बार काउंसिल ने आरोपी चिदंबरम और पत्नी द्वारा वरिष्ठ वकील के पद के दुरुपयोग की शिकायत की जांच के लिए एक पैनल बनाया

    बीसीआई ने प्रसिद्ध पत्रकार जे गोपीकृष्णन द्वारा चिदंबरम के खिलाफ की गई शिकायत से निपटने के लिए एक जांच समिति का गठन किया है।

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    बार काउंसिल ने आरोपी चिदंबरम और पत्नी द्वारा वरिष्ठ वकील के पद के दुरुपयोग की शिकायत की जांच के लिए एक पैनल बनाया
    बार काउंसिल ने आरोपी चिदंबरम और पत्नी द्वारा वरिष्ठ वकील के पद के दुरुपयोग की शिकायत की जांच के लिए एक पैनल बनाया

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनकी पत्नी नलिनी चिदंबरम द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता पद का दुरुपयोग किये जाने के खिलाफ शिकायत की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया। रविवार को बीसीआई की सामान्य परिषद की बैठक ने इस मामले पर चर्चा की और बीसीआई के सह-अध्यक्ष एस प्रभाकरन की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। समिति के अन्य सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता वेद शर्मा, शैलेंद्र दुबे और श्रीमाली हैं। बीसीआई ने चार सदस्यीय समिति को चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है [1]

    बीसीआई का यह कदम जनवरी में भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पायनियर अखबार के जाने माने पत्रकार जे गोपीकृष्णन द्वारा दर्ज की गई शिकायत के बाद आया है। जून में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से पत्रकार की शिकायत की जांच करने को कहा था।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को एक विस्तृत शिकायत में, पत्रकार ने कहा कि दोनों पति-पत्नी कई मामलों में आरोपी हैं और अदालत द्वारा दिए गए वरिष्ठ अधिवक्ता पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। गोपीकृष्णन ने अपनी याचिका में कहा कि चिदंबरम सुनवाई अदालत में अपने वरिष्ठ अधिवक्ता के कपड़े पहनकर आरोपी के रूप में पेश हुए। इस शिकायत में विस्तृत रूप से लिखा है कि कैसे कई मामलों के आरोपी पति-पत्नी के लिए अदालतें कितनी उदार हैं।

    “श्री पी चिदंबरम और उनकी पत्नी श्रीमती नलिनी चिदंबरम भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई वरिष्ठ अधिवक्ता की उपाधि धारण करते हैं। अब दोनों व्यक्तियों पर सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग द्वारा विभिन्न भ्रष्टाचार, काले धन को वैध बनाने और काले धन को रखने से संबंधित मामलों में आरोप-पत्र दायर किये गए हैं।

    11 जनवरी, 2019 को, श्री चिदंबरम, जो एयरसेल-मैक्सिस मामले में एक अभियुक्त हैं, सुनवाई अदालत (2 जी कोर्ट) में वरिष्ठ अधिवक्ता की पोशाक में दिखाई दिए, जब उनके वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी अग्रिम जमानत अर्जी पर बहस कर रहे थे, जिसको केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा चुनौती दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता उपाधि रखने वाले व्यक्ति के लिए यह अनैतिक है कि वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पोशाक में सुनवाई अदालत में पेश हो, जहां वह अभियुक्त है। यहां चिदंबरम एक आरोपी के रूप में पेश हुए, जबकि उनके वकील उनके लिए बहस कर रहे थे। जब उन्हें अभियुक्त के रूप में आरोपित किया गया तो उन्हें सामान्य पोशाक में आना चाहिए था। यह एक अभियुक्त द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता पद रखने का एक स्पष्ट दुरुपयोग है, जो अभियुक्त भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोपित है। मैं सुनवाई अदालत में मौजूद भी था और टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित कई वीडियो हैं, जिसमें दिखाया गया है कि चिदंबरम एक वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम की पोशाक पहने सुनवाई अदालत में आ रहे हैं,” – पत्रकार ने कहा। इस लेख के अंत में विस्तृत शिकायत प्रकाशित की गई है।

    इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

    शिकायत में यह भी बताया गया है कि 2 जी कोर्ट के जज ओ पी सैनी चिदंबरम का कैसे पक्षपात कर रहे थे और कैसे मद्रास हाईकोर्ट नलिनी चिदंबरम की मदद कर रहा था। इसमें आईएनएक्स मीडिया रिश्वत मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय पर भी चिदंबरम पर मेहरबानी करने का आरोप लगाया गया। “भारत के सम्मानित मुख्य न्यायाधीश, न्यायालयों से इस तरह के परोपकार एक आम नागरिक के लिए अपेक्षित है?” उन्होंने यह भी मांग की: “सभी वरिष्ठ अधिवक्ता नामित व्यक्तियों से उनके खिलाफ किसी भी मामले के बारे में, यदि कोई हो और अगर कोई मामला है जो प्रकृति में गंभीर हैं, तो एक वार्षिक हलफनामा लागू करें।”

    विस्तृत शिकायत नीचे प्रकाशित की गई है:

    Complaint to CJI on PC Senior Advocate Designation dtd Jan 16, 2019-page-001
    Complaint to CJI on PC Senior Advocate Designation dtd Jan 16, 2019-page-001
    https://www.pgurus.com/?attachment_id=55986

    सन्दर्भ :

    [1] Complaint against P Chidambaram and wife: BCI forms probe panelAug 11, 2019, The Times of India;

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