प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय एनडीटीवी के शेयरों को सुप्रीम कोर्ट में गिरवी कैसे रख सकते हैं जबकि वे वीसीपीएल के हिस्से में हैं, आयकर विभाग द्वारा संलग्न हैं?

क्या प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय सर्वोच्च न्यायालय को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं?

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क्या प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय सर्वोच्च न्यायालय को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं?
क्या प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय सर्वोच्च न्यायालय को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं?

प्रणय रॉय और पत्नी राधिका रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय में एनडीटीवी से 50 लाख शेयर जमा करने की पेशकश करते हैं

28 जनवरी, 2021 को, एनडीटीवी के मालिक प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय में अपने चैनल एनडीटीवी से अपने शेयरों को गिरवी रखने की अजीब पेशकश की। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के निष्कर्षों के अनुसार पहले से विवादित एनडीटीवी शेयरों को गिरवी रखकर क्या रॉय दंपत्ति भारत के सर्वोच्च न्यायालय को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं? “प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय के स्वामित्व वाले” ये शेयर पहले से ही मुकेश अंबानी से संबंधित कंपनी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) के साथ हुए उनके विवादित 403 करोड़ रुपये के सौदे का हिस्सा हैं और एनडीटीवी के 30% शेयर प्रणॉय रॉय की शेल (फर्जी) कंपनी आरआरपीआर (प्रणॉय रॉय राधिका रॉय) होल्डिंग्स के हिस्से में हैं, जिन्हें अक्टूबर 2017 में आयकर विभाग द्वारा पहले से ही संलग्न किया जा चुका है।

उन शेयरों को गिरवी रखना जो उनके नहीं हैं

सोमवार को प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय की तरफ से उपस्थित वकील मुकुल रोहतगी ने बताया कि सेबी के अपीलीय न्यायाधिकरण में स्टॉक एक्सचेंज हेरफेर मामले में सेबी के 16.97 करोड़ रुपये के जुर्माना को चुनौती देने के लिए उनके पास 8.5 करोड़ रुपये जमा करने के लिए पैसे नहीं हैं। अपीलीय न्यायाधिकरण ने सेबी के 16.97 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती देने की स्थिति में 50 प्रतिशत (लगभग 8.5 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का आदेश दिया था। रॉय दंपत्ति ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उनके पास जमा करने के लिए पैसे नहीं हैं और एनडीटीवी में उनके 50 लाख शेयरों को जमा के तौर पर माना जाए। शीर्ष अदालत ने शेयरों के मूल्य देने के लिए कहा है[1]

प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी द्वारा सूचीबद्ध कंपनी एनडीटीवी के शेयरों की संदिग्ध बिक्री केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भी जांच का विषय है और उम्मीद है कि ये एजेंसियां भारत के शीर्ष न्यायालय में पति-पत्नी की जोड़ी द्वारा दिए गए संदिग्ध प्रस्ताव पर ध्यान देंगी।

यहाँ प्रश्न यह हैं:

  1. क्या प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को दिए गए इस संदिग्ध प्रस्ताव के बारे में आयकर विभाग को पता है? अक्टूबर 2017 से शेल कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स (आरआरपीआर यानी राधिका रॉय प्रणॉय रॉय) के स्वामित्व वाले एनडीटीवी के 30 प्रतिशत शेयर आयकर विभाग ने संलग्न कर दिये हैं[2]
  2. 28 जनवरी 2012 को, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट के अनुसार, पति और पत्नी अपनी शेल कंपनी – आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के साथ – एनडीटीवी में 61.45% शेयरों के मालिक हैं। हालाँकि, जैसा कि सेबी द्वारा 26 जून 2018 के अपने आदेश (नम्बर. डब्ल्यूटीएम/जीएम/ईएफडी/31/2018-19) बताया है कि अवैध रूप से वीसीपीएल को इसका 50% के करीब बेच दिया गया है। वीसीपीएल उद्योगपति महेंद्र नाहटा द्वारा नियंत्रित कंपनी है, जो अंबानी परिवार के विश्वसनीय व्यक्ति हैं। एक निजी सौदे के जरिए सूचीबद्ध कंपनी एनडीटीवी के शेयर बेचकर प्रणॉय रॉय द्वारा वीसीपीएल के साथ किया गया सौदा और उससे प्रणॉय को 403 करोड़ रुपये हासिल हुए, यही सेबी के मामले का सार है[3]। इस मामले का मुकदमा एसएटी (प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण) के समक्ष भी चल रहा है। इस प्रकार, उनके पास प्रस्ताव देने के लिए कोई स्पष्ट संपार्श्विक नहीं है और उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सामने गलत बयान / खुलासे किए हैं
    इसलिए, प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी सर्वोच्च न्यायालय को विवादित संपत्ति जमा राशि के रूप में पेश करके सभी संस्थानों (एससी, सेबी, न्यायाधीकरण और आयकर विभाग) को मूर्ख बना रहे हैं ताकि अगर यह गलत हो जाए, तो आयकर विभाग, ईडी, सेबी और सीबीआई, आदि एक फिजूल की जद्दोजहद में उलझ कर रह जाएँ।
  3. प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी द्वारा सूचीबद्ध कंपनी एनडीटीवी के शेयरों की संदिग्ध बिक्री केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भी जांच का विषय है और उम्मीद है कि ये एजेंसियां भारत के शीर्ष न्यायालय में पति-पत्नी की जोड़ी द्वारा दिए गए संदिग्ध प्रस्ताव पर ध्यान देंगी। इसके अलावा, सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) को रॉय दंपत्ति द्वारा किये गए संदिग्ध शेयर हस्तांतरण के मामले में सीबीआई के निष्कर्षों पर ध्यान देना चाहिए। एमआईबी लाइसेंसिंग की स्थिति (समाचार प्रसारण कंपनियों के लिए) यह आदेश देती है कि मालिक एमआईबी और गृह मंत्रालय की स्पष्ट सहमति के बिना अपनी हिस्सेदारी को गिरवी या किसी भी तीसरे पक्ष के हित का निर्माण नहीं कर सकते हैं।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

2017 में, मैंने एक विस्तृत पुस्तक लिखी थी – NDTV FRAUDS (एनडीटीवी फ्रॉडस) – यह पुस्तक पत्रकारिता की आड़ में धोखाधड़ी और लूट के खेल की व्याख्या करती है। एनडीटीवी के दो मालिकों ने प्रमुख शीर्ष प्रबंधन के साथ मिलकर सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं के साथ सांठगांठ करके वर्षों तक कानून तोड़े, करों से बचाव और एक सार्वजनिक सूचीबद्ध कंपनी के शेयरधारकों को धोखा दिया है। यह सब स्पष्ट रूप से राजनीतिक संरक्षण और “तिकड़मबाजी” के माध्यम से लुटियंस संघ के हिस्से के रूप में और कैसे उन्होंने एक चुने हुए कुलीन वर्ग के लिए एक पक्षपाती सार्वजनिक धारणा का निर्माण किया। जनरल इलेक्ट्रिक जैसी मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन ने जानबूझकर या अन्यथा एनडीटीवी की शेल कंपनी (शून्य कर्मचारी और शून्य राजस्व) में $150 मिलियन का निवेश करके उसे सहायता प्रदान की!

भारतीय नागरिक के दिमाग में, मीडिया के लिए एक स्थान और सम्मान है। पत्रकारिता के चोले का उपयोग करते हुए और पत्रकारिता की स्वतंत्रता (फ्रीडम ऑफ प्रेस) की आड़ में, मीडिया मालिक इस स्थिति का दुरुपयोग करते हैं और अंत में, पत्रकारिता के मूल्यों का हनन करते हैं। कई अवसरों पर, मीडिया झूठे प्रचार, ब्लैकमेलिंग और गैरकानूनी धन बनाने का साधन बन गया, जिसमें छिपे हुए एजेंडों के साथ भ्रष्ट राजनेताओं और व्यवसायियों (कॉरपोरेट) का हाथ था। यह उजागर होना चाहिए और यही इस पुस्तक का उद्देश्य है[4]

निष्कर्ष के तौर पर, एनडीटीवी के मालिकों ने एसएटी आदेश पर अंतरिम रोक (स्टे) के लिए उनके द्वारा पेश किए जा रहे जमा के बारे में सर्वोच्च न्यायालय से महत्वपूर्ण तथ्य और जानकारी छिपाई है। वे भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सामने चालबाजी और झूठे बयान देने का प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में, भले ही एक समाचार प्रसारणकर्ता के रूप में सीबीआई, ईडी, आयकर के मामले लंबित न हों, तब भी वे इन शेयरों की पेशकश नहीं कर सकते हैं, उन्हें किसी भी तीसरे पक्ष को शामिल करने से पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गृह मंत्रालय से विशिष्ट अनुमति की आवश्यकता होगी।

आशा है कि सेबी, आयकर विभाग इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और प्रणय रॉय और पत्नी द्वारा संदिग्ध प्रस्ताव पर सर्वोच्च न्यायालय को सतर्क करेंगे और रॉय दंपत्ती को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (एसएटी) में 50 प्रतिशत सुरक्षा के रूप में व्यक्तिगत संपत्ति जमा करने के लिए मजबूर करेंगे। पत्रकारिता की आड़ में कोई भी कानून के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता है। लूटेरों और कर चोरों को सबक सिखाया जाना चाहिए। कानून सब से ऊपर है।

संदर्भ:

[1] Prannoy Roy & Radhika Roy Offer NDTV Shares As Security For SEBI Penalty; Supreme Court Seeks Statement Of Share ValueJan 28, 2021, Live Law

[2] Big Blow to NDTV: IT Dept seizes Shell Company of Prannoy Roy Stakeholder in NDTVOct 27, 2017, PGurus.com

[3] Are Roys the benami owners of NDTV? Is Reliance Industries in Control?Mar 12, 2018, PGurus.com

[4] NDTV Frauds: A classic example of breaking of law by Indian Media Houses – Amazon.in

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