लगातर सिंधु जल संधि समझौते का उलंघन करने पर भारत ने पाक को सौंपा नोटिस

    दोनों देशों के बीच नौ सालों की बातचीत के बाद 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि में विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता है।

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    सिंधु जल संधि के प्रावधानों का पकिस्तान लगातार उल्लंघन करता रहा है
    सिंधु जल संधि के प्रावधानों का पकिस्तान लगातार उल्लंघन करता रहा है

    सिंधु जल संधि के प्रावधानों का पकिस्तान लगातार उल्लंघन करता रहा है; भारत संशोधन नोटिस जारी करने के लिए मजबूर

    भारत ने सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है। सरकार का कहना है कि भारत, पाकिस्तान के साथ जल संधि को अक्षरशः लागू करने में दृढ़ समर्थक और जिम्मेदार भागीदार रहा है। लेकिन पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने भारत को जरूरी नोटिस जारी करने के लिए मजबूर कर दिया। ये पहली बार है जब भारत ने सिंधु जल समझौते में संशोधन की मांग की है।

    आर्थिक संकट में घिरे होने के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत ने सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है। यह संधि सितंबर 1960 में हुई थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर की गई कार्रवाइयों ने सिंधु जल संधि के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

    भारत ने संबंधित आयुक्तों के माध्यम से 25 जनवरी को पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है। पाकिस्तान को यह नोटिस 1960 की सिंधु जल संधि के अनुच्छेद XII (3) के अनुसार जारी किया गया है।

    दोनों देशों के बीच नौ सालों की बातचीत के बाद 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि में विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता है।

    भारत की ओर से जारी किए गए नोटिस में भारत ने कहा है, “भारत हमेशा सिंधु जल समझौते को जिम्मेदारी के साथ लागू किया है। लेकिन पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने समझौते के प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। जिसके कारण भारत को संधि समझौते के संशोधन के लिए एक जरूरी नोटिस जारी करना पड़ा

    साल 2015 में पाकिस्तान ने भारत की किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं पर अपनी तकनीकी आपत्तियों की जांच के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति का अनुरोध किया था। लेकिन 2016 में पाकिस्तान ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए इस अनुरोध को वापस ले लिया और प्रस्ताव दिया कि एक मध्यस्थ अदालत उसकी आपत्तियों पर फैसला सुनाए।

    पाकिस्तान की ओर से की गई यह कार्रवाई सिंधु जल संधि के अनुच्छेद IX का उल्लंघन है। इसलिए भारत ने इस मामले को एक तटस्थ विशेषज्ञ के पास भेजने का अनुरोध किया।

    पारस्परिक रूप से बीच का रास्ता निकालने के लिए भारत की ओर से बार-बार प्रयास करने के बावजूद पाकिस्तान ने 2017 से 2022 तक स्थायी सिंधु आयोग की पांच बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार कर दिया।

    [आईएएनएस इनपुट के साथ]

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