कनिष्क सिंह, वह व्यक्ति जो गांधी परिवार से अधिक शक्तिशाली है, कांग्रेस के कई नेताओं से दुखी है

कहावत है कि भले ही भगवान स्वयं मिलने के लिए तैयार हों फिर भी पुजारी के वरदान के बिना संभव नहीं! - क्या कनिष्क सिंह और गांधी परिवार के साथ ऐसा ही है?

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कहावत है कि भले ही भगवान स्वयं मिलने के लिए तैयार हों फिर भी पुजारी के वरदान के बिना संभव नहीं! - क्या कनिष्क सिंह और गांधी परिवार के साथ ऐसा ही है?
कहावत है कि भले ही भगवान स्वयं मिलने के लिए तैयार हों फिर भी पुजारी के वरदान के बिना संभव नहीं! - क्या कनिष्क सिंह और गांधी परिवार के साथ ऐसा ही है?

कांग्रेस के किसी भी नेता से पूछिए तो वे सभी एक बात पर सहमत होंगे- सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के कामकाज की शैली को ध्वस्त करने और राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी को नेताओं और कार्यकर्ताओं से अलग करने में कनिष्क सिंह की भूमिका को लेकर। वे सब एक स्वर में कहेंगे कि सोनिया गांधी द्वारा उन्हें अपने आंतरिक घेरे से हटाए के बाद, कनिष्क राहुल और प्रियंका के कार्यालयों में पहुँचे और उनके व्यवहार ने स्वाभिमानी कांग्रेस नेताओं को दूर रहने पर मजबूर कर दिया।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ वकील, जो सांसद भी हैं, ने कहा – “इस युवा व्यक्ति (कनिष्क सिंह) ने कानूनी मामलों को भी हथिया लिया और यहां तक ​​कि दिवंगत एचआर भारद्वाज सहित चिदंबरम, कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी जैसे कानूनी पेशेवर पार्टी के नेताओं को परेशान करना शुरू कर दिया। राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ता है।”

कनिष्क का परिवार गांधी परिवार से जुड़ी दिल्ली की पुरानी कंपनी एमजीएफ चला रहा है, जो राष्ट्रमंडल खेल घोटाले और अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़े मामलों में भी शामिल थी।

कनिष्क सिंह के पिता एसके सिंह इंदिरा गांधी के दिनों से गांधी परिवार के भरोसेमंद व्यक्ति थे और एक पूर्व राजनयिक और राजस्थान कैडर से थे। 2000 की शुरुआत में, सोनिया गांधी ने भी उनके तकनीक प्रेमी स्वभाव के कारण कनिष्क में दिलचस्पी दिखाई। लेकिन बाद में कांग्रेस कार्यसमिति के कई सदस्यों और कैबिनेट मंत्रियों द्वारा कनिष्क के बारे में शिकायत करने के बाद वह उनसे दूर रहने लगीं। फिर वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के कार्यालय में अपने नखरे जारी रखते हुए पहुँचे, पिछले छह महीनों से राहुल गांधी के कार्यालय में मुलाकात की प्रतीक्षा कर रहे कांग्रेस सीडब्ल्यूसी के एक सदस्य ने कहा।

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उन्होंने कहा, “जिस आदमी ने गांधी परिवार को खत्म किया वह कनिष्क सिंह है। वह सभी कानूनी फाइलें रखता है, सभी कानूनी मामलों को देखता है और सुनिश्चित करता है कि गांधी इससे बाहर न आएं, ताकि उसका काम हमेशा चलता रहे। उसने नेशनल हेराल्ड मामले में गड़बड़ी की।”

राहुल गांधी के तंत्र ने हजारों शिकायतें मिलने के बाद कनिष्क में दोष पाए, लेकिन कनिष्क को प्रियंका गांधी के कार्यालय में संरक्षण मिला क्योंकि रॉबर्ट वाड्रा और उनके मामले गांधी परिवार के लिए सिरदर्द हैं। कनिष्क ने कानूनी और वित्तीय पहलुओं को संभाला और इसलिए वह रॉबर्ट और प्रियंका दोनों के मुद्दों को संभालते हैं। प्रियंका के ऑफिस में अब उनका पूरा नियंत्रण है। एक वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता ने कहा – “वह किसी से कनिष्क की स्वीकृति के बिना नहीं मिल सकती, इसी तरह उन्होंने राहुल के कार्यालय में रहते हुए उन्हें समाप्त कर दिया। उसके अहंकार और धूर्त स्वभाव ने यहाँ तक सुनिश्चित किया कि राहुल गांधी अमेठी में हार गए। उनका दावा है कि उन्हें गांधी परिवार के विदेशी बैंक खातों का विवरण पता है, इसलिए वे उन्हें बाहर निकाल नहीं सकते। एक वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता ने कहा, “सही ढंग से देखा जाए तो पिकटेट बैंक और वेटिकन बैंक, और कुछ के लिए तो वह दावा करते हैं कि वह उनके खाते भी संचालित करते हैं।”

कनिष्क का परिवार गांधी परिवार से जुड़ी दिल्ली की पुरानी कंपनी एमजीएफ चला रहा है, जो राष्ट्रमंडल खेल घोटाले और अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़े मामलों में भी शामिल थी। एमजीएफ का प्रबंधन वर्तमान में कनिष्क के चाचा और उनके बेटे श्रवण गुप्ता द्वारा किया जा रहा है, जिनके नाम अगस्ता के मुख्य आरोपी गुइडो हाशके के साथ करीबी रूप से जुड़े हुए थे। “उनके भाई और रिश्तेदार आईसीआईजे (इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स) द्वारा उजागर कर आश्रय (टैक्स हेवन) खातों में शामिल हैं। गांधी परिवार के साथ उनकी निकटता के कारण, वह अपने भाई की फाइल को आयकर विभाग में बंद करने और यह सुनिश्चित करने में कि कोई मुकदमा नहीं चलाया जाए, सफल रहे।”

कई कांग्रेस नेताओं का कहना है – “कनिष्क ने यह सुनिश्चित किया कि कांग्रेस के सिब्बल, सलमान और सिंघवी जैसे सभी कानूनी दिग्गजों को गांधी परिवार के आपराधिक और कर मामलों से बाहर रखा जाए ताकि ये मामले हमेशा जारी रहें और गांधी परिवार पर कनिष्क का नियंत्रण मजबूत हो। कनिष्क में कांग्रेस के शीर्ष 3 नेताओं को कांग्रेस के मंडली में उनके पहले नामों से बुलाने का दुस्साहस है।”

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  1. […] के अंत में, नाराज कांग्रेस नेताओं ने कनिष्क सिंह पर दोष लगाया, जो कभी राहुल गांधी के […]

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