दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी को विदेश यात्रा की अनुमति दी। ध्यान दें कि सीबीआई ने पिछले 5 वर्षों से आरोप-पत्र दायर नहीं किया है

हालांकि सीबीआई के दो मामले मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित हैं, मोदी सरकार ने एनडीटीवी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच शुरू नहीं की है। ऐसा क्यों?

0
100
दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी को विदेश यात्रा की अनुमति दी
दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी को विदेश यात्रा की अनुमति दी

न्यायालय ने प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय को 1 अगस्त से 30 अगस्त के बीच विदेश यात्रा की अनुमति दी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एनडीटीवी के मालिक प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय को 1 अगस्त से 30 अगस्त के बीच विदेश यात्रा करने की अनुमति दी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 2017 और 2019 में दर्ज दो मामलों के कारण, तीन साल पहले लुक आउट नोटिस (एलओसी) जारी किया गया था और दोनों को मुंबई हवाई अड्डे से उतार दिया गया था। अपने 1 जून के आदेश में, उच्च न्यायालय ने यह भी देखा कि हालांकि दो मामले दर्ज किए गए थ लेकिन सीबीआई ने आरोप-पत्र दायर नहीं किया है।

रॉय को विदेश पर जाने की इजाजत देते हुए न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा – “दो जून, 2017 और 19 अगस्त, 2019 की दो प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एलओसी जारी किया गया था। न्यायालय ने गौर किया है कि हालांकि जांच जारी है, आज तक सीबीआई द्वारा कोई आरोप पत्र दायर नहीं किया गया है।” उच्च न्यायालय ने कहा कि उन्हें 30 अगस्त तक लौटना होगा और यात्रा टिकट और पूरा यात्रा कार्यक्रम न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के साथ साझा किया जाना चाहिए। प्रणॉय रॉय का प्रतिनिधित्व मोदी सरकार के पहले अटॉर्नी जनरल एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने किया।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़ें!

जून 2017 में, सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक से 375 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त करने और 2008 में बैंक को 48 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाने में हेरफेर के संबंध में प्रणॉय रॉय के घर पर छापा मारा था। सीबीआई ने पाया है कि इस पैसे का एक निश्चित हिस्सा रॉय दंपत्ति द्वारा दक्षिण अफ्रीका में एक हवेली बनाने के लिए लिया गया था। अगस्त 2019 में, सीबीआई ने प्रणॉय रॉय, उनकी पत्नी और एनडीटीवी के प्रबंध संपादक विक्रम चंद्रा के खिलाफ धन शोधन के लिए कई टैक्स हैवन में 38 से अधिक शेल (फर्जी) कंपनियों को चलाने के लिए एक और मामला दर्ज किया था।

हालांकि प्रणॉय रॉय से सीबीआई कई बार पूछताछ कर चुकी है, लेकिन आरोप-पत्र कभी दाखिल नहीं किया गया। यह हाल के दिनों में एजेंसी की सबसे विलंबित जांच मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीबीआई एनडीटीवी मामलों में धीमी गति से क्यों चल रही है? यह सर्वविदित है कि एनडीटीवी के अधिकांश शेयर 2009 से मुकेश अंबानी से संबंधित फर्मों के पास हैं। इस संदिग्ध कार्यवाही के लिए, प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी पर भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा जुर्माना लगाया गया था। हालांकि सीबीआई के दो मामले मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित हैं, मोदी सरकार ने एनडीटीवी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच शुरू नहीं की है। ऐसा क्यों?

2017 में पीगुरूज के प्रबंध संपादक श्री अय्यर ने एक विस्तृत पुस्तक – एनडीटीवी फ्रॉड प्रकाशित की थी। पत्रकारिता की आड़ में स्टॉक एक्सचेंज में हेराफेरी, और बैंकिंग धोखाधड़ी सहित मीडिया मालिकों की धोखाधड़ी का विवरण देने वाली यह पुस्तक यहां उपलब्ध है: [1]

संदर्भ:

[1] NDTV Frauds: A classic example of breaking of Law by Indian Media HousesAmazon.in

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.