सुब्रमण्यम स्वामी नेशनल हेराल्ड मामले में सुनवाई के दौरान नए सबूत पेश करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। सोनिया राहुल समेत 5 के खिलाफ नोटिस!

स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि सुनवाई अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने जिरह के दौरान नए साक्ष्य की अनुमति न देकर गलती की है!

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स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि सुनवाई अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने जिरह के दौरान नए साक्ष्य की अनुमति न देकर गलती की है!
स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि सुनवाई अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने जिरह के दौरान नए साक्ष्य की अनुमति न देकर गलती की है!

दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्वामी की याचिका पर सुनवाई अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी!

राजनीतिक रूप से संवेदनशील नेशनल हेराल्ड मामले में एक नए मोड़ में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई न्यायालय की कार्यवाही पर रोक लगा दी, याचिका सुनवाई अदालत के आदेश, जिसमें कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आयकर आकलन आदेश जैसे नए सबूतों की अनुमति नहीं दी गयी थी, के खिलाफ थी। स्वामी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि सुनवाई अदालत ने जिरह के दौरान नए साक्ष्य की अनुमति न देकर गलती की है। न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने गांधियों, एआईसीसी के महासचिव ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडियन (वायआई) को 12 अप्रैल तक स्वामी की याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा और तब तक मामले में कार्यवाही पर रोक लगा दी।

स्वामी ने सुनवाई न्यायालय के 11 फरवरी के आदेश से असंतुष्ट होकर उच्च न्यायालय का रुख किया, फिलहाल, गांधी और इस मामले के अन्य आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए सबूत देने के लिए उन्होंने याचिका दायर की है। सुनवाई अदालत ने कहा था कि सबूतों का प्रस्तुतिकरण करने के लिए स्वामी की याचिका पर विचार आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 244 के तहत मामले में उनका परीक्षण पूरा होने के बाद किया जायेगा।

स्वामी ने सर्वोच्च न्यायालय के महासचिव (रजिस्ट्री अधिकारी), एक उप भूमि और विकास अधिकारी, और एक आयकर आयुक्त सहित कुछ गवाहों को बुलाने और उन्हें कुछ दस्तावेजों की पुष्टि करने के लिए निर्देश दिये जाने की भी मांग की है।

सुब्रह्मण्यम स्वामी की ओर से अधिवक्ता सत्य पॉल सभरवाल उपस्थित हुए, उन्होंने दलील दी कि अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश में आयकर मूल्यांकन जैसे नए सबूतों की अनुमति नहीं देकर स्पष्ट गलती की है, जिसमें नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के सोनिया और राहुल गांधी की मालकीयत वाली यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संदिग्ध अधिग्रहण में 414 करोड़ रुपये की कर चोरी उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि सोनिया और राहुल ने उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में आयकर के खिलाफ अपनी याचिका में पहले ही इन आयकर दस्तावेजों को प्रस्तुत कर दिया है और अब उन्हें सुनवाई अदालत में उनके द्वारा प्रस्तुत उसी दस्तावेज पर आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है। स्वामी हेराल्ड हाउस के भूमि दस्तावेजों के निष्कर्षों को भी प्रस्तुत करना चाहते थे, जिसमें शहरी विकास मंत्रालय द्वारा संदिग्ध सौदे और उल्लंघनों का पता लगाया गया था।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

सुनवाई प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करते हुए स्वामी ने दलील दी – “वे (सोनिया और राहुल) सुनवाई अदालत में नेशनल हेराल्ड में हुए घोटाले को उजागर करने वाले आयकर विभाग और अन्य सरकारी दस्तावेजों पर कैसे आपत्ति जता सकते हैं, जबकि उन्होंने खुद इन सभी दस्तावेजों को उच्च न्यायालय में पेश किया था और केस हार गए थे।” उन्होंने उच्च न्यायालय में यह भी कहा कि सबूतों की पेशकश वाली उनकी याचिका को अनुमति दी जाए।

पीगुरूज ने पहले ही, नेशनल हेराल्ड सौदे में 414 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा करने वाले विस्तृत 105 पन्नों के आयकर आकलन आदेश को प्रकाशित किया था[1]

स्वामी ने सर्वोच्च न्यायालय के महासचिव (रजिस्ट्री अधिकारी), एक उप भूमि और विकास अधिकारी, और एक आयकर आयुक्त सहित कुछ गवाहों को बुलाने और उन्हें कुछ दस्तावेजों की पुष्टि करने के लिए निर्देश दिये जाने की भी मांग की है। उन्होंने पत्रकार जे गोपीकृष्णन को एक गवाह के रूप में बुलाने की भी मांग की, जिन्होंने पहली बार घोटाले की सूचना दी थी और उनके साथ ईमेल संचार में, राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के दोबारा विमोचन (लॉन्च) की कोई योजना नहीं थी।

संदर्भ:

[1] National Herald Case: Read 105-page Income Tax Assessment order against Young Indian exposing Rs.414 crores gainJan 22, 2018, PGurus.com

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