क्या भ्रष्ट चिदंबरम का समय समाप्त हो रहा है? दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया मामले में अंतरिम संरक्षण पर आदेश सुरक्षित रखा

आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा चिदंबरम के अग्रिम जमानत पर आदेश सुरक्षित रखे गए हैं। क्या अंत निकट है?

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आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा चिदंबरम के अग्रिम जमानत पर आदेश सुरक्षित रखे गए हैं। क्या अंत निकट है?
आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा चिदंबरम के अग्रिम जमानत पर आदेश सुरक्षित रखे गए हैं। क्या अंत निकट है?

उम्मीद है कि जल्द ही सीबीआई और ईडी आईएनएक्स मीडिया मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल करेंगे, इस उम्मीद में कि उन्हें दागी पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम से हिरासत में पूछताछ का मौका मिलेगा।

अंत निकट है?

आईएनएक्स मीडिया रिश्वत मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए भ्रष्ट पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की तरकीबें शुक्रवार के बाद खत्म होती दिख रही है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत की उनकी याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिए हैं। 28 फरवरी, 2018 को अपने बेटे कार्ति की गिरफ्तारी के तुरंत बाद खतरे को भांपते हुए, चिदंबरम ने दिल्ली उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्राप्त किया और पिछले 10 महीनों से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अपने दल के वरिष्ठ कानूनी सहयोगियों कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी द्वारा सहायता प्राप्त करके रणनीतियों के साथ, रोक रहा है।

सीबीआई और ईडी ने “निष्कासित और झूठ बोलने वाले” चिदंबरम को गिरफ्तार करने की अपनी आवश्यकता को दोहराया, दागी पूर्व मंत्री के वकीलों द्वारा 10 महीने तक की गयी लंबी दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सुनील गौड़ ने आदेश आरक्षित रखे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जाहिरा तौर पर मामले में पांच आरोपी हैं और उनमें से चार – कार्ति चिदंबरम, भास्कर रमन (चिदंबरम का परिवारिक चार्टर्ड अकाउंटेंट), इंद्राणी और पीटर मुखर्जी – इस मामले में जमानत पर हैं।

आईएनएक्स मीडिया: एक स्पष्ट मामला

आईएनएक्स मीडिया मामला एक बहुत स्पष्ट मामला है। संक्षेप में यह इस प्रकार है: 2007 में, आईएनएक्स मीडिया, जिसका स्वामित्व उस समय अब जेल में बंद हत्या के आरोपी दंपति इंद्राणी और पीटर मुखर्जी के पास था, को सिर्फ 5 करोड़ रुपये में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी मिली। लेकिन उन्होंने विदेशी फर्मों से अवैध रूप से रु 305 करोड़ स्वीकार किए और आयकर (आईटी) विभाग द्वारा पकड़े गए। आयकर अधिकारियों ने पति और पत्नी पर जुर्माना लगाया और उन्हें 2008 में बुलवाया। आयकर विभाग से उन्हें बचाने के लिए, इंद्राणी और पीटर ने कार्ति और चिदंबरम से मुलाकात की और कार्ति की फर्मों एडवांटेज कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और चेस मैनेजमेंट कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, जिन्हें पहले ही एयरसेल-मैक्सिस घोटाले में रिश्वत के पैसे अनुमार्गण करने के लिए पकड़ा गया था, के माध्यम से लगभग 5 करोड़ रुपये की रिश्वत का भुगतान किया। बेटे द्वारा रिश्वत लेने के बाद, पिता सक्रिय हुए और आईएनएक्स मीडिया को अवैध कार्योत्तर मंजूरी दी और उन्हें आयकर विभाग की कार्यवाहियों से बचा लिया।

आईएनएक्स मीडिया मामला एयरसेल-मैक्सिस घोटाले जाँच की उप-शाखा है। ईडी के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह ने दिसंबर 2015 में कार्ति के घर और कंपनियों पर छापा मारते हुए आईएनएक्स मीडिया एफआईपीबी निकासी उल्लंघन और अन्य समान उल्लंघनों का पता लगाया[1]। राजेश्वर सिंह ने कार्ति की फर्मों के सभी कंप्यूटर और हार्ड डिस्क को जब्त कर लिया और 14 देशों और 21 विदेशी बैंकों में चिदंबरम परिवार की अवैध संपत्ति को उजागर किया।

इसके बाद, मई 2017 में आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई द्वारा एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई और 28 फरवरी, 2018 को कार्ति को एक आश्चर्यजनक कदम में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके तुरंत बाद, चिदंबरम उच्च न्यायालय पहुंचे और गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्राप्त किया और यह मामला चिदंबरम की चौतरफा कानूनी रणनीतियों के कारण 10 महीने से पिछड़ रहा था।

सीबीआई और ईडी ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा कि आईएनएक्स मीडिया मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता थी क्योंकि वह पूछताछ के दौरान ठीक से जवाब नहीं दे रहे थे। दोनों जांच एजेंसियों ने कहा कि चिदंबरम, जिनके वित्त मंत्री के कार्यकाल के दौरान विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए एक मीडिया समूह को 2007 में रु 305 करोड़ प्राप्त करने के लिए एफआईपीबी मंजूरी दी गई थी, ने गलत उत्तर दिए और उस सामग्री का खुलासा नहीं किया जिसका उन्हें ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है जो गुणात्मक रूप से अलग होगी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई और ईडी का प्रतिनिधित्व करते हुए कांग्रेस नेता की अग्रिम जमानत याचिका का सख्त विरोध किया और तर्क दिया कि एजेंसियां अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए उन्हें गिरफ्तार करने, संबंधित अदालत के समक्ष पेश करने और उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लेना चाहती थी। “वह कपटपूर्ण है और उत्तर तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। मैंने एक मजबूत मामला बनाया है। न्याय के लिए, उन्हें हिरासत में रखने की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा।

चिदंबरम की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पूर्व मंत्री को जून 2018 में केवल एक बार सीबीआई द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया और प्राथमिकी में उन्हें आरोपी भी नहीं बनाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जाहिरा तौर पर मामले में पांच आरोपी हैं और उनमें से चार – कार्ति चिदंबरम, भास्कर रमन (चिदंबरम का परिवारिक चार्टर्ड अकाउंटेंट), इंद्राणी और पीटर मुखर्जी – इस मामले में जमानत पर हैं।

ईडी ने पहले से ही आईएनएक्स मीडिया मामले में नई दिल्ली, ऊटी, लंदन और स्पेन में कार्ति और उनकी फर्मों की 54 करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियों (बाजार मूल्य 300 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है) को पहले ही संलग्न कर दी है[2]

एयरसेल-मैक्सिस

इस बीच, एयरसेल-मैक्सिस मामले में, 2जी न्यायालय के न्यायाधीश ओपी सैनी ने अभी तक चिदंबरम और बेटे कार्ति को दी गई गिरफ्तारी से समान सुरक्षा के बारे में फैसला नहीं किया है। कानूनी मंडलियों में कई लोग को आश्चर्य हो रहा है कि एक ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश ने ऐसा संरक्षण कैसे दिया, वो भी मार्च 2018 में सर्वोच्च न्यायालय के सीबीआई और ईडी को छह महीने के भीतर एयरसेल-मैक्सिस मामले में जांच खत्म करने के सख्त निर्देश देने के कुछ ही दिनों बाद। दोनों एजेंसियों ने इस मामले में पहले ही आरोप पत्र दाखिल कर दिए है।

उम्मीद है कि जल्द ही सीबीआई और ईडी आईएनएक्स मीडिया मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल करेंगे, इस उम्मीद में कि उन्हें दागी पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम से हिरासत में पूछताछ का मौका मिलेगा। आशा है कि एजेंसियां दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के तुरंत बाद कार्रवाई में लगेंगी, जो शुक्रवार तक आरक्षित है।

References:

[1] ED searches Chidambaram son’s office in ChennaiDec 17, 2015, Indian Express

[2] ED attaches Rs.54 crores worth assets of Karti Chidambaram in the INX Media bribery caseOct 11, 2018, PGurus.com

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