डॉ रेड्डी प्रयोगशाला के सहयोग से भारत के डीआरडीओ ने कोविड-19 रोगियों के लिए सीधे मौखिक रूप से लेने वाली दवा का उत्पादन किया है!

डीआरडीओ के मुकुट में एक और रत्न! आमतौर पर मिसाइल-आधारित उपलब्धियों के लिए विख्यात, अब कोविड के लिए दवाओं के निर्माण क्षेत्र में!

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डीआरडीओ के मुकुट में एक और रत्न! आमतौर पर मिसाइल-आधारित उपलब्धियों के लिए विख्यात, अब कोविड के लिए दवाओं के निर्माण क्षेत्र में!
डीआरडीओ के मुकुट में एक और रत्न! आमतौर पर मिसाइल-आधारित उपलब्धियों के लिए विख्यात, अब कोविड के लिए दवाओं के निर्माण क्षेत्र में!

एक प्रमुख घटना के रूप में, भारत के प्रतिष्ठित रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आपातकालीन उपयोग के लिए एंटी-कोविड-19 की एक मौखिक रूप से दी जाने वाली दवा विकसित कर ली है। यह मौखिक दवा डीआरडीओ की बायो मेडिकल लैब – द इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) द्वारा हैदराबाद की डॉ रेड्डी प्रयोगशाला के सहयोग से विकसित की गई है। यह दवा जिसे पानी में घोलकर लिया जा सकता है, को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने मंजूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को नई दिल्ली में घोषणा की – “2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) नाम की इस दवा को न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) की एक प्रयोगशाला में डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल), हैदराबाद के सहयोग द्वारा विकसित किया गया है।”

मौखिक दवा के बारे में घोषणा करते हुए, डीआरडीओ ने ट्वीट किया:

नैदानिक परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) के परिणामों से पता चला है कि यह अणु अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार करने में मदद करता है और पूरक ऑक्सीजन निर्भरता को कम करता है। 2-डीजी के साथ इलाज किए गए रोगियों के बड़ी संख्या में आरटीवी-पीसीआर रिपोर्ट्स नकारात्मक आई हैं। कोविड-19 से पीड़ित लोगों को दवा का अत्यधिक लाभ होगा। 2-डीजी पाउच में पाउडर के रूप में आता है और इसे पानी में घोलकर मौखिक रूप से लिया जाता है।

भारत के रक्षा मंत्रालय ने कहा – “01 मई को, डीसीजीआई ने मध्यम से गंभीर कोविड-19 रोगियों के लिए सहायक दवा के रूप में इस दवा के आपातकालीन उपयोग की अनुमति दे दी थी। एक सामान्य अणु और ग्लूकोज के जैसा होने के कारण इसे आसानी से उत्पादित किया और देश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराया जा सकता है।”

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

मंत्रालय ने कहा – “यह दवा वायरस संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस के विकास को रोकती है। वायरल से संक्रमित कोशिकाओं में इसका चयनात्मक संचय इस दवा को अद्वितीय बनाता है।”

डीआरडीओ अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल 2020 में, महामारी की पहली लहर के दौरान, आईएनएमएएस-डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी), हैदराबाद की मदद से प्रयोग किए और पाया कि यह अणु एसएआरएस (सार्स)-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करता है और वायरल वृद्धि को रोकता है। इन परिणामों के आधार पर, डीसीजीआई के सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने मई 2020 में कोविड-19 रोगियों पर 2-डीजी के द्वितीय-चरण नैदानिक परीक्षण की अनुमति दी।

डीआरडीओ ने हैदराबाद में डॉ रेड्डीज प्रयोगशाला के साथ मिलकर कोविड-19 रोगियों में दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण करने के लिए नैदानिक परीक्षण शुरू किया। मई से अक्टूबर 2020 के दौरान किए गए द्वितीय-चरण परीक्षणों (फेज़ II ट्रायल्स) में, दवा को कोविड-19 रोगियों हेतु सुरक्षित पाया गया और उनके स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। द्वितीय-चरण (ए) (खुराक परीक्षण) छह अस्पतालों में आयोजित किया गया था और द्वितीय-चरण (बी) (खुराक परीक्षण) नैदानिक परीक्षण पूरे देश के 11 अस्पतालों में आयोजित किया गया था। द्वितीय-चरण का परीक्षण 110 रोगियों पर किया गया।

प्रभावकारिता के रुझानों में, 2-डीजी के साथ इलाज किए गए रोगियों ने विभिन्न बिंदुओं पर मानक देखभाल (एसओसी) की तुलना में तेजी से स्वस्थ उपचार प्रदर्शित किया। एसओसी की तुलना में विशिष्ट महत्वपूर्ण संकेत मापदंडों के सामान्यीकरण को प्राप्त करने के लिए माध्य समय के संदर्भ में काफी अनुकूल रुझान (2.5 दिन का अंतर) देखा गया।

सफल परिणामों के आधार पर, डीसीजीआई ने नवंबर 2020 में तृतीय-चरण नैदानिक परीक्षणों की अनुमति दी। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के 27 कोविड अस्पतालों में 220 रोगियों पर दिसंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच तृतीय-चरण नैदानिक परीक्षण का आयोजन किया गया। तृतीय-चरण नैदानिक परीक्षण का विस्तृत डेटा डीसीजीआई को प्रस्तुत किया गया। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने कहा कि 2-डीजी के मामले में, एसओसी की तुलना में दिन-3 से पूरक ऑक्सीजन निर्भरता (42% बनाम 31%) से छुटकारा मिला और रोगियों के लक्षणों में काफी सुधार हुआ और ऑक्सीजन थेरेपी या निर्भरता से जल्दी राहत का संकेत मिला।

01 मई 2021 को, डीसीजीआई ने मध्यम से गंभीर कोविड-19 रोगियों के लिए सहायक दवा के रूप में इस दवा के आपातकालीन उपयोग की अनुमति दे दी। डीआरडीओ ने कहा – “एक सामान्य अणु और ग्लूकोज के जैसा होने के कारण इसे आसानी से उत्पादित किया और देश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराया जा सकता है। दवा पाउच में पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर मौखिक रूप से लिया जाता है। यह दवा वायरस संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस के विकास को रोकती है। वायरल से संक्रमित कोशिकाओं में इसका चयनात्मक संचय इस दवा को अद्वितीय बनाता है।”

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