क्या राहुल गांधी इतने बेवकूफ हैं कि बांदीपुर नेशनल पार्क जैसे घने जंगलों के बीच से रात के यातायात की मांग कर रहे हैं?

राहुल गांधी, 1972 में उनकी दादी इंदिरा गांधी द्वारा पारित वन्यजीवन संरक्षण अधिनियम 1972 को नाश करने की कोशिश कर रहे है

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राहुल गांधी ने, 1972 में उनकी दादी इंदिरा गांधी द्वारा पारित वन्यजीवन संरक्षण अधिनियम को नाश करने की कोशिश की
राहुल गांधी ने, 1972 में उनकी दादी इंदिरा गांधी द्वारा पारित वन्यजीवन संरक्षण अधिनियम को नाश करने की कोशिश की

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर साबित किया है कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र वायनाड से मैसूर तक घने जंगलों के माध्यम से रात्रि यातायात की अनुमति (जिसे कई अदालतों ने प्रतिबंधित किया है) देने की एक विचित्र मांग को उठाते हुए कि वह कितने बेवकूफ हैं। अदालतों ने इन घने जंगलों के माध्यम से 2008 से रात्रि यातायात पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया जिसमें बाघों का सबसे बड़ा रिजर्व – बांदीपुर नेशनल पार्क भी शामिल है।

इस मूर्खतापूर्ण और अजीब मांग को बार-बार दोहराने के बाद, राहुल शुक्रवार को रात्रि यातायात प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए वायनाड पहुँचे, यह प्रदर्शन पहले पास के चर्चों के कुछ गुटों द्वारा शुरू किया गया था [1]। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि कुछ यात्रा (ट्रैवल) कंपनियां और कुछ लकड़ी माफिया रात्रि यातायात प्रतिबंध को हटाने की इस अत्याचारपूर्ण मांग के पीछे हैं, जिस प्रतिबंध को कर्नाटक सरकार द्वारा लगाया गया था, उच्च न्यायालय द्वारा इसकी पुष्टि की गई थी और मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।

न्यायालयों ने रात्रि यातायात के कारण ट्रकों द्वारा मारे गए बेकसूर जानवरों की दुर्दशा के बारे में खुले दरबार में वीडियो और तस्वीरें देखने के बाद इन जंगलों के माध्यम से रात्रि यातायात पर प्रतिबंध लगा दिया। कई वन माफिया इन जंगलों को तब तक लूट रहे थे जब तक कि रात के आवागमन पर न्यायालयों ने प्रतिबंध नहीं लगा दिया था। 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का हवाला देते हुए, सभी अदालतों ने बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान के माध्यम से रात में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रभावित राज्यों में से एक – तमिलनाडु – न्यायालयों के आदेशों पर सहमत हुआ और केरल राज्य शीर्ष अदालत में अपील के साथ आगे बढ़ा। केरल सरकार यहां तक कि जंगलों के माध्यम से उन्नत गलियारों के विचार के साथ आयी और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इसे नकार दिया गया।
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इस पर्यावरण विरोधी रुख के लिए कई पर्यावरण कार्यकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ सामने आए हैं और वे उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि 1972 का कड़ा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा पारित किया गया था किसी और के द्वारा नहीं। उन्होंने राहुल गांधी पर लकड़ी माफियाओं और ट्रैवल एजेंसियों के इशारों पर काम करने का भी आरोप लगाया, जिन्होंने स्थानीय चर्चों के माध्यम से इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत की। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राहुल के दरबारियों में कुछ लोगों को वायनाड, केरल में अवैध वन उपज व्यापारिक गुटों द्वारा रिश्वत दी गयी है, वायनाड जहां से वह निर्वाचित हुए थे, जबकि मई 2019 में लोकसभा चुनाव में अमेठी में हार गए थे।

संदर्भ:

[1] Rahul Gandhi joins Wayanad’s protest against night traffic ban in tiger reserveOct 4, 2019, IndiaToday.in

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