भारत-यूके ने अधिक मजबूत रणनीतिक साझेदारी के लिए एक बिलियन पाउंड की संधि और दस वर्षीय योजना की घोषणा की

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच संबंधों में एक नई यात्रा की शुरुआत!

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भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच संबंधों में एक नई यात्रा की शुरुआत!
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच संबंधों में एक नई यात्रा की शुरुआत!

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने मंगलवार को अधिक मजबूत रणनीतिक साझेदारी के लिए दस साल के रोडमैप को तैयार करने के अलावा व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक अरब पाउंड के समझौते की घोषणा की। दोनों प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और बोरिस जॉनसन द्वारा आभासी शिखर सम्मेलन (वर्चुअल समिट) के बाद यह घोषणा की गई और दोनों देशों ने रक्षा, सुरक्षा, दूरसंचार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में संबंधों को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की। उन्होंने भारत-ब्रिटेन संबंधों को बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षी 10-वर्षीय रोडमैप का अनावरण किया और कोविड संकट को एकजुट रूप से संभालने के लिए सहमत हुए।

जॉनसन के कार्यालय के एक बयान के अनुसार, “आज प्रधानमंत्री द्वारा घोषित नए एक बिलियन पाउंड यूके-भारत व्यापार और निवेश के तहत यूके में 6,500 से अधिक नए रोजगार पैदा होंगे।” डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा कि यूके में इंडो-यूके पैकेज में 533 मिलियन पाउंड का नया भारतीय निवेश शामिल है, जिससे स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण और बढ़ते क्षेत्रों में 6,000 से अधिक नौकरियों के सृजन की उम्मीद है। इसमें यूके में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा अपने वैक्सीन व्यवसाय में जीबीपी 240 मिलियन का निवेश और देश में एक नया बिक्री कार्यालय शामिल है, इससे 1 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक का नया व्यापार उत्पन्न करने की उम्मीद है।

दोनों नेताओं ने कोविड-19 स्थिति और महामारी के खिलाफ लड़ाई में चल रहे सहयोग पर चर्चा की, जिसमें टीकों पर सफल साझेदारी शामिल है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि शिखर सम्मेलन ने भारत-ब्रिटेन संबंधों में “एक नये अध्याय की शुरुआत की है”। मंत्रालय ने कहा कि संबंधों को और मजबूत करने के लिए 10 साल की महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत “पूर्ण करने हेतु बड़ी” है और योजना के तहत सहयोग के पांच क्षेत्र हैं – लोगों से लोगों के बीच संबंध, व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु और स्वास्थ्य। अधिकारियों ने कहा कि भारतीय पक्ष ने ब्रिटिश समकक्षों से भारतीय भगोड़े – विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में लंबित औपचारिकताओं पर बात की। मंत्रालय ने कहा कि बैठक के दौरान, भारतीय प्रधान मंत्री ने कहा कि आर्थिक अपराधियों को मुकदमे के लिए जल्द से जल्द भारत भेजा जाना चाहिए।

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इससे पहले दिन में, विदेश मंत्री एस जयशंकर और ब्रिटिश गृह सचिव प्रीति पटेल ने प्रवास और गतिशीलता साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। जयशंकर फिलहाल जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए ब्रिटेन की चार दिवसीय यात्रा पर हैं। लंदन में, जॉनसन ने मोदी के साथ शिखर वार्ता के बाद यूके-भारत संबंधों में एक नए युग की घोषणा की। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने यूके-भारत संबंधों में एक “लंबी छलांग” हासिल करने का वादा किया है और भारत ने यूके के साथ अपने संबंधों की स्थिति को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” में बदल दिया है – पहला यूरोपीय देश जिसे यह स्थिति प्राप्त हुई।

जॉनसन ने कहा, “हमने आज जो समझौते किए हैं, वे यूके-भारत संबंधों में एक नए युग की शुरुआत हैं।” जॉनसन ने कहा – “यूके और भारत कई बुनियादी मूल्यों को साझा करते हैं। यूके सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक है, और भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हम दोनों राष्ट्रमंडल के प्रतिबद्ध सदस्य हैं। और हमारे देशों के लोगों को एकजुट करने वाला एक जीवित पुल है।”

दोनों नेताओं ने कोविड-19 स्थिति और महामारी के खिलाफ लड़ाई में चल रहे सहयोग पर चर्चा की, जिसमें टीकों पर सफल साझेदारी शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में कोविड-19 की गंभीर दूसरी लहर के मद्देनजर यूके द्वारा प्रदान की गई त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए प्रधान मंत्री जॉनसन को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री जॉनसन ने पिछले साल ब्रिटेन और अन्य देशों को दी जाने वाली सहायता में भारत की भूमिका की सराहना की, जिसमें स्वास्थ्य सामग्री और टीकों की आपूर्ति भी शामिल थी।

मोदी के कार्यालय ने एक बयान में कहा – “दोनों प्रधानमंत्रियों ने दुनिया की 5 वीं और 6 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार क्षमता को बढ़ाने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से अधिक करने हेतु एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करके ‘बढ़ती हुई व्यापारिक साझेदारी‘ (ईटीपी) का शुभारंभ किया। ईटीपी के एक हिस्से के रूप में, भारत और यूके एक व्यापक और संतुलित एफटीए पर बातचीत करने के लिए एक रोडमैप पर सहमत हुए, जिसमें जल्दी लाभ देने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते पर विचार किया गया। भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ी हुई व्यापार साझेदारी दोनों देशों में कई हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगी।”

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