स्वामी: वाइको को हिंदी विरोधी बदनामी, जो भारत के संविधान का उल्लंघन है, के लिए राज्यसभा से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए

स्वामी ने वाइको के कुछ आपत्तिजनक भाषणों का हवाला देते हुए राज्यसभा सभापति को लिखा कि उन्हें राज्यसभा से क्यों निकाला जाए।

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स्वामी: वाइको को हिंदी विरोधी बदनामी, जो भारत के संविधान का उल्लंघन है, के लिए राज्यसभा से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए
स्वामी: वाइको को हिंदी विरोधी बदनामी, जो भारत के संविधान का उल्लंघन है, के लिए राज्यसभा से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को याचिका दी है कि वे नवनिर्वाचित एमडीएमके के राज्यसभा सदस्य वाइको उर्फ वी गोपाल स्वामी की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने का मांग करते हुए कहा कि उन्होंने शपथ का उल्लंघन किया है और हिंदी विरोधी टिप्पणी कर भारत के संविधान का उल्लंघन किया है। अपने पत्र में, स्वामी ने आग्रह किया कि हिंदी भाषा के खिलाफ वाइको की बदजुबानी संविधान के अनुच्छेद 351 का घोर उल्लंघन है और इस मामले को आचार समिति को भेजा जाना चाहिए और राज्य सभा को उसकी (वाइको) सदस्यता रद्द करने हेतु प्रस्ताव लाना चाहिए।

स्वामी जो हमेशा वाइको को आतंकवादी संगठन लिबरेशन ऑफ तमिल टाइगर्स फॉर ईलम (एलटीटीई) के समर्थक के रूप में कहते हैं, ने कहा कि राज्यसभा की आचार समिति को यह निर्धारित करना चाहिए कि “वह अब राज्यसभा के सदस्य के रूप में बने रहने के लिए योग्य है या नहीं।”

“उसका (वाइको उर्फ वी गोपाल स्वामी) व्यापक रूप से प्रकाशित बयान कि हिंदी एक विकसित भाषा नहीं है और हिंदी में साहित्य के रूप में प्रकाशित पुस्तक केवल रेलवे समय सारिणी (टाइम-टेबल) है। यह सभी भारतीयों के लिए एक गम्भीर अपमान है। वह यह भी मांग करता है कि प्रधान मंत्री को संसद में केवल अंग्रेजी में बोलना चाहिए, जो कि हमारी राष्ट्रीय भाषाओं में से एक हिंदी की बेइज्जती भी है, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 351 के तहत भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है। उसने आगे कहा है कि संस्कृत एक मृत भाषा है और इसे सीखना बेकार है, जबकि अनुच्छेद 351 कहता है कि संस्कृत शब्दकोश को हिन्दी में उपयोग करना चाहिए। यह राष्ट्र का भी घोर अपमान है।” – स्वामी ने वाइको की हालिया भड़काऊ टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा। सुब्रमण्यम स्वामी का राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र इस लेख के नीचे प्रकाशित हुआ है।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

“वाइको ने संविधान के पालन के लिए शपथ ली थी (सदस्य के रूप में) लेकिन उसने संविधान का उल्लंघन किया। इसलिए यह संविधान की मर्यादा को बनाए रखने के लिए और देशभक्त भारतीय लोगों के एक अपमान के रूप में उनके शपथ का अत्यधिक आपत्तिजनक और अनैतिक उल्लंघन है। इसलिए मुझे लगता है कि इस मामले को आचार समिति को संदर्भित करना और यह निर्धारित करने के लिए एक जांच करना उचित है कि क्या सदन द्वारा श्री वायको को सदन की सदस्यता से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए,” स्वामी ने कहा।

सुब्रह्मण्यम स्वामी का राज्यसभा अध्यक्ष को लिखा गया पत्र नीचे प्रकाशित है:

Swamy letter to Rajya Sabha Chairrman on Vaiko
Swamy letter to Rajya Sabha Chairrman on Vaiko

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