कई पत्रकार दिल्ली दंगों के मामलों के आरोपी जेहादी खालिद सैफी से अपने संबंधों के लिए उजागर हुए

दिल्ली दंगों की रूपरेखा तैयार करने के मामले में खालिद सैफी 26 फरवरी से हिरासत में है, खालिद पर कुछ पत्रकारों, शिक्षाविदों और अधिवक्ताओं के माध्यम से धन उगाहने (काले धन को वैध बनाना) का आरोप लगाया गया है!

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दिल्ली दंगों की रूपरेखा तैयार करने के मामले में खालिद सैफी 26 फरवरी से हिरासत में है, खालिद पर कुछ पत्रकारों, शिक्षाविदों और अधिवक्ताओं के माध्यम से धन उगाहने (काले धन को वैध बनाना) का आरोप लगाया गया है!
दिल्ली दंगों की रूपरेखा तैयार करने के मामले में खालिद सैफी 26 फरवरी से हिरासत में है, खालिद पर कुछ पत्रकारों, शिक्षाविदों और अधिवक्ताओं के माध्यम से धन उगाहने (काले धन को वैध बनाना) का आरोप लगाया गया है!

दिल्ली में हुए दंगों और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख संचालक खालिद सैफ़ी के साथ अपने संबंधों को लेकर कई भारतीय पत्रकार परेशानी में हैं। पुलिस जांच से पता चलता है कि खालिद सैफी टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के ‘रेडियो मिर्ची‘ जॉकी सईमा के संपर्क में थे, जो अपने कार्यक्रम के माध्यम से भीड़ को प्रदर्शन वाली जगह पर पहुँचने का कहती हुई उजागर हुई थी। कई वरिष्ठ पत्रकार जैसे राजदीप सरदेसाई, सिद्धार्थ वरदराजन, विवादास्पद पूर्व एनडीटीवी एंकर अभिसार शर्मा, जेहादी-गतिविधियों की समर्थक पत्रकार अरफा खानम शेरवानी और राणा अयूब, हिंदुओं से नफरत करने वाली नेहा दीक्षित भी दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड और प्रमुख सूत्रधार खालिद सैफी के साथ नियमित संपर्क में थे। खालिद सैफी 26 फरवरी से दिल्ली पुलिस की हिरासत में है। वह अब दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर दंगों को भड़काने के लिए तीन आरोपपत्रों का सामना कर रहा है।

दिल्ली के सभी दंगों और विरोध प्रदर्शनों में खालिद सैफ़ी एक प्रमुख सूत्रधार हैं। मूल रूप से, 39 वर्षीय जेहादी कार्यकर्ता पिछले 10 वर्षों से हज यात्रा के लिए टिकट और वीजा की व्यवस्था के काम में लगा हुआ है। विरोध प्रदर्शन की व्यवस्था के अलावा, वह अपने हज वीजा और टिकटिंग व्यवसाय के बारे में @KSaifi के रूप में ट्वीट करता है “कृपया हज और उमरा सेवाओं के लिए संपर्क करें। सभी-समावेशी पैकेज एक उचित मूल्य पर सबसे अच्छी सेवा के साथ। हज और उमराह की सेवा में 10 वर्षों का अनुभव। हजारों हाजी संतुष्ट। हम कभी झूठ नहीं बोलते हम कभी धोखा नहीं देते। पीएस: कृपया अपने सभी संपर्कों के साथ साझा करें,” यह उसने हाल ही में दंगों के कारोबार को करते हुए ट्वीट किया था। उसकी ट्रैवल कंपनी का नाम अल-लतीफ है। उसके ट्वीट से जुड़ा पोस्टर उसके हज वीजा और यात्रा व्यवसाय को दर्शाता है:

उसके ट्वीट्स बताते हैं कि वह हिंदू विरोधी पत्रकार नेहा दीक्षित के बहुत करीब है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर एक नकली कहानी लिखने के लिए आउटलुक पत्रिका में अपनी नौकरी खो दी। टाइम्स ऑफ इंडिया के रेडियो मिर्ची की जॉकी सायमा उसकी एक और पसंदीदा है। “आज पुरानी जीन्स वाली सायमा से खुरेजी विरोध प्रदर्शन स्थल पर मिला। बहुत ही आकर्षक और चुलबुली लड़की है। लड़की चमकती और प्रेरणादायक बनी रहो। अल्लाह तुम्हें आशीर्वाद दे अमीन,” सायमा पर सैफी के ट्वीट में कहा गया।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

खालिद सैफी ने एनडीटीवी के रवीश कुमार के साथ भी अपनी सेल्फी अपलोड की। ट्वीट को आरफा खानम और ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मुहम्मद जुबैर के साथ टैग किया गया है।

खालिद सैफी का नीचे का ट्वीट सिद्धार्थ वरदराजन, राणा अय्यूब, राजदीप सरदेसाई, आरफा खानम, अभिसार शर्मा जैसे पत्रकारों के साथ उसकी निकटता दर्शाता है, जो पत्रकार अक्सर इस्लामिक समर्थक होते हैं।

सिद्धार्थ वरदराजन:

राना अयूब

राजदीप, आरफा खानुम, अभिसार

पत्रकारों के अलावा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और दिल्ली विश्वविद्यालय के कई वामपंथी और जिहादी समर्थक शिक्षाविद् और छात्र नेता खालिद सैफी के संपर्क में हैं। उसके साथ आम आदमी पार्टी के कई नेता और कविता कृष्णन जैसे नक्सली नेता भी दिखाई देते हैं। वह यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (घृणा के खिलाफ एकजुट) नामक एक संगठन चला रहा था, और एजेंसियों को लगता है कि इस संगठन का उपयोग कुछ इस्लामिक देशों से भारत में तैयार विरोध प्रदर्शन के लिए धन लाने के लिए किया गया था। उसके ट्विटर हैंडल से पता चलता है कि विरोध प्रदर्शन की व्यवस्था के अलावा, वह ज्यादातर सऊदी अरब, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, तुर्की और ब्रुनेई में देखा गया। उसे केरल और तमिलनाडु के कई जिहादी समर्थक संगठनों के साथ भी देखा गया था। एजेंसियां पत्रकारों, शिक्षाविदों और कुछ अधिवक्ताओं के साथ उसके पैसे के लेन देन के संबंध की जांच कर रही हैं। वे यह भी मानते हैं कि खालिद सैफी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का हिस्सा है और उसका मुख्य काम पत्रकारों, शिक्षाविदों, छात्र नेताओं और नारीवादी कार्यकर्ताओं के साथ गठजोड़ करना था।

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