गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन के दुष्कर्मों की जांच के लिए एक जांच दल बनाया। राहुल की ब्रिटिश नागरिकता मामले में गति बढ़ाई जाए: स्वामी

एमएचए ने कार्यवाही की, राजीव गांधी फाउंडेशन की धोखाधड़ियों की जांच के लिए एक अंतर-विभागीय समिति बनाई

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एमएचए ने कार्यवाही की, राजीव गांधी फाउंडेशन की धोखाधड़ियों की जांच के लिए एक अंतर-विभागीय समिति बनाई
एमएचए ने कार्यवाही की, राजीव गांधी फाउंडेशन की धोखाधड़ियों की जांच के लिए एक अंतर-विभागीय समिति बनाई

सोनिया गांधी और परिवार पर सीधा हमला करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने बुधवार को राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ), राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट (आरजीसीटी) और इंदिरा मेमोरियल ट्रस्ट पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), विदेशी दान और आयकर चोरी के आरोपों की जांच के लिए एक अंतर-मंत्रालयीय जांच दल का गठन किया। उच्च पदस्थ अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय भी आरजीएफ द्वारा किये गए भूमि आवंटन के दुरुपयोग की जांच कर रहा है, आरजीएफ को सोनिया, राहुल और प्रियंका द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस पिछले दो सप्ताह से आरजीएफ में चीनी फंडिंग (दान) और भारत-चीनी सीमा झगड़े के बाद आरजीएफ के खिलाफ लड़ाई में व्यस्त थे।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में एक विशेष निदेशक अंतर-मंत्रालयी टीम के प्रमुख होंगे। प्रवक्ता ने कहा – “गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा पीएमएलए, आयकर अधिनियम, एफसीआरए आदि के विभिन्न कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन की जांच के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है। समिति के प्रमुख प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के विशेष निदेशक होंगे।”

1991 से, कांग्रेस पार्टी को आवंटित भूमि पर कब्जा कर सोनिया गांधी और परिवार राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना करके जवाहर भवन का उपभोग कर रहे थे। फाउंडेशन की अध्यक्षता सोनिया गांधी कर रही हैं।

राजीव गांधी फाउंडेशन रायसीना रोड पर काम कर रहा है, जिस जगह को वास्तव में कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की शताब्दी में 1988 में जवाहर भवन के रूप में मुख्यालय बनाने के लिए आवंटित किया गया था। लेकिन 1991 के बाद, हालांकि इमारत (जवाहर भवन) का निर्माण किया गया था, इसे सोनिया गांधी और परिवार के सदस्यों की अध्यक्षता में राजीव गांधी फाउंडेशन के कार्यालय में बदल दिया गया। शहरी विकास मंत्रालय ने इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भूमि और विकास विभाग (एल एंड डीओ) से रिपोर्ट मांगी है, जिससे नई दिल्ली में प्रमुख क्षेत्र से आरजीएफ का निष्कासन हो सकता है।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

इस कार्यवाही पर प्रतिक्रिया देते हुए, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी, जिन्होंने 2015 में आरजीएफ द्वारा अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि और भवन को जब्त करने की मांग करते हुए शिकायत दर्ज की थी, कहा कि एमएचए को जांच की गति तेज करनी चाहिए और राहुल गांधी को उनकी ब्रिटिश नागरिकता पर कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए।

अप्रैल 2019 के अंतिम सप्ताह में स्वामी की शिकायत पर गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी को नोटिस जारी किया और उसके बाद कुछ भी नहीं हुआ[1]

1991 से, कांग्रेस पार्टी को आवंटित भूमि पर कब्जा कर सोनिया गांधी और परिवार राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना करके जवाहर भवन का उपभोग कर रहे थे। फाउंडेशन की अध्यक्षता सोनिया गांधी कर रही हैं। अन्य ट्रस्टियों में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पूर्व योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, सुमन दुबे, शिक्षाविद अशोक गांगुली और उद्योगपति संजीव गोयनका शामिल हैं[2]

संदर्भ:

[1] गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिकता रखने के लिए नोटिस जारी कियाApr 30, 2019, hindi.pgurus.com

[2] सरकार को राजीव गांधी फाउंडेशन द्वारा अवैध रूप से ली गयी गई भूमि और इस्तेमाल किये गए भवन को वापस लेना चाहिए : सुब्रमण्यम स्वामीJun 26, 2020, hindi.pgurus.com

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