केरल पुलिस ने डीआरडीओ के फर्जी पहचान पत्र का उपयोग करने और दिल्ली में लोगों को बेवकूफ बनाने वाले एक जालसाज को पकड़ा

केरल पुलिस द्वारा डीआरडीओ कर्मचारी के रूप में खुद को बताने वाले एक नौंवी फेल जालसाज को धोखाधड़ी, हेराफेरी और गबन के आरोपों में पकड़ा।

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केरल पुलिस द्वारा डीआरडीओ कर्मचारी के रूप में खुद को बताने वाले एक नौंवी फेल जालसाज को धोखाधड़ी, हेराफेरी और गबन के आरोपों में पकड़ा।
केरल पुलिस द्वारा डीआरडीओ कर्मचारी के रूप में खुद को बताने वाले एक नौंवी फेल जालसाज को धोखाधड़ी, हेराफेरी और गबन के आरोपों में पकड़ा।

कोई भी दल सत्ता में हो, इनकी परवाह किये बिना सत्ता के गलियारों में कई दलालों और धोखेबाजों को देखा जा सकता है। ऐसा ही एक दिलचस्प और चौंकाने वाला मामला है दिल्ली में सक्रिय एक दलाल अरुण रवेन्द्रन की गिरफ्तारी का, जिसे केरल पुलिस ने पकड़ लिया। वह केरल का मूल निवासी है। चौंकाने वाली बात यह थी कि यह अरुण रवींद्रन दिल्ली में कुछ मंत्रियों और मीडिया के कार्यालयों में देखा जाता था और संवेदनशील रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) में एक वैज्ञानिक के रूप में जाना जाता था। अब केरल पुलिस ने पाया कि यह धोखेबाज नौवीं फेल था और नकली डीआरडीओ पहचान पत्र का उपयोग करके लोगों को बेवकूफ बना रहा था और अब केरल के कोझीकोड जिले में अपने नगर जेल गृह में सड़ रहा है।

जिन परिस्थितियों के कारण उसकी गिरफ्तारी हुई, वे हास्यास्पद हैं। अरुण रवींद्रन (36) जिसने एक साल पहले डीआरडीओ साइंटिस्ट होने का दावा करते हुए शादी की, फिर अपनी पत्नी से झगड़ा किया और दिल्ली आ गया। अपने पति के साथ संपर्क न हो पाने पर, उसकी पत्नी ने अपने पति के फरार होने के बारे में डीआरडीओ को लिखा, उसका पति उसके सोने के पूरे गहनों के साथ भागा, जिनकी कीमत कई लाख रुपये (जो उसे दहेज के रूप में मिले थे) है। उसने फरार पति के बारे में केरल पुलिस से भी शिकायत की। दिल्ली में डीआरडीओ मुख्यालय ने केरल पुलिस को सूचित किया कि उनके पास ऐसा कोई कर्मचारी नहीं है।

केरल पुलिस ने अरुण रवींद्रन द्वारा बनाए गए डीआरडीओ के फर्जी पहचान पत्र और यहाँ तक कि संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) के फर्जी कॉल लैटर्स भी उसके घर पर छापे के दौरान जब्त किए हैं।

तब केरल पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और 21 मई को अरुण रवेन्द्रन को गिरफ्तार कर लिया और अचानक से पूरा मामला साफ हुआ! जब स्थानीय मीडिया में यह खबर सामने आई, तो कई लोगों ने शिकायतें दर्ज कराईं कि इस जालसाज ने उनसे दिल्ली में नौकरी, निविदाएं और कार्य कराने का वादा कर पैसे ऐंठे हैं। कई लोगों ने पुलिस से शिकायत की कि उन्होंने उसे केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन के कार्यालय और सत्तारूढ़ दल भाजपा के कार्यालय और यहां तक कि आरएसएस कार्यालयों में भी देखा है और केरल के कई नेता जो दिल्ली में हैं, उनके आसपास देखा है। पुलिस के अनुसार, अरुण रवींद्रन एक विशिष्ट जालसाज है जो सत्ता के हलकों और सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यालयों में लगातार काम कराने के लिए चक्कर लगाता है और लोगों से पैसे वसूलता है।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

केरल पुलिस ने अरुण रवींद्रन द्वारा बनाए गए डीआरडीओ के फर्जी पहचान पत्र और यहाँ तक कि संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) के फर्जी कॉल लैटर्स भी उसके घर पर छापे के दौरान जब्त किए हैं। उसके पास में कई संगठनों के कई लेटर पैड भी मिले। उसके पास से दिल्ली के कई सरकारी संस्थाओं के प्रवेश पत्र भी बरामद किए गए। उसे दिल्ली में कई मीडियाकर्मियों के साथ भी देखा गया था और उप राष्ट्रपति के घर, सांसदों के क्वार्टर पर भी देखा गया था। वह डिफेंस कैंटीन से शराब की बोतल की बिक्री में शामिल पाया गया था।

केरल में कई कांग्रेस और सीपीएम नेताओं ने मांग की कि केंद्रीय एजेंसियों को भी इस धोखाधड़ी के मामले में संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि उसकी मुख्य गतिविधि दिल्ली में थी। वर्तमान में, वह पत्नी को धोखा देने, फर्जी पहचान पत्र बनाने और नौकरी देने के बहाने लोगों को बेवकूफ बनाने आदि के आरोपों में केरल की कोझिकोड जेल में मई के आखिरी सप्ताह से सड़ रहा है।

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