सेबी ने कहा मोतीलाल ओसवाल, इंडिया इंफोलाइन उपयुक्त और उचित नहीं है

सेबी ने शिकंजा कसा, मोतीलाल ओसवाल कंपनी और इंडिया इंफोलाइन दलाली कंपनियों को "अयोग्य और अनुचित" घोषित किया।

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सेबी ने शिकंजा कसा, मोतीलाल ओसवाल कंपनी और इंडिया इंफोलाइन दलाली कंपनियों को
सेबी ने शिकंजा कसा, मोतीलाल ओसवाल कंपनी और इंडिया इंफोलाइन दलाली कंपनियों को "अयोग्य और अनुचित" घोषित किया।

सेबी ने दलालों पर शिकंजा कस दिया – अधिक कार्यवाही होगी?

कार्यवाही में काफी समय लगा। मैंने पिछले महीने लिखा था कि कैसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) एक दुविधाजनक स्थिति में थी[1]। बहुत उकसाने के बाद, सेबी ने अंतत: दलालों मोतीलाल ओसवाल[2] और आईआईएफएल[3] को अयोग्य और अनुचित घोषित किया। यह सिर्फ एक शुरुआत है, क्योंकि कई और हैं जिन्हें दलाली के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

यह सही समय है जब सरकार को पी चिदंबरम के खिलाफ, उसके एफटीआईएल समूह को समाप्त करके उसके प्रतिद्वंद्वी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को सफल बनाने के नीच कदम के लिए कार्यवाही करनी चाहिए।

दोनों मामलों में (मोतीलाल ओसवाल – एमओसीबीपीएल और इंडिया इन्फोलाइन – आयआयसीएल), सेबी ने निम्नलिखित बातें कही:

8) सेबी के दिनांक 06 अक्टूबर, 2016 के आदेश द्वारा सेबी के विभिन्न प्रावधानों (स्टॉक दलाल और उप दलाल) विनियम, 1992 रेगुलेशन, 1992 (इसके बाद “दलाल अधिनियम” कहकर संबोधित), सेबी (प्रतिभूति बाजार में धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार से संबंधित प्रतिबंध) विनियम, 2003 (इसके बाद “पीएफयूटीपी विनियम” कहकर संबोधित), वायदा अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1952, (इसके बाद “एफसीआरए” कहकर संबोधित), धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (इसके बाद “पीएमएलए” कहकर संबोधित), केंद्र सरकार की अधिसूचनाएं और विभिन्न परिपत्र/आचार संहिता, दिशानिर्देश, उप-कानून, एफएमसी/सेबी/एनएसईएल/एनसीडीईएक्स/एमसीएक्स के व्यावसायिक नियम आदि के कथित उल्लंघनों के बारे में पूछताछ करने के लिए नामित प्राधिकारियों की एक खंडपीठ (इसके बाद “डीए” कहकर संबोधित) नियुक्त किया गया था ।

9) बिचौलियों विनियमन के विनियम 27 के संदर्भ में, डीएओं ने एमओसीबीपीएल (आयआयसीएल) के संबंध में 11 अप्रैल, 2017 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उक्त जांच रिपोर्ट में डीए ने कहा है कि “… मामले की गंभीरता, मामले की तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, वस्तु दलाल के रूप में नोटिसी के आचरण संदिग्ध है और निश्चित रूप से इसकी सामान्य प्रतिष्ठा, निष्पक्षता, ईमानदारी और अखंडता के रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया है और इसलिए प्रतिभूति बाजार में दलाल होने के लिए एक ‘योग्य और उचित व्यक्ति’ के रूप में अपनी स्थिति पर असर पड़ा है …” और निम्नलिखित सिफारिशें दी:

a) वस्तु दलाल के रूप में पंजीकरण के लिए प्रस्तुत एमओसीबीपीएल (आयआयसीएल) के आवेदन को प्रतिभूति बाजार के हित में नहीं माना जा सकता और एमओसीबीपीएल (आयआयसीएल) के आवेदन को अस्वीकार किया जाना चाहिए।

b) सेबी एफसीआरए की धारा 27 के तहत जारी भारत अधिसूचना के उल्लंघन सहित एमओसीबीपीएल (आयआयसीएल) द्वारा की गई अनियमितताओं के लिए एफसीआरए के अध्याय V के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत अभियोजन कार्यवाही शुरू करने पर भी विचार करें।

बाबुओं का क्या?

मैंने अपनी सी-कंपनी श्रृंखला में केपी कृष्णन और रमेश अभिषेक जैसे नौकरशाहों की भूमिका पर विस्तार से लिखा है, जिन्होंने फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड (एफटीआईएल) की संस्थाओं को, तत्कालीन वित्त मंत्री, पी चिदंबरम (पीसी) के उकसाने पर, अयोग्य और अनुचित घोषित करने में अद्भुत सतर्कता प्रदर्शित की थी। बाद में व्यवस्थित जानबूझकर उत्पीड़न के परिणामस्वरूप जिग्नेश शाह ने अपनी सभी कंपनियों को भारी छूट पर बेच दिया। सेबी अब उसकी भरपाई कैसे करेगा? और उनकी प्रतिष्ठा की हानि का क्या? अब जब शाह ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चिदंबरम, कृष्णन और अभिषेक के खिलाफ 10 हजार करोड़ रुपये का आपराधिक मानहानि मुकदमा दायर किया है, तो अजय शाह और उसके समर्थक जैसे भय से काँप रहे होंगे।

पीसी और अजय शाह को जेल भेजो

यह सही समय है जब सरकार को पी चिदंबरम के खिलाफ, उसके एफटीआईएल समूह को समाप्त करके उसके प्रतिद्वंद्वी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को सफल बनाने के नीच कदम के लिए कार्यवाही करनी चाहिए। एनएसई में कई प्रमुख कर्मचारियों के साथ अजय शाह, उसकी पत्नी और उसकी बहन की भूमिका ने कुछ लोगों को ही थोड़े समय में विशाल लाभ कमाने में मदद किया। इस धन का अधिकांश हिस्सा भारत में कभी नहीं रहा क्योंकि यह पी-नोट्स के माध्यम से आया और चलायमान मुद्रा के रूप में बाहर चला गया।

सेबी की तारीफ करता हूँ लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है

सेबी ने जो काम किया है वह प्रशंसनीय है लेकिन इस प्रणाली में बहुत गन्दगी है जिसे साफ करने की जरूरत है। अब तक एनएसई घोटाले में 14 के गिरोह के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है और न ही अजय शाह और उसके समर्थकों को छुआ गया है, केवल कारण बताओ नोटिस भेजने के अलावा। यह आशा की जाती है कि त्वरित कार्यवाही की जाएगी और इन बदमाशों को जेल में भेजा जाएगा, जो उनकी वास्तविक जगह है।

 

संदर्भ:

[1] SEBI: Between a rock and a hard placeJan 27, 2019, PGurus.com

[2] Order in respect of Motilal Oswal Commodities Broker Private LimitedFeb 22, 2019, SEBI.gov.in

[3] Order in respect of India Infoline Commodities LimitedFeb 22, 2019, SEBI.gov.in

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