चेन्नई पुलिस ईओडब्ल्यू ने चिदंबरम के वफादार आईएल एंड एफएस के रवि पार्थसारथी को गिरफ्तार किया; 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में 15 दिन की जेल

जिग्नेश शाह और 63 मून्स समूह के लिए एक बड़ी जीत, चिदंबरम के एक वफादार सेवक रवि पार्थसारथी को ईओडब्ल्यू द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है!

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जिग्नेश शाह और 63 मून्स समूह के लिए एक बड़ी जीत, चिदंबरम के एक वफादार सेवक रवि पार्थसारथी को ईओडब्ल्यू द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है!
जिग्नेश शाह और 63 मून्स समूह के लिए एक बड़ी जीत, चिदंबरम के एक वफादार सेवक रवि पार्थसारथी को ईओडब्ल्यू द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है!

वित्तीय धोखाधड़ी में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के जाने-माने सहयोगी और आईएल एंड एफएस (इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज) के पूर्व अध्यक्ष रवि पार्थसारथी को आखिरकार चेन्नई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया और धोखाधड़ी और आपराधिक उल्लंघन के आरोप में 15 दिन की जेल भेज दिया। रवि पार्थसारथी, जो चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते बड़े आराम से वित्त मंत्रालय पर शासन कर रहे थे, 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा दायर 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के मामले में पकड़े गए हैं। अब 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए पार्थसारथी सैदापेट पुलिस जेल में बंद हैं।

चेन्नई ईओडब्ल्यू शुक्रवार शाम एक बयान में कहा – “1 लाख करोड़ रुपये के आईएल एंड एफएस घोटाले के मुख्य सरगना (किंग पिन और मास्टर माइंड) रवि पार्थसारथी को ईओडब्ल्यू द्वारा 20 सितंबर 2020 के अपराध संख्या 13 के संबंध में गिरफ्तार किया गया है। आईएल एंड एफएस समूह, जिसमें 350 से अधिक समूह कंपनियां शामिल हैं, को आईएल एंड एफएस समूह के तत्कालीन प्रबंधन द्वारा धोखाधड़ी को बढ़ावा देने के लिए एक वाहन के रूप में इस्तेमाल किया गया था, जिसका नेतृत्व तत्कालीन अध्यक्ष और एमडी सीईओ श्री पार्थसारथी ने किया था।“

भारत सरकार ने अपनी याचिका में उल्लेख किया था, “रवि पार्थसारथी और उनकी टीम लापरवाही, अक्षमता और आकर्षक वित्तीय विवरण पेश करके जनता को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार थी।

चिदंबरम के धन ठग पार्थसारथी को 9 जून को मुंबई से गिरफ्तार कर चेन्नई लाया गया था। मद्रास उच्च न्यायालय ने पार्थसारथी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। पुलिस उपाधीक्षक प्रकाश बाबू के सहयोग से पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) आर दिनाकरन की देखरेख में एक विशेष टीम मामले की जांच कर रही है।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

अपनी शिकायत में, 63 मून्स ने कंपनी द्वारा आईएल एंड एफएस समूह ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्स इंडिया लिमिटेड (आईटीएनएल) के डिबेंचर में निवेश किए गए 200 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया था। 2014 और 2015 के दौरान, आईटीएनएल ने निजी प्लेसमेंट के आधार पर 1,000 और 2,000 गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर जारी करने की अधिसूचना जारी की थी, जिसमें प्रत्येक का अंकित मूल्य 10 लाख रुपये था, जो कुल मिलाकर क्रमशः 100 करोड़ रुपये और 250 करोड़ रुपये के थे[1]

इससे पहले जनवरी में, ईओडब्ल्यू ने पूर्व प्रबंध निदेशक रामचंद करुणाकरण और आईटीएनएल के पूर्व उपाध्यक्ष और निदेशक हरि शंकरन को मुंबई से गिरफ्तार किया था। 63 मून्स द्वारा दायर शिकायत के आधार पर, चेन्नई ईओडब्ल्यू ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी। ईओडब्ल्यू का कहना है कि उसे आईटीएनएल के अन्य जमाकर्ताओं से शिकायतें मिल रही हैं। इसने आईटीएनएल के पीड़ित जमाकर्ताओं और निवेशकों से अपने दावों को चेन्नई ईओडब्ल्यू को भेजने के लिए भी कहा है।

इससे पहले, भारत सरकार ने अपनी याचिका में उल्लेख किया था, “रवि पार्थसारथी और उनकी टीम लापरवाही, अक्षमता और आकर्षक वित्तीय विवरण पेश करके जनता को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार थी। आईएल एंड एफएस अपने नकदी प्रवाह और भुगतान दायित्वों के बीच एक गंभीर बेमेल को छिपाकर अपने वित्तीय विवरणों को छुपा रहा था। यह तरलता की कुल कमी और स्पष्ट प्रतिकूल वित्तीय अनुपात को भी छिपा रहा था।”

25 से अधिक वर्षों से आईएल एंड एफएस के शीर्ष पर रहने वाले पार्थसारथी पर सबसे बड़े वित्तीय धोखाधड़ी में से एक को अंजाम देने और एक विशाल वित्तीय संस्थान को वित्तीय रूप से बर्बाद करने के लिए सुनियोजित रूप से चलाने का आरोप है।

प्रमुख जांच एजेंसी के अलावा, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (भारत सरकार), कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी), राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) मुंबई, तथा ग्रांट थॉर्नटन फोरेंसिक रिपोर्ट ने उनके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले हैं।

आरओसी ने व्यवसाय संचालन के मानदंडों में कुप्रबंधन और समझौता देखा है, जबकि ईओडब्ल्यू-नई दिल्ली द्वारा पार्थसारथी और हरि शंकरन के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सबसे हानिकारक निष्कर्षों में से एक में, भारत सरकार की याचिका में उल्लेख किया गया है- “आईएल एंड एफएस ने एक ट्रस्ट बनाया था जिसे कर्मचारी कल्याण ट्रस्ट के रूप में जाना जाता था, जिसका उपयोग कंपनी को दाव पर लगाकर अपने निदेशकों को समृद्ध करने के लिए एक उपकरण के रूप में किया गया था। उक्त ट्रस्ट का उपयोग आईएल एंड एफएस और उसकी समूह कंपनियों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए किया गया था। ट्रस्ट के पास आईएल एंड एफएस लिमिटेड का 12 प्रतिशत स्वामित्व था। रवि पार्थसारथी और कुछ अन्य वरिष्ठ आईएल एंड एफएस अधिकारी ट्रस्ट के प्रमुख लाभार्थी थे।”

आरबीआई की 22 मार्च, 2019 को प्रस्तुत रिपोर्ट ने स्पष्ट किया था कि धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता को अंजाम देने में प्रमुख भूमिका पार्थसारथी ने समूह अध्यक्ष रहते निभाई थी[2]

ग्रांट थॉर्नटन द्वारा किए गए फोरेंसिक (न्यायिक) ऑडिट (लेखापरीक्षा) में अवैध गतिविधियों, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को रिश्वत देने और अन्य धोखाधड़ी क्रियाकलापों का भी खुलासा हुआ, जो स्पष्ट रूप से आईएल एंड एफएस समूह के तत्कालीन अध्यक्ष पार्थसारथी की भागीदारी को दर्शाता है।

संदर्भ:

[1] Chennai EOW Arrests Ravi Parthasarathy of IL&FS in Rs200 crore Cheating Case Filed by 63 moonsJun 11, 2021, Money Life

[2] IL&FS Chairman Ravi Parthasarathy arrested in ‘Rs 1 lakh crore scam’Jun 11, 2021, Zee News

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  1. […] के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज मामले में निचली अदालत के […]

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