रमेश अभिषेक ने मोदी के स्टार्ट-अप इंडिया सुधार को कैसे बिगाड़ा – भाग – 2

एफएमसी में और अब डीपीआईआईटी में एक बहुत बड़ी गड़बड़ी पैदा करने के बावजूद, रमेश अभिषेक सेवानिवृत्ती के बाद एक तनाव मुक्त अच्छे वेतन वाले पद की उम्मीद कर रहा है।

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एफएमसी में और अब डीपीआईआईटी में एक बहुत बड़ी गड़बड़ी पैदा करने के बावजूद, रमेश अभिषेक सेवानिवृत्ती के बाद एक तनाव मुक्त अच्छे वेतन वाले पद की उम्मीद कर रहा है।
एफएमसी में और अब डीपीआईआईटी में एक बहुत बड़ी गड़बड़ी पैदा करने के बावजूद, रमेश अभिषेक सेवानिवृत्ती के बाद एक तनाव मुक्त अच्छे वेतन वाले पद की उम्मीद कर रहा है।

इस श्रृंखला के भाग 1 पर यहाँ से पहुँचा जा सकता है। यह भाग 2 है।

स्टार्ट-अप्स की मान्यता प्रक्रिया अपने आप में एक बड़े स्वांग की तरह प्रतीत होती है जब आप देखते हैं कि उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) पहचान प्रक्रिया में, जो पंजीकृत व्यक्तियों, कम्पनियों या किसी अन्य संरचना में थे, अस्वीकार किए गए स्टार्ट-अप की संख्या के बारे में जनता के साथ कोई डेटा साझा नहीं करने के लिए पर्याप्त होशियार है? यह डेटा, रमेश अभिषेक अग्रवाल अच्छी तरह से जानता है, गन्दी तस्वीर और विफलता जो उसके पूरे कार्यकाल में भरी पड़ी हैं, को प्रकट कर सकते हैं।

यदि लगभग 20 हजार स्टार्ट-अप पंजीकृत या डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त थे, तो कितनों को अस्वीकार कर दिया गया था?

अभिषेक की अध्यक्षता वाले स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम की भूमिका पारिस्थितिकी तंत्र को सुचारू रूप से और प्रभावी ढंग से कार्य करने में मदद करने के लिए स्टार्टअप तंत्र में विभिन्न इकाइयों के बीच संपर्क स्थापित करना था।

सार्वजनिक दृष्टि में उपलब्ध स्टार्ट-अप पंजीकृत वर्ष-वार कोई गड़बड़ी उजागर नहीं होने के कारण यह प्रश्न महत्वपूर्ण है। क्या यह है कि स्टार्ट-अप इंडिया या डीपीआईआईटी वेबसाइट पर लॉग इन करने वालों में सभी को स्टार्ट-अप्स का दर्जा मिला है? यदि नहीं, तो इन 20,000 को स्टार्ट-अप के रूप में किसने मान्यता दी? क्या अभिषेक कम से कम यह खुलासा कर सकते हैं कि इनमें से कितनी एलएलपी या निजी लिमिटेड कंपनियां हैं जिन्हें उनके द्वारा सत्यापित किया गया है?

डीपीआईआईटी द्वारा वादा की गई योजनाओं और लाभों से लाभान्वित होने वाले स्टार्ट-अप्स की संख्या की कोई सूची है? इन 20 हजार मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप में से 10% को भी लाभ नहीं हुआ है।

स्टार्ट-अप मान्यता मुख्य रूप से एक मजाक है जोकि केवल एक फॉर्म भरने का अभ्यास भर रहा है, जो डीपीआईआईटी द्वारा समर्थित स्टार्ट-अप वेबसाइट पर कोई भी कर सकता है। इसके लिए कुछ बुनियादी जानकारी की आवश्यकता होती है जैसे कि शुरुआती वित्तपोषण, विचार क्या है आदि और आपको 3-10 कार्य दिवसों के भीतर स्टार्ट-अप के रूप में मान्यता प्राप्त हो जाती है। लेकिन इसके आगे क्या? डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त होने के बाद लाभ उठाने के लिए आगे बढ़ने की कोशिश करने वाले बहुत से वास्तविक स्टार्ट-अप्स के पास बताने के लिए एक दुखद कहानी है।

दफ्तरशाही

स्टार्टअप इंडिया के प्रमुख वचनों में से एक व्यवसाय करने की प्रक्रिया को आसान बनाना और अनुपालन लागतों को कम करना, सुनिश्चित करना था। इस संबंध में, डीपीआईआईटी पंजीकृत स्टार्टअप को एक सरल ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से 6 श्रम कानूनों और 3 पर्यावरण कानूनों के लिए स्वयं-प्रमाणित करने की अनुमति है। बेशक इसका स्वागत है, लेकिन स्व-प्रमाणन इन कानूनों के संबंध में अनुपालन लागतों को दूर नहीं करता।

उदाहरण के लिए एक स्टार्टअप को अब भी अनुतोषक भुगतान कानून (पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी एक्ट), 1972 का अनुपालन करना होगा और इस तरह के अनुपालन का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके अलावा, कई अन्य राज्य और केंद्रीय कानून हैं जिन्हें अनुपालन की आवश्यकता होती है जिन्हें शामिल नहीं किया गया है (जैसे कि दुकान और स्थापना अधिनियम)। भारत में असंख्य अनुपालन आवश्यकताओं को देखते हुए, एक स्टार्टअप उद्यमी अक्सर प्रलेखन की मात्रा और अधिकारियों के साथ उसके व्यवहार से घबरा जाता है। यह उसे उसके वित्तीय संसाधनों और उद्यमशीलता के उत्साह को नष्ट कर देता है।

वास्तव में, कई स्टार्टअप उद्यमी डीपीआईआईटी प्रमाणीकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया को एक जटिल अनुपालन गतिविधि के रूप में देखते हैं, एक सहायक संस्था के रूप में नहीं, जो उन्हें अनुपालन प्रक्रिया के माध्यम से संचालन करने में मदद करेगा।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

डीपीआईआईटी टीम को व्यापार करने की प्रक्रिया को सरल सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण अधिकार दिया गया है; इसके बजाय, इसने दफ्तरशाही और जटिल प्रक्रियाओं से भरा एक सिस्टम बनाया, जिसके परिणामस्वरूप स्टार्टअप को अनुपालन के लिए महत्वपूर्ण प्रयास करने की आवश्यकता पड़ती है। स्टार्ट अप को अनुपालन में पीएचडी करना प्रभावी रूप से आवश्यक है।

वित्तपोषण – स्टार्टअप्स के लिए एक रामबाण उपाय

कोई भी स्टार्टअप पर्याप्त धन के बिना कामयाब नहीं हो सकता है और इसलिए स्टार्टअप के लिए पूंजी प्रदान करने के इच्छुक निवेशकों / वित्तपोषकों के आसपास किसी भी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने की आवश्यकता है।

नवीनीकरण (इनोवेशन) को सपोर्ट करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के ‘फण्ड ऑफ फंड्स’ को संचालित करने के लिए स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (एसआईडीबीआई) द्वारा प्रबंधित किया गया था, जिसमें से सिर्फ 1561 करोड़ रुपये (पिछले 3 वर्षों में 16% से कम) स्टार्टअप्स को वितरित किया गया।

वर्तमान में, केवल श्रेणी 1 वैकल्पिक निवेश निधि (एआईएफ) एसआईडीबीआई से धन प्राप्त करने के लिए पात्र हैं[1]। कई स्टार्टअप ने इस बात का प्रतिनिधित्व किया कि डीपीआईआईटी सिडबी को श्रेणी 2 एआईएफ को धन वितरित करने की अनुमति दे, जो स्टार्टअप समुदाय के लिए तेजी से धनराशि प्रदान करेगा। हालाँकि, अब तक के उनके अभ्यावेदन डीपीआईआईटी से प्रतिक्रिया प्राप्त करने में विफल रहे हैं।

स्टार्टअप इंडिया क्यों विफल हो रहा है?

अभिषेक की अध्यक्षता वाले स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम की भूमिका पारिस्थितिकी तंत्र को सुचारू रूप से और प्रभावी ढंग से कार्य करने में मदद करने के लिए स्टार्टअप तंत्र में विभिन्न इकाइयों के बीच संपर्क स्थापित करना था। यह सुनिश्चित करना डीपीआईआईटी की जिम्मेदारी थी:

  • एंजेल टैक्स पर स्टार्टअप की चिंताओं को संबंधित कराधान अधिकारियों द्वारा उचित रूप से संबोधित किया जाए;
  • यदि स्टार्टअप के ऊपर उल्लिखित अनुपालन बोझ और लाल टेप को विभिन्न स्टार्टअप्स से प्राप्त प्रतिक्रिया और प्रतिनिधित्व के आधार पर छूट दी गई है; विकास को सुनिश्चित करने के लिए सभी योग्य स्टार्टअप्स को वित्त जारी करने की तेज और सुगम प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए वित्तपोषण तंत्र मजबूत हो जाता है;
  • स्टार्टअप के सभी प्रमुख मुद्दों और चिंताओं को सक्रिय हस्तक्षेप और कार्रवाई द्वारा संबोधित किया जाना था।

इसके बजाय, अभिषेक रोजगार सृजन को लेकर अविश्वसनीय दावे कर रहा है जिसे जमीनी कार्यवाही के साथ साबित नहीं किया गया है। सिडबी फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से एआईएफ का चयन करने के लिए धन का वितरण कर पक्षपात करने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, अंतर-मंत्रालयी बोर्ड से कर छूट प्राप्त करने वाले कुछ स्टार्टअप्स के लिए पक्षपात की भी अफवाहें हैं।

सन्दर्भ :

[1] Using AIF regulations to start up IndiaJan 22, 2017, LiveMint.com

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