अयोध्या मामला: कोर्ट ने वकीलों से दलीलें पूरी करने के लिए संभावित समय निर्धारित करने को कहा; कहा कि वे जानना चाहते है कि निर्णय लिखने के लिए कितना समय बचा है

अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न पक्षों से अपने तर्क की समयसीमा प्रस्तुत करने के लिए कहा है ताकि वह निर्णय लिखने के लिए उपलब्ध समय का अनुमान लगा सकें।

0
569
अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न पक्षों से अपने तर्क की समयसीमा प्रस्तुत करने के लिए कहा है ताकि वह निर्णय लिखने के लिए उपलब्ध समय का अनुमान लगा सकें।
अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न पक्षों से अपने तर्क की समयसीमा प्रस्तुत करने के लिए कहा है ताकि वह निर्णय लिखने के लिए उपलब्ध समय का अनुमान लगा सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अयोध्या मामले में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं से कहा कि वे अपने तर्कों के निराकरण करने के लिए संभावित “समय अनुसूची” के बारे में सूचित करें। दोपहर में, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5-न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ, सुनवाई के 25 वें दिन को फिर से इकट्ठी हुई और मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन से पूछा कि वे विवाद की समाप्ति का समय निर्धारित करें। यह कहते हुए कि इससे अदालत  यह निर्णय ले सकेगी कि फैसला लिखने के लिए कितना समय बचा है।

सीजेआई, जो इस साल 17 नवंबर को कार्यालय छोड़ देंगे, ने धवन को अपने सहयोगियों के साथ बैठकर निर्णय लेने और शीर्ष अदालत को सूचित करने के लिए कहा कि वे तर्कों के निराकरण करने के लिए कितने दिन लेंगे। न्यायमूर्ति एसए बोबडे, डी वाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एसए नाज़ेर की सदस्यता वाली पीठ ने धवन को अन्य पक्षों के वकीलों से सलाह लेने के लिए भी कहा।

धवन ने 8 वें दिन सुन्नी वक्फ बोर्ड और मूल मुकदमेबाज एम सिद्दीक सहित अन्य के लिए बहस करते हुए कहा कि वह भी इस मामले में जल्द फैसला चाहते हैं और वह प्रस्तुतियों को तेजी आगे बढ़ाएंगे। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि उन्हें समय-सूची की जानकारी है, तो “हमें पता चल जाएगा कि हमारे पास निर्णय लिखने में कितना समय है”। तब वरिष्ठ वकील ने तब कहा कि अदालत उन्हें इस शुक्रवार, हफ्ते के मध्य छुट्टी देने पर विचार करे। पीठ ने कहा कि वह अवकाश ले सकते हैं, लेकिन मुस्लिम पक्ष के अन्य वकील शुक्रवार को प्रस्तुतियां दे सकते हैं।

धवन ने कहा, “मैं अपने तर्क को रोकना नहीं चाहता हूं,” उन्होंने कहा कि उनके पास एक कार्य-क्रम है और वे तर्कों की गति के प्रति सचेत हैं। पीठ ने कहा कि धवन को अवकाश की जरूरत हो सकती है, लेकिन उनकी “युवा टीम” सक्षम है और वह कड़ी मेहनत करना चाहेगी।

जब जब अयोध्या मामले को सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ताओं ने उठाया, धवन इस प्रक्रिया में देरी करने के लिए कई मांगों, आरोपों के साथ सामने आ रहे थे। 2017 में, कपिल सिब्बल के साथ, धवन तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के समक्ष नाटक कर रहे थे।

शाम को, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मध्यस्थता समिति को पत्र लिखकर दावा किया कि वे फिर से मध्यस्थता पर विचार कर रहे हैं। इस कदम को प्रक्रिया में देरी करने के लिए की जा रही एक चाल के रूप में देखा जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.