सुब्रमण्यम स्वामी ने आग्रह किया कि ‘जन गण मन’ के शब्दों को नेताजी के आईएनए संस्करण से बदला जाए!

सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी से राष्ट्रगान 'जन गण मन' के शब्दों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 'जन गण मन' के साथ बदलने का आग्रह किया!

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सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी से राष्ट्रगान 'जन गण मन' के शब्दों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 'जन गण मन' के साथ बदलने का आग्रह किया!
सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी से राष्ट्रगान 'जन गण मन' के शब्दों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 'जन गण मन' के साथ बदलने का आग्रह किया!

सुभाष चंद्र बोस ने गाने को विजयी गीत बनाने के लिए कुछ शब्दों को बदल दिया था!

एक लंबे समय से चली आ रही मांग को उठाते हुए, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रगान ‘जन गण मन‘ के शब्दों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) द्वारा 1943 में रचित एवं गाये गए ‘जन गण मन’ के साथ बदले जाने का आग्रह किया। अपने दो पन्नों के पत्र में, स्वामी ने कहा कि यह 1949 में संविधान सभा में राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा दिया गया आश्वासन था।

“यह पत्र आपके ध्यान में ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के शासन से भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने और बलिदान करने वाले देशभक्तों के लिए एक उत्कृष्ट मांग लाने के लिए है। यह भारत के युवाओं के एक विशाल जन समूह की मांग है, कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ में कुछ शब्दों को 21 अक्टूबर, 1943 को, नेताजी की अगुआई वाली मणिपुर की राजधानी इम्फाल पर कब्जा करने के बाद, भारत की स्वतंत्रता की घोषणा के अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) द्वारा रचित और गाये गए ‘जन गण मन’ से बदल दिया जाए। राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ में वर्तमान शब्द रबींद्र नाथ टैगोर द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द हैं, जिनमें से कुछ अनावश्यक संदेह उठाते हैं, कि आखिर कविता में किसे संबोधित किया गया था। यह 1947 के बाद के स्वतंत्र भारत के संदर्भ में भी अनुचित है। उदाहरण के लिए, सिंध का संदर्भ राष्ट्रगान के शब्दों में है। इसलिए आईएनए के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निर्देशन में तैयार किए गए ‘जन गण मन’ के शब्द स्वतंत्र भारत के लिए सबसे उपयुक्त हैं।”

रवीन्द्र नाथ टैगोर के ‘जन गण मन’ को विवादों का सामना करना पड़ रहा था कि यह 1911 में किंग जॉर्ज पंचम के भारत आने पर उनकी प्रशंसा करने के लिए एक स्वागत गीत था। ‘अधिनायक’ शब्द उनकी प्रशंसा में गढ़ा गया शब्द था और कई लोगों का तर्क था कि इसे बदल दिया जाना चाहिए।

“आप यह भी जानते होंगे कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 26 नवंबर, 1949 को अपनी समापन टिप्पणी में घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ (और वंदे मातरम) को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा दिया गया है। लेकिन डॉ प्रसाद ने यह भी कहा था कि ‘जन गण मन’ में शब्दों को संशोधित किया जा सकता है या भविष्य में अन्य उपयुक्त शब्दों के साथ बदला भी जा सकता है। इसलिए ‘जन गण मन’ के शब्दों में संशोधन करने की अनुमति को संविधान सभा की कार्यवाही का हिस्सा बनाया गया।”

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा – “इसलिए ‘जन गण मन’ में कुछ शब्दों में बदलाव करने के लिए कोई रोक नहीं है। मुझे आशा है कि यह संभव है कि 26 जनवरी, 2021 को सरकार वर्तमान ‘जन गण मन’ के शब्दों को नेताजी के वसीयत के तौर पर 21 अक्टूबर, 1943 को रचित और गाये गए ‘जन गण मन’ से बदल देगी। 21 अक्टूबर 1943 वह दिन था, जिस दिन ब्रिटिश साम्राज्यवादी सैनिकों को भारतीय क्षेत्र के हिस्से यानी मणिपुर से आईएनए द्वारा निष्कासित कर दिया गया था।”

रवीन्द्र नाथ टैगोर के ‘जन गण मन’ को विवादों का सामना करना पड़ रहा था कि यह 1911 में किंग जॉर्ज पंचम के भारत आने पर उनकी प्रशंसा करने के लिए एक स्वागत गीत था। ‘अधिनायक’ शब्द उनकी प्रशंसा में गढ़ा गया शब्द था और कई लोगों का तर्क था कि इसे बदल दिया जाना चाहिए। इसके अलावा सिंध अब भारत का हिस्सा नहीं है। 1943 में सुभाष चंद्र बोस ने गाने को विजयी गीत बनाने के लिए कुछ शब्दों में बदलाव किया था।

यह नेताजी द्वारा 1943 में बदलाव कर रचा गया गीत है:

नेताजी के आईएनए गीत के बोल नीचे दिए गए हैं:

शुभ सुख चैन की बरखा बरसे, भारत भाग है जागा।
पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंगा,
चंचल सागर, विंध्य, हिमालय, नीला जमुना, गंगा।
तेरे नित गुन गायें, तुझसे जीवन पायें,
हर तन पावे आशा।
सूरज बन कर जग पर चमके, भारत नाम सुभागा,
जय हो! जय हो! जय हो! जय, जय, जय, जय हो।

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