311 भारतीयों की मेक्सिको से वापसी, न तो ये पहले थे और ना आखरी होंगे

मेक्सिको में गए ये लोग न पहले थे न आखरी होंगे। कम से कम दो सौ साल से भारतीय ऐसे ही दुनिया भर में काम के लिए मारे मारे भटक रहे है।

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311 भारतीयों को मेक्सिको से वापिस भारत डिपॉर्ट किया गया है।
311 भारतीयों को मेक्सिको से वापिस भारत डिपॉर्ट किया गया है।

311 भारतीयों को मेक्सिको से वापिस भारत डिपॉर्ट किया गया है।

ये लोग मेक्सिको से अमेरिका में घुसने की प्रतीक्षा में थे। ट्रम्प द्वारा मेक्सिको पर सख़्ती से मेक्सिको सरकार सतर्क हो गयी है व उसी के परिणामस्वरूप ये लोग पकड़े गए व अब भारत लौट आये है।

ये सभी लोग पच्चीस से तीस लाख ख़र्च कर अमेरिका जा रहे थे। वहाँ पहुँचकर भी ये टैक्सी चलाते, रेस्टौरेंट में काम करते व अन्य इसी तरह के काम करते।

इतने पैसों में ये भारत में भी काम कर सकते थे। बड़े अच्छे व्यवसाय आरम्भ कर सकते थे। लेकिन एक तो भारत में हाथ से काम करने से जाति छोटी हो जाती है।

भारत पर राज कर रहे लुटेरे, ठग, भ्रष्ट, भारत में क़ानून का राज स्थापित करने के लिए व अनुबंधों की पवित्रता (sanctity of contracts) स्थापित करने के लिए तैयार नही है।

दूसरे भारत में काम करने के लिए जिगरा चाहिए, जिगरा। पुलिस वाला डंडा भी मारेगा व हफ़्ता भी लेगा। लोकल गुंडा घर की महिलाओं को भी घूरेगा, गाली भी देगा व हफ़्ता भी लेगा। और जिससे भी व्यवसाय करोगे वो पैसे मार लेगा। आप का ही पैसा, और आप ही उसके आगे पीछे घूमेंगे।

इनहि कारणो से भारत में इतनी ग़रीबी है। पुलिस वाले अपने बच्चों की नौकरी के लिए मारे मारे घूमते है, लेकिन कभी ये नही सोच पाते कि हमारे हफ़्ता वसूलने व बच्चे को नौकरी न मिलने में कोई सम्बंध है। पैसे मारने वाले भी ग़रीब ही रहते है क्यूँकि मारा हुआ पैसा ऐसे ही है जैसे शरीर से ख़ून का बह जाना, यह अर्थव्यवस्था से बाहर हो जाता है व नष्ट हो जाता है। व हफ़्ता वसूली वाला रंगदार तीन साल के अंदर ही शव बनकर किसी गटर में पहुँच जाता है।

मेक्सिको में गए ये लोग न पहले थे न आखरी होंगे। कम से कम दो सौ साल से भारतीय ऐसे ही दुनिया भर में काम के लिए मारे मारे भटक रहे है। लेकिन भारत पर राज कर रहे लुटेरे, ठग, भ्रष्ट, भारत में क़ानून का राज स्थापित करने के लिए व अनुबंधों की पवित्रता (sanctity of contracts) स्थापित करने के लिए तैयार नही है। घृणित लोग है ये। और अब तो हफ़्तावसूली को समाजवाद कहते है ये लोग, व रंगदारो को नौकरशाह कहते है जिनका चयन बक़ायदा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा होता है।

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