दो शानदार प्रतिभाओं के बीच एक युद्ध – एक नैतिकता के बिना और एक नैतिकता के साथ

श्री अय्यर द्वारा लिखी एनडीटीवी फ़्रॉड्स भाग 2 - एक पुस्तक की समीक्षा।

0
1680
श्री अय्यर द्वारा लिखी एनडीटीवी फ़्रॉड्स भाग 2 - एक पुस्तक की समीक्षा।
श्री अय्यर द्वारा लिखी एनडीटीवी फ़्रॉड्स भाग 2 - एक पुस्तक की समीक्षा।

प्रदर्शों की बड़ी सूची आपको गहराई का अंदाजा देती है कि एनडीटीवी और पीसी खुद को बचाने के लिए कहां तक गए।

यह कहने के लिए तो दो बराबर के व्यक्तियों के बीच एक युद्ध है।

दोनों विरोधी उच्च शिक्षित और अनुभवी पेशेवर हैं। और दोनों ही धनवान हैं।

यदि वे दो साल से अधिक समय से युद्ध में हैं, तो यह केवल इसलिए है क्योंकि उनकी मानसिकता अलग है।

एक तरफ वह मृदुभाषी और परिष्कृत व्यक्ति है। 69 साल पहले कलकत्ता में जन्मे, उन्हें यूनाइटेड किंगडम में उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति मिलने से पहले, प्रसिद्ध दून और ला मार्टिनियर में स्कूली शिक्षा मिली थी। वहां उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (इंग्लैंड और वेल्स) के फेलो के रूप में अर्हता प्राप्त की; उन्होंने पीएचडी भी की है, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में। उत्सुकता से, और विशिष्ट रूप से, वह और उनकी पत्रकार पत्नी, राधिका रॉय, पहले थे जिन्होंने 1989 में, नई दिल्ली टेलीविज़न (एनडीटीवी) नामक एक टेलीविजन समाचार उत्पादन कंपनी स्थापित की, जहां, संयोग से, वह चुनावी विश्लेषक और वित्तीय विश्लेषक के रूप में वे लोकप्रिय हो गए, फिर एक बार विशिष्ट रूप से।

जैसा कि लेखक कहते हैं, “यह बाबुओं, व्यापारियों और समर्पित राजनेताओं के बीच मौजूद अपवित्र निखात निधि है।”

स्टार न्यूज़ के लिए समाचारों को प्रस्तुत करने के वर्षों के बाद, डॉ रॉय ने एनडीटीवी 24 × 7, एनडीटीवी इंडिया और अन्य चैनलों के साथ 2003 में अपना प्रसारण तन्त्र शुरू किया। एनडीटीवी ने अच्छे, नैतिक और बिना किसी तामझाम खबर कवरेज के लिए मानक स्थापित किए।

उपरोक्त अंतिम वाक्य में शब्द “नैतिक” पर ध्यान दें। यह एक अन्य प्रतिभाशाली व्यक्ति द्वारा अलंकृत शब्द है, जो व्यक्ति चेन्नई में पैदा हुआ और 1985 से संयुक्त राज्य अमेरिका में बस गया था। कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में परास्नातक, वे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, एन्क्रिप्शन और सिस्टम के क्षेत्रों में 37 पेटेंट हासिल करते हुए एक बहुत बड़े आविष्कारक बन गए। एक आविष्कारक से, वह एक उद्यमी बने, जिन्होंने 2015 में एक वाणिज्यिक पत्रिका में लिखना शुरू करने के बाद, एक समाचार पोर्टल, PGurus.com शुरू किया, जिनमें वह एक प्रकाशन पर प्रबंध संपादक, लेखन, संपादन, साक्षात्कार और पर्यवेक्षण कर रहे हैं। जिसका आज प्रति माह 6,00,000 का प्रचलन है। पहले से ही, वह चार पुस्तकें (i) “एनडीटीवी धोखाधड़ी” (ii) “जीएसटीएन का सार”; (iii) “द राइज़ एंड फ़ॉल ऑफ़ ‘आप'” और (iv) “C- कंपनी” लिख चुके हैं; जिनमें से एक अमेजन किंडल की सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों में शामिल हो गयी। यह सब आश्चर्यजनक और अद्वितीय है, लगभग ऐतिहासिक है। इस साहसी, “अलग सोच वाले” विचारक को, एनडीटीवी और इसके कई शक्तिशाली राजनीतिक और नौकरशाही समर्थकों को आफत में डालने के लिए सलाम है। जी हां, 57 साल के श्री अय्यर को सलाम।

मार्च 2017 में “एनडीटीवी धोखाधड़ी(NDTV FRAUDS)” के उनके पहले संस्करण को बहुत प्रशंसा मिली। फरवरी 2018 तक इसका पूरा प्रिंट संस्करण बिक गया था और पुस्तक की कॉपियां खत्म हो गईं।

मार्च 2017 में इसके पहले प्रकाशन के बाद से, बहुत कुछ ऐसा हुआ था जिसने पिछले संस्करण में वर्णित शैतानी एनडीटीवी धोखाधड़ी की सामग्री की पुष्टि की, विशेषत: सहापराधिता भारतीय राजस्व सेवा अधिकारियों, जिन्हें वर्तमान राजनेताएं समर्थन देते हैं, के साथ मिलकर, खासतौर पर उस समय के वित्त मंत्री पालनियप्पन चिदंबरम (पीसी) और बदले हुए सरकार में उसके मित्र।

इन सभी को नए और अतिरिक्त अध्यायों के रूप में पुस्तक के दूसरे संस्करण में शामिल किया गया। प्रदर्शों की बड़ी सूची आपको गहराई का अंदाजा देती है कि एनडीटीवी और पीसी खुद को बचाने के लिए कहां तक गए।

जैसा कि लेखक कहते हैं, “यह बाबुओं, व्यापारियों और समर्पित राजनेताओं के बीच मौजूद अपवित्र निखात निधि है।”
उपरोक्त दावे को दूसरे संस्करण की निम्नलिखित शीर्षक सामग्री द्वारा अच्छी तरह से वहन किया जा सकता है:

(i) 5000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी;

(ii) “मामले को दबाना”;

(iii) रात के रोमांच;

(iv) चित्त भी मेरी पट्ट भी मेरी;

(v) सोनिया गांधी द्वारा नियंत्रित यूपीए सरकारों के साथ एनडीटीवी के भाग्य का लिंक;

(vi) शुरूआत से धोखाधड़ी;

(vii) रिश्वत और अनैतिक पत्रकारिता की शुरुआत;

(viii) कारगिल युद्ध और गोधरा दंगों में समर्पित पत्रकारिता; (ix) कांग्रेस मुखपत्र;

(x) मुखबिर आयकर अधिकारी को चुप कराना

(xi) आधिकारिक रहस्य चुराना

(xii) यौन शोषण का झूठा दावा।

पाठक उपरोक्त से उत्तेजित, भयभीत और ज़ख़मी हो जाएँगे अगर उन्होंने यह सब पहले अनुभव नहीं किया है।

ध्यान दें:
1. यहां व्यक्त विचार लेखक के हैं और पी गुरुस के विचारों का जरूरी प्रतिनिधित्व या प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.