भारत को वैक्सीन आपूर्ति के बारे में व्याख्यान की आवश्यकता नहीं है: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन! यूरोपीय संघ ने भारत के ‘वैक्सीन मैत्री’ की सराहना की!

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रोन और यूरोपीय संघ ने भारत की 'वैक्सीन मैत्री' पहल की सराहना की!

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फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रोन और यूरोपीय संघ ने भारत की 'वैक्सीन मैत्री' पहल की सराहना की!
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रोन और यूरोपीय संघ ने भारत की 'वैक्सीन मैत्री' पहल की सराहना की!

भारत को हर तरह का समर्थन देते हुए, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने शनिवार को कहा, “भारत को वैक्सीन आपूर्ति के बारे में ज्ञान की आवश्यकता नहीं है”, यह बयान उन्होंने यूरोपीय संघ के अन्य 26 देशों द्वारा आयोजित भारत-यूरोपीय संघ आभासी शिखर सम्मेलन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन व्यक्त करते हुए दिया। कोविड-19 वैक्सीन की कमी और इसके कारण हो रही भारत सरकार की आलोचना के जवाब में, मैक्रॉन ने जोर देकर कहा कि भारत को वैक्सीन आपूर्ति पर ‘किसी से भी ज्ञान‘ की आवश्यकता नहीं है।

आभासी शिखर सम्मेलन में कई अन्य नेताओं के साथ जर्मनी की एंजेला मार्केल और यूरोपीय संघ के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लियेन ने भाग लिया, जहां मैक्रॉन ने महामारी के समय कई देशों को भारत द्वारा किये गए टीके के निर्यात पर प्रकाश डाला। मैक्रॉन ने कहा- “मैं कोविड-19 मामलों की वृद्धि का सामना कर रहे भारतीय लोगों को एकजुटता का संदेश देना चाहता हूं। फ्रांस इस संघर्ष में आपके साथ है, एक ऐसा संघर्ष जिसने किसी को भी नहीं बख्शा। हम अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं।”

यूरोपीय संघ ने जनवरी से मार्च के दौरान 90 देशों को टीके निर्यात करने के भारत के “वैक्सीन मैत्री” की सराहना की। भारत ने वैक्सीन की 6.6 करोड़ से अधिक खुराक 90 देशों में निर्यात की थीं।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

बाद में जारी किए गए यूरोपीय संघ-भारत बैठक के संयुक्त बयान में कहा गया : “हम महामारी के कारण विश्व स्तर पर उत्पन्न कठिन परिस्थितियों से अवगत हैं। हमने जानमाल के नुकसान पर गहरा शोक व्यक्त किया और भारत, यूरोप और बाकी दुनिया में इस महामारी के पीड़ितों के परिवारों के साथ गहरी संवेदना व्यक्त की। हम इस बात पर सहमत हुए कि वैश्विक सहयोग और एकजुटता के माध्यम से कोविड-19 महामारी को हराना हमारी प्राथमिकता है और रोम में इस साल के जी20 शिखर सम्मेलन के संदर्भ में एक बेहतर, सुरक्षित, स्थायी और समावेशी स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए एक साथ काम करने की हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।”

“हमने कोविड-19 टीके, निदान और उपचार, और स्वास्थ्य प्रणालियों की मजबूती के लिए सार्वभौमिक, सुरक्षित, न्यायसंगत और सस्ती पहुंच का समर्थन किया, और इस संबंध में एक्सेस टू कोविड-19 टूल्स एक्सेलेरेटर (एसीटी-ए) की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। वैश्विक जनता की भलाई के लिए व्यापक टीकाकरण की भूमिका को स्वीकार करना और सहमति व्यक्त करना कि टीकाकरण प्रक्रिया देशों के बीच दौड़ नहीं है, बल्कि समय के खिलाफ एक दौड़ है, हमने यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों द्वारा टीकों के उत्पादन और कोवैक्स सुविधा हेतु उनके पर्याप्त समर्थन का स्वागत किया, साथ ही भारत ने वैक्सीन निर्माण और अपने ‘वैक्सीन मैत्री’ के माध्यम से 90 से अधिक देशों में कोविड-19 टीकों का वितरण किया, हमने भारत के प्रयासों की सराहना की। भारत ने यूरोपीय संघ के नागरिक सुरक्षा तंत्र के माध्यम से समन्वित यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों के त्वरित समर्थन और सहायता की सराहना की, यही एकजुटता और सहयोग की भावना यूरोपीय संघ-भारत संबंधों की पहचान रही है।”

छह पृष्ठों का विस्तृत ईयू-भारत संयुक्त बयान यहां पढ़ा जा सकता है[1]

संदर्भ:

[1] Joint Statement – EU-India Leaders’ Meeting, 8 May 2021 May 08, 2021, Council of the European Union

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