वास्तविक भारतीय इतिहास – भाग ५

शक्तिशाली दिल्ली सल्तनत, जो मामलूक के मुहम्मद गोरी द्वारा स्थापित की गयी थी, पूरे देश में विभिन्न हिंदू विद्रोहियों के कारण टूटने लगी थी |

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इस उल्लेखके के पिछले भाग यहां पाए जा सकते हैं । इस उल्लेख के पिछले भाग यहां पाए जा सकते हैं – भाग १, भाग २, भाग ३ और भाग ४ | यह भाग ५ है |

विजयनगर साम्राज्य

मुहम्मदबिनतुग़लक़ने अपने दक्षिण सल्तनत के आक्रमणों के दौरान हरिहर और बुक्का को बंदी बना लिया और उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए मजबूर कर दिया | इसके बाद, दोनों भाइयों को सल्तनत को मजबूत करने के लिए सेनापतियों के रूप में दक्षिण भेजा गया | परन्तु उनकी मुलाकात श्रृंगेरी मठ के ऋषि,विद्यारण्य से हुई, जिन्होंने उन्हें हिंदू धर्म में वापस परिवर्तित कर दिया |

दिल्ली सल्तनत द्वारा काकतियों की पराजय के बाद, तेलुगू देशममें मुसुनूरीनायकवर्ग ने हिंदुत्व और अपने देश की रक्षा के लिए दिल्ली सल्तनत के खिलाफ विद्रोह किया|

हरिहर और बुक्का

बुक्का के बेटे – कुमारकम्पन्ना(- जो कि विजयनगर साम्राज्य के एक सक्षम जनरलथे),ने मदुरै की सल्तनत पर आक्रमण किया और उसे कुचल दिया| यह सल्तनत, जलालुद्दीन अहसान खानंद द्वारा स्थापित की गयी थी | जलालुद्दीन अहसान खानंदने मूल दिल्ली सल्तनत से विद्रोह करके मदुरै की सल्तनत स्थापित करी थी |कुमारकम्पन्नाने, तुर्कों से श्रीरंगम और मदुरै के पवित्र मंदिरों को मुक्त कराया और देश में सनातन धर्म को पुनर्स्थापित किया | इस जीत का विवरण ‘मधुर विजयम’पाठ में मिलता है जो गंगादेवीद्वारा लिखित है| गंगादेवी-कुमारकम्पन्नाकी पत्नी थीं द्वारा लिखित ‘मधुर विजयम’ पाठ में किया गया था|

हरिहर और बुक्का

दिल्ली सल्तनत द्वारा काकतियों की पराजय के बाद, तेलुगू देशममें मुसुनूरीनायकवर्ग ने हिंदुत्व और अपने देश की रक्षा के लिए दिल्ली सल्तनत के खिलाफ विद्रोह किया|

यह विद्रोह मुसुनूरीप्रोलाब्या प्रोलयनायक और मुसुनूरीकपायानायक के नेतृत्व में हुआ था| इसके फलस्वरूप , वारंगल से तुर्कों को पराजित किया गया और निष्कासित कर दिया |

निष्कर्ष में, शक्तिशाली दिल्ली सल्तनत, जो मामलूक के मुहम्मद गोरी द्वारा स्थापित कीगयीथी, तुगलक वंश के आते आते, पूरे देश में विभिन्न हिंदू विद्रोहियों के कारण, जैसे – विजयनगर के संगमा वंश, मेवाड़ के सिसोदिया वंश, मुनसुरी नायक आदि,- टूटने लगी थी | सय्यद और लोदी जैसे उत्तरार्ध में आने वाले राजवंश खिल्जियों और तुगलकों की तुलना में अपेक्षाकृत कमजोर थे |

. . . आगे जारी किया जाएगा

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