्ण नज़र अवैध लाभ को प्राप्त करने के लिए फर्जी खोल (शेल) कंपनियों का उपयोग करने के लिए एक मेक इन इंडिया मॉडल का खुलासा करती है।
आईएएस अधिकारी रमेश अभिषेक की संपत्ति पर एक महत्वपूर्ण नज़र अवैध लाभ को प्राप्त करने के लिए फर्जी खोल (शेल) कंपनियों का उपयोग करने के लिए एक मेक इन इंडिया मॉडल का खुलासा करती है।

इस श्रृंखला के भाग 1 और 2 पर यहाँ से पहुँचा जा सकता है। यह भाग 3 है।

दिसंबर 2018 में, टाइम्स ऑफ इंडिया में एक छोटी सी खबर दिखाई दी, जिसमें कहा गया कि 2017-18 के वित्तीय वर्ष में 1 लाख से अधिक फर्जी खोल कंपनियों का पंजीकरण निरस्त किया गया[1]। यह जानना उपयोगी होगा कि इन फर्जी खोल संस्थाओं में से कितने को बाबुओं द्वारा खुद खोला / इस्तेमाल किया और संचालित किया गया। रमेश अभिषेक अग्रवाल (आरए) द्वारा स्वामित्व और संचालित फर्जी खोल कंपनियों की संख्या पर एक नज़र आपको उस दुर्गंध का अंदाजा देगी, जो पूरे तंत्र में स्थापित है।

जेआईएसपीएल – जगदंबा आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड

क्या नाम बड़ा भव्य है, जैसे कि एक टाटा का जमशेदपुर में संचालित होता है? खैर, जेआईएसपीएल केवल नाम के लिए मौजूद है और उसके पास विशाल भंडार है, इस तथ्य के बावजूद कि उसके पास कोई लाभ नहीं है और उसने कभी भी करों का भुगतान नहीं किया है। कर चोरी वाले हिस्से की अलग से जांच करने की जरूरत है और यहाँ चर्चा का विषय नहीं है। अब, केवल पाठकों को उलझाने के लिए, एक और कंपनी है, चीजों का मिश्रण/शब्दों का खेल, जिसका नाम जगदंबा स्टील इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (जेएसपीआईएल), जो स्वयं जेआईएसपीएल में शेयरधारक है। जेआईएसपीएल का शेयरधारक रूपरेखा निम्नानुसार है:

Figure 1. JISPL Shareholding pattern
Figure 1. JISPL Shareholding pattern

जेआईएसपीएल का लगभग 97% स्वामित्व या तो रमेश अभिषेक की दूसरी कंपनी जेएसआईपीएल या उसके रिश्तेदारों के पास है। नीचे दी गई संलग्न फ़ाइल से पता चलता है कि इस कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट में 10 करोड़ के करीब रुपये कैसे प्राप्त किया। यह धन शेयरधारकों से प्रीमियम के रूप में प्राप्त किया गया था। ऐसी कंपनी, जिसके पास बेचने के लिए कोई उत्पाद नहीं है, अपने स्टॉक मूल्य में इस तरह के उच्च मूल्यांकन को क्यों आकर्षित करेगी? आगे पढ़िए…

जेएसआईपीएल का मालिक कौन है?

जेएसआईपीएल को वर्ष 2008, 2009 और 2014 में भारी प्रीमियम पर शेयरों का विभिन्न चंदा मिला। ये सभी प्रसिद्ध कोलकाता खोका कम्पनियों (केकेके) से थे। यह वर्ष 2008 के लिए है। अधिक जानकारी के लिए, नीचे दी गई तालिका देखें:

31 मार्च, 2009 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में, केकेके को अधिक शेयर आवंटित किए गए थे, जो प्रति शेयर 3000 रुपये के भारी प्रीमियम पर थे। अधिक के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

Name of the Kolkata Co. No. of shares Premium per share (Rs.) Present status of the company
Badrinath Commerce Pvt. Ltd. 340 2900
Bhagwati Merchants Pvt. Ltd. 500 2900
Balgopal Dealers Pvt. Ltd. 500 2900 This company is struck off from ROC as shell company
Ganpati Stock Pvt. Ltd. 340 2900
Total 1680

In the Fiscal year ending on March 31, 2009, more shares were allotted to KKKs at a hefty premium of Rs.3000 per share. See the table below for more:

Name of the Kolkata Co. No. of shares Premium per share (Rs.) Present status of the company
Parampita Dealcom Pvt. Ltd. 800 3000 This company is struck off from ROC as shell company
Badrinath Commerce Pvt. Ltd. 340 3000
Bhagwati Merchants Pvt. Ltd. 335 3000
Anjaniputra Vinimay Pvt. Ltd. 835 3000
Vaibhav Vinimay Pvt. Ltd. 670 3000
Gangaur Properties Pvt. Ltd. 535 3000 This company is struck off from ROC as shell company
Vindhyawasini Vincom Pvt. Ltd. 500 3000
Urch Traders Pvt. Ltd. 540 3000
Total 4555

जेएसआईपीएल को केकेके से करोड़ों रुपये प्राप्त हुए और इन्हें केकेके के माध्यम से, वित्त वर्ष 2008, 2009 और 2014 में जेआईएसपीएल में लगाया गया। एक बार पैसा जेएसआईपीएल में स्थानांतरित हो जाने के बाद, इन केकेके को छोड़ दिया गया (इसे प्रीमियम स्ट्रिपिंग कहा जाता है) और जेएसआईपीएल की नवीनतम शेयरधारक रूपरेखा (जेआईएसपीएल ऊपर चित्र 1 में साझा किया गया है) चित्र 2 में दिखाया गयी है।

Figure 2. JSIPL Shareholding pattern
Figure 2. JSIPL Shareholding pattern

तो वृत्त पूरा हो गया है – जेएसआईपीएल जेआईएसपीएल का मालिक है या इसके विपरीत। कुछ केकेके का इस्तेमाल किया गया और उन्हें छोड़ दिया गया। रद्दी कंपनी के शेयर आसमान छूती कीमतों पर खरीदे गए। और रमेश अभिषेक अग्रवाल ने जेआईएसपीएल में 9.67 करोड़ रुपये और जेएसआईपीएल में 9.18 करोड़ रुपये, कुल संपत्ति 18.85 करोड़ रुपये बनाई है – आरए के परिवार द्वारा मेक इन इंडिया की शानदार पहल! हम जानते हैं कि हमने यहां कुछ चरणों को छोड़ दिया है – लेकिन आप नीचे दिए गए लेखापरीक्षक की रिपोर्ट के माध्यम से सभी विवरण प्राप्त कर सकते हैं। जुगाड़ के इस तरीके को बार-बार किया जा सकता है। यदि 10 ऐसी कम्पनियां मौजूद हैं – भ्रष्टाचार की राशि 200 करोड़ रुपये हो जाती है। 100 होंगी तो यह रकम 2000 करोड़ रुपये हो जाएगी।

CA Report of JISPL by PGurus on Scribd

जारी रहेगा…

सन्दर्भ :

[1] Over 1 lakh shell companies deregistered this fiscal: GovernmentDec 28, 2018, Times of India

2 COMMENTS

  1. […] से पहुँचा जा सकता है। भाग 3 शीर्षक है रमेश अभिषेक का कोलकाता के माध्यम से अप… यह भाग 4 […]

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