पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने श्रीलंकाई व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या को जायज ठहराया

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री परवेज खट्टक श्रीलंकाई प्रबंधक प्रियंता कुमारा की हत्या को जायज ठहरा रहे हैं, जिनकी शुक्रवार को सियालकोट में एक उन्मादी भीड़ ने बेरहमी से हत्या कर दी

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पाकिस्तान रक्षामंत्री ने श्रीलंकाई नागरिक की मोब लिंचिंग को जायज ठहराया
पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने श्रीलंकाई नागरिक की मोब लिंचिंग को जायज ठहराया

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान पाकिस्तान सरकार की ओछी सोच को प्रकट करता है!

पाकिस्तान के सियालकोट मोब लिंचिंग में 3 दिसंबर को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट पीटकर मौत के घाट उतार दिए गए श्रीलंकाई नागरिक प्रियंता कुमारा की हत्या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को आईना दिखाने का काम कर रही है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का निर्लज्ज बयान निश्चित तौर पर निंदा योग्य है।

जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दुनिया को आश्वस्त कर रहे हैं कि अपराधियों को सजा दी जाएगी, वहीं उनके रक्षा मंत्री परवेज खट्टक श्रीलंकाई प्रबंधक प्रियंता कुमारा की हत्या को जायज ठहरा रहे हैं, जिनकी शुक्रवार को सियालकोट में एक उन्मादी भीड़ ने बेरहमी से हत्या कर दी। इमरान खान के शीर्ष मंत्री खट्टक ने लिंचिंग को सही ठहराते हुए कहा कि यह ‘गुस्साए नौजवानों का काम था जो धार्मिक भावनाओं से बह गए थे’।

खट्टक ने मीडिया से कहा, “जब धर्म की बात आती है तो मैं भी उत्तेजित हो सकता हूं और गलत कर सकता हूं।” उन्होंने कहा, “सरकार को दोष देने के बजाय यह मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को ये समझाए।” खट्टक ने कहा कि जुनून में लड़के ऐसी चीजें करते हैं, जिसका मतलब यह नहीं है कि चीजें खराब हैं।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा रविवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को अवगत कराने के बाद आया था कि यह क्रूर कार्य ‘हमारे देश का गुस्सा और शर्म’ था। उन्होंने राजपक्षे को आश्वासन दिया था कि ‘न्याय किया जाएगा’।

खान ने ट्वीट किया था, “आज संयुक्त अरब अमीरात में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से बात की और सियालकोट में प्रियंता दियावदाना की हत्या पर श्रीलंका के लोगों को हमारे देश के गुस्से और शर्म से अवगत कराया।”

पाकिस्तान श्रीलंका से नेत्रदान का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है, 1967 से कम से कम 35,000 कॉर्निया प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान के एक प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ नियाज ब्रोही ने समा न्यूज को बताया, “श्रीलंकाइयों ने हमें 35,000 आंखें दान कीं, लेकिन हमने विजन खो दिया।”

जिस समय क्रूर हमला हो रहा था, उस समय कारखाने में कुल 13 सुरक्षा गार्ड मौजूद थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनमें से किसी ने भी पीड़ित को बचाने या भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश नहीं की थी। कुमारा के शव को बाद में कारखाने के बाहर घसीटा गया और जला दिया गया था।

[आईएएनएस इनपुट के साथ]

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