श्री मोदी, किसान हलचल को हल करने का एक सरल तरीका है!

जबकि सभी जानते हैं कि किसानों का ये उपद्रव किसानों द्वारा नहीं किया जा रहा है, लेकिन कोई नहीं जानता कि इसे हल कैसे किया जाए। यहाँ एक आसान उपाय है।

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जबकि सभी जानते हैं कि किसानों का ये उपद्रव किसानों द्वारा नहीं किया जा रहा है, लेकिन कोई नहीं जानता कि इसे हल कैसे किया जाए। यहाँ एक आसान उपाय है।
जबकि सभी जानते हैं कि किसानों का ये उपद्रव किसानों द्वारा नहीं किया जा रहा है, लेकिन कोई नहीं जानता कि इसे हल कैसे किया जाए। यहाँ एक आसान उपाय है।

श्री मोदी अब कार्रवाई का समय है!

आपको बस छह लोगों को कैद में डाल देना है – बस इतना ही। सिर्फ छह लोग, और यह उपद्रव शांत हो जायेगा। आप पूछेंगे, ये छह लोग कौन हैं? ये सभी भारत के लिए एक शाप ‘हवाला-नारकोटिक्स’ व्यापार में शामिल लोग हैं। ये जाहिल तत्व तबाही मचा रहे हैं और आप किसानों के साथ कितनी भी बार मिलें, वे उपद्रव को खत्म करने के लिए कभी सहमत नहीं होंगे। क्योंकि वे किसान नहीं हैं। अब कार्रवाई का समय है।

यहां कुछ संकेत दिए गए हैं – इस छह सदस्यों वाले गुट में से एक इस समय लंदन में और दूसरा दुबई में है, जो किसान आंदोलन के अगले चरण के घटनाक्रम को पड़ोसी देश (कुछ कहते हैं चाइना का २४वां राज्य) के विफल राज्य तंत्र के साथ मिलकर समायोजन कर रहा है। आपके काबिल अधिकारी इन संकेतों के साथ आपको इस उपद्रव के पीछे के लोगों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। यदि आप कार्यवाही नहीं करते हैं, तो यह और ऐसे कई अन्य उपद्रव अचानक से फूट पड़ेंगे। यह गैर-परंपरागत ढंग से सोचने का समय है।

चावल और गेहूं का उत्पादन करने पर सरकार पंजाब के किसानों को सब्सिडी देती है। लेकिन इनकी मांग उतनी नहीं है जितनी पहले हुआ करती थी, इसलिए सरकार मजबूरी में इसे किसान से ऊंचे दामों पर खरीदने और उसे सड़ने के लिए छोड़ देती है।

छह का यह गिरोह उपद्रव क्यों मचा रहा है?

यह आसान है। यदि किसान अचानक अपनी उपज किसी भी खरीदार को बेचने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं, तो बड़ा नुकसान किसका होगा? और किसको अब कृषि उपज से प्राप्त पूरी आय की घोषणा करने की आवश्यकता होगी, क्योंकि कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) के सभी सदस्यों को अब अपने जीएसटी और पैन नंबर विवरण का खुलासा करना होगा? अब तक, वे कर चोरी करके बच निकलते थे, लेकिन अब वे ऐसा नहीं कर सकते।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

छह में से कई गिरोह ऐग्रिकल्चर प्रोडूस फॉरवर्ड मार्केट्स में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, आलू और प्याज जैसी वस्तुओं की जमाखोरी कर रहे हैं, कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं, कीमतों को बढ़ा रहे हैं और फिर पैसा बना रहे हैं। यह पैसा दो तरह से आता है:

  • सामानों की बढ़ी हुई बिक्री की कीमतों से आती है।
  • वायदा कीमतों से जो कमोडिटीज बाजारों से आती है।

चावल और गेहूं का उत्पादन करने पर सरकार पंजाब के किसानों को सब्सिडी देती है। लेकिन इनकी मांग उतनी नहीं है जितनी पहले हुआ करती थी, इसलिए सरकार मजबूरी में इसे किसान से ऊंचे दामों पर खरीदने और उसे सड़ने के लिए छोड़ देती है (अक्सर यह गोदामों में सड़ता है, जहां यह चूहों और अन्य कीड़े मकोड़ों के लिए चारा बन जाता है)। इन अनाजों के पारंपरिक उपभोक्ताओं, दक्षिणी राज्यों को अब उस तरह की जरूरत नहीं लगती है जैसी पहले थी। जब जीएसटी अखिल भारतीय है, तो किसान को क्या उगाना है, यह भी एक अखिल-भारतीय दृष्टिकोण होना चाहिए, इसलिए किसान को रोपण से पहले यह पता होना चाहिए कि किस तरह की फसल को उसकी उपज का सर्वोत्तम मूल्य मिलेगा। सरकार किसान की मदद कर सकती है और करेगी।

समाप्ति के लिए, भारत ने कुछ बाबुओं की चिंता (या फिर चुनावी चिंता?) कि यह देश में कीमतों को बढ़ायेगा, के कारण कृषि निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया[1]। फलस्वरूप, एक बड़ा तूफान खड़ा है!

एक और संकेत – छह के इस गिरोह के कुछ सदस्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के बड़े कर्जदार हैं।

इस सांठगांठ में सेंध लगाएं और आप इन सारे उपद्रवों से स्वतंत्र होंगे।

संदर्भ:

[1] India’s Onion Export Ban Goes Against the Spirit of Recent Agricultural ReformSep 20, 2020, The Wire

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