दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में इंडियाबुल्स ग्रुप द्वारा 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के काले धन को वैध बनाने की जांच की मांग की गई है

इंडियाबुल्स समूह के खिलाफ दायर 64-पेज की जनहित याचिका में समूह द्वारा किये गए गंभीर अवैधता, उल्लंघन और धन उगाही का आरोप लगाया गया है।

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इंडियाबुल्स समूह के खिलाफ दायर 64-पेज की जनहित याचिका में समूह द्वारा किये गए गंभीर अवैधता, उल्लंघन और धन उगाही का आरोप लगाया गया है।
इंडियाबुल्स समूह के खिलाफ दायर 64-पेज की जनहित याचिका में समूह द्वारा किये गए गंभीर अवैधता, उल्लंघन और धन उगाही का आरोप लगाया गया है।

विवादास्पद वित्त फर्म इंडियाबुल्स ग्रुप हाल ही में विख्यात वकीलों प्रशांत भूषण और कामिनी जायसवाल की अगुवाई वाले सिटीजन्स व्हिसल ब्लोअर्स फोरम कोर्ट द्वारा भारी धन शोधन की अनिमियता की विशेष जांच दल द्वारा जांच की मांग करते हुए दायर की गई जनहित याचिका (पीआईएल) के बाद और मुसीबत का सामना कर रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में इंडियाबुल्स ग्रुप और उसकी कंपनियों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय कंपनियों से प्राप्त 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की धन उगाही और धन शोधन का आरोप लगाया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनिल अंबानी के रिलायंस समूह, डीएलएफ समूह की तरह की बड़ी कंपनियां भी इंडियाबुल्स धन शोधन का हिस्सा थीं। जनहित याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) और आयकर विभाग के अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा जांच का आग्रह किया गया है, ताकि धन शोधन के पीछे के अपराधियों का पता लगाया जा सके। याचिका में इंडियाबुल्स ग्रुप द्वारा की गई धोखाधड़ी और धन शोधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी का पत्र भी संलग्न किया गया [1]

“आईबीएचएफएल (इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड) अपने संरक्षकों और उनकी विभिन्न समूह कंपनियों और सहायक कंपनियों के माध्यम से बड़े कॉर्पोरेट समूहों के स्वामित्व वाली कंपनियों को संदिग्ध ऋण दे रहा है जो बदले में इंडियाबुल्स के प्रमोटरों के स्वामित्व वाली कंपनियों के खातों में पैसा वापस भेज रहे हैं, ताकि उनके व्यक्तिगत धन में वृद्धि हो सके।

14 साल से धन शोधन / पैसों की हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया

विस्तृत 64-पृष्ठ पीआईएल (इस लेख के अंत में प्रकाशित) में  बताया गया कि आईबीएचएफएल का बकाया ऋण 96,000 करोड़ रुपये से अधिक है और देनदारियों ने 1.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक को पार कर लिया है। याचिका में कहा गया है कि अनिल अंबानी के रिलायंस समूह, डीएलएफ और महाराष्ट्र के राजनीतिक रूप से संरक्षित कॉर्डिया समूह, वाटिका समूह और अमेरिकॉर्प समूह सहित प्रमुख पांच कॉरपोरेट्स को इंडियाबुल्स ग्रुप द्वारा भारी ऋण संवितरित किया गया था और इनमें से कुछ ने इंडियाबुल्स ग्रुप में ऋणपत्र के रूप में पैसा लगाया।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

एसआईटी द्वारा जांच की मांग करते हुए, याचिका में 200 से अधिक फर्जी खोल कम्पनियों की सूची दी गई है, जहां पिछले 14 वर्षों से धन अनुमार्गण (मनी रूटिंग), कर आश्रयों से धन की हेराफेरी (राउंड-ट्रिपिंग) और धन शोधन किया गया।

64-पृष्ठ की याचिका नीचे प्रकाशित की गई है:

Indiabulls PIL by PGurus on Scribd

वाटिका लिमिटेड एसोसिएशन से प्रतिक्रिया

Response from Vatika Limited – Association

संदर्भ:

[1] Subramanian Swamy charges Indiabulls of laundering more than Rs.1 Lakh crores. Demands probe by SIT and Special AuditJul 28, 2019, PGurus.com

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