भारत में वीपीएन के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए क्यों जरूरी है सख्त साइबर सुरक्षा मानक

सीईआरटी-इन के अनुसार, डाटा ब्रीच, डाटा लीक, कंप्यूटर वायरस, पहचान की चोरी, स्पूफिंग, फिशिंग, ई-गवर्नेंस, ई-गवर्नेंस एप्लीकेशन पर हमले आदि साइबर अपराध के विभिन्न प्रकार हैं।

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वीपीएन के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्यों जरूरी है सख्त साइबर सुरक्षा मानक
वीपीएन के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्यों जरूरी है सख्त साइबर सुरक्षा मानक

वीपीएन को गंभीर अपराधों के बारे में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा

उद्योग विशेषज्ञों ने रविवार को कहा कि यदि नये साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू किया जाता है, तो वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) को गंभीर अपराधों के बारे में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा, जिससे यूजर्स को लाभ होगा।

नये साइबर सुरक्षा मानदंडों में साइबर सुरक्षा पर हमले की घटनाओं और वीपीएन के दुरुपयोग की रिपोर्टिंग अनिवार्य है।

28 अप्रैल के जारी इन निर्देशों पर हंगामे के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) ने एक अद्यतन दस्तावेज या अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची जारी की।

इसमें कहा गया कि नये निर्देश केवल सामान्य इंटरनेट यूजर्स पर लागू होंगे, जो व्यावसायिक रूप से उपलब्ध वीपीएन का उपयोग करते हैं।

सीईआरटी-इन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कंपनी के अनुबंध संबंधी दायित्वों के कारण छह घंटे के भीतर साइबर सुरक्षा की घटनाओं की रिपोर्ट करने के आदेश को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।

नई दिल्ली स्थित साइबर कानून विशेषज्ञ विराग गुप्ता के अनुसार, मौजूदा साइबर सुरक्षा नियम 11 साल पुराने हैं, जो इंटरनेट युग में एक लंबा समय है।

विराग गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, इस अवधि में, इंटरनेट का आकार और आयाम काफी बदल गया है। साइबर अपराधों को अंजाम देने वाले देश-विदेश के हो सकते हैं।

नई नीति के अनुसार, कोई भी सेवा प्रदाता, मध्यस्थ, डाटा सेंटर, निकाय और सरकारी संगठन अनिवार्य रूप से छह घंटे के भीतर साइबर घटनाओं की रिपोर्ट करेगा।

विराग कहते हैं, अगर अधिकारियों द्वारा नीति की शर्तों को ठीक से लागू किया जाता है और कानून के अनुसार मामले दर्ज किये जाते हैं, तो पुलिस, डिजिटल लैब और अदालतें बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को कैसे निपटा पाएंगी?

दूसरी तरफ केंद्रीय आईटी और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि व्यापार व्यवहार्यता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मंत्री ने शनिवार को अहमदाबाद में नासकॉम के कार्यक्रम से इतर कहा, इसमें केवल एक बाध्यता है कि वीपीएन का आपराधिक गतिविधियों के लिए दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति का डाटा वीपीएन ऑपरेटरों को देना होगा।

सीईआरटी-इन के अनुसार, डाटा ब्रीच, डाटा लीक, कंप्यूटर वायरस, पहचान की चोरी, स्पूफिंग, फिशिंग, ई-गवर्नेंस, ई-गवर्नेंस एप्लीकेशन पर हमले आदि साइबर अपराध के विभिन्न प्रकार हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, भारत एक ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था को हासिल करने का लक्ष्य रखता है और लगभग 80 करोड़ लोग यहां इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद 2020 में साइबर अपराध के कम मामले दर्ज किये गये।

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के केवल 4,047 मामले, 1,093 ओटीपी धोखाधड़ी और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों पर 578 घटनाएं दर्ज की गईं।

विराग गुप्ता ने कहा, यदि इन दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू किया जाता है, तो ऐसे सभी अपराधों की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से करनी होगी।

[आईएएनएस इनपुट के साथ]

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