सर्वोच्च न्यायालय ने तिहाड़ जेल के अधिकारियों को ‘बेशर्म’ बताया। यूनिटेक भाइयों अजय और संजय चंद्रा को मुंबई की जेलों में स्थानांतरित किया गया

यह अच्छा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने चंद्रा बंधुओं को दिल्ली जेल से बाहर निकाल दिया, शीर्ष अदालत को दोषी जेल कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई भी करनी चाहिए!

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यह अच्छा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने चंद्रा बंधुओं को दिल्ली जेल से बाहर निकाल दिया, शीर्ष अदालत को दोषी जेल कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई भी करनी चाहिए!
यह अच्छा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने चंद्रा बंधुओं को दिल्ली जेल से बाहर निकाल दिया, शीर्ष अदालत को दोषी जेल कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई भी करनी चाहिए!

सर्वोच्च न्यायालय ने यूनिटेक के पूर्व मालिकों को मुंबई के आर्थर रोड और तलोजा जेल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया

तिहाड़ जेल प्रशासन को ‘बेशर्म‘ बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को निर्देश दिया कि यूनिटेक के पूर्व मालिक संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को तिहाड़ जेल से मुंबई की आर्थर रोड जेल और महाराष्ट्र की तलोजा जेल में स्थानांतरित किया जाए। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस रिपोर्ट को देखने के बाद तिहाड़ जेल से शिफ्टिंग कर दी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चंद्रा भाई जेल कर्मचारियों की मिलीभगत से जेल से कारोबार कर रहे थे। शीर्ष अदालत, जिसने ईडी की दो स्थिति रिपोर्टों का अध्ययन किया, ने कहा कि तिहाड़ जेल अधीक्षक और अन्य कर्मचारी अदालत के आदेशों की अवहेलना करने और उसके अधिकार क्षेत्र को कमजोर करने के लिए चंद्रा बंधुओं के साथ मिलीभगत करने के मामले में “बिल्कुल बेशर्म” हैं।

रमेश चंद्रा द्वारा संचालित यूनिटेक, डीएलएफ के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी थी। चंद्रा के बुरे दिन तब शुरू हुए जब उनके छोटे बेटे संजय चंद्रा 2जी घोटाले में फंस गए और 2011 की शुरुआत से ही जेल की सजा भुगतने लगे। नीरा राडिया टेप ने खुलासा किया था कि यूनिटेक रियल एस्टेट कारोबार में टाटा समूह का रणनीतिक साझेदार था।

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को चंद्रा भाइयों के संबंध में तिहाड़ जेल के कर्मचारियों के आचरण के बारे में व्यक्तिगत रूप से जांच करने और चार सप्ताह के भीतर अदालत को रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि दोनों भाइयों को आर्थर रोड और तलोजा जेलों में अलग-अलग रखा जाएगा। “हमारा विचार है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री दर्शाती है कि इस अदालत के आदेशों के बावजूद तिहाड़ सेंट्रल जेल परिसर, जहाँ दो आरोपी बन्द हैं, के भीतर ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, जो न्यायलय के अधिकार को कमजोर कर सकते हैं, और साथ ही पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) समेत अन्य अधिनियमों के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आदेशित जाँच पड़ताल को कमजोर कर सकते हैं।

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पीठ ने अपने आदेश में कहा – “इन परिस्थितियों में, हम निर्देश देते हैं कि दोनों आरोपी अजय चंद्रा और संजय चंद्रा को तिहाड़ सेंट्रल जेल से मुंबई के आर्थर रोड जेल के परिसर और तलोजा सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया जाए।” पीठ ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान से कहा – “तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने इस अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाने के लिए आरोपियों के साथ सक्रिय रूप से मिलीभगत की है। हमारा कहना है कि तिहाड़ जेल अधीक्षक और उनके कर्मचारी बिल्कुल बेशर्म हैं। लेकिन हम छोटी विषयवस्तु के कारण बड़े संदर्भ को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

“हमें बस इतना कहना है कि तिहाड़ जेल के कर्मचारी बेशर्म हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि यह केंद्र और राजधानी में सही हो रहा है? हम निश्चित रूप से उन पर कार्रवाई करेंगे। हम सबसे पहले आरोपियों को इस जेल से हटा देंगे।” शीर्ष अदालत ने कहा कि ईडी की दोनों रिपोर्ट में कुछ “गंभीर और परेशान करने वाले” मुद्दों को विचार के लिए उठाया गया है और इन मामलों से उसी के अनुसार निपटा जाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को चंद्रा भाइयों के संबंध में तिहाड़ जेल के कर्मचारियों के आचरण के बारे में व्यक्तिगत रूप से जांच करने और चार सप्ताह के भीतर अदालत को रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि ईडी द्वारा दिल्ली सीपी को लिखे गए पत्र की सामग्री गंभीर मुद्दों को उठाती है और विशेष रूप से अदालत के लिए चिंता की बात यह है कि जेल कर्मचारियों के साथ मिलीभगत में उसके प्रयास और अधिकार क्षेत्र को कम करने की कोशिश की गयी है।

ईडी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि उसने यहां एक “गुप्त भूमिगत कार्यालय” का पता लगाया है, जिसे यूनिटेक के पूर्व संस्थापक रमेश चंद्रा द्वारा संचालित किया जा रहा था और वहाँ पैरोल या जमानत पर उनके बेटे संजय और अजय ने दौरा किया था। ईडी, जो चंद्रा और यूनिटेक लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाना) के आरोपों की जांच कर रहा है, ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संजय और अजय दोनों ने पूरी न्यायिक हिरासत को अर्थहीन कर दिया है क्योंकि जेल कर्मचारीयों की मिलीभगत से जेल में वे स्वतंत्र रूप से संवाद कर रहे हैं, अपने अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं और अंदर से संपत्तियों का निपटान कर रहे हैं।

संजय और अजय दोनों, जो अगस्त 2017 से जेल में हैं, पर कथित तौर पर घर खरीदारों के पैसे की हेराफेरी करने का आरोप है। शीर्ष अदालत ने अपने अक्टूबर 2017 के आदेश में उन्हें 31 दिसंबर, 2017 तक शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में 750 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा था। चंद्रा भाइयों ने दावा किया है कि उन्होंने अदालत की शर्तों का पालन किया और उन्होंने 750 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की। और इसलिए उन्हें जमानत दी गयी है। यह मामला एक आपराधिक मामले से संबंधित है, जो शुरू में 2015 में दर्ज एक शिकायत से शुरू हुआ था और बाद में गुरुग्राम में स्थित यूनिटेक प्रोजेक्ट्स ‘वाइल्ड फ्लावर कंट्री‘ और ‘एंथिया प्रोजेक्ट‘ के 173 अन्य घर खरीदार भी इस से जुड़ गए।

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