ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर भारत सरकार ने उठाए सवाल

इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 121 देशों में से 107 वें स्थान पर खिसक गई है।

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर भारत सरकार ने उठाए सवाल
ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर भारत सरकार ने उठाए सवाल

क्या भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को नीचा दिखाने का प्रयास है ‘ग्लोबल हंगर रिपोर्ट’?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 पर केंद्र सरकार ने सवाल उठाते हुए इसे भूख का एक गलत माप बताते हुए कहा कि यह कार्यप्रणाली के गंभीर सवालों से ग्रस्त है। इस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 121 देशों में से 107 वें स्थान पर खिसक गई है।

इसे लेकर सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह रिपोर्ट न केवल जमीनी हकीकत से कटी हुई है, बल्कि लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को जानबूझकर नजरअंदाज करने का रास्ता भी चुनती है।

वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) के जरिए वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर भूख पर नजर रखी जाती है और उसकी गणना की जाती है। 29.1 अंकों के साथ भारत में भूख का स्तर ‘गंभीर’ है। शनिवार को जारी वैश्विक भूख सूचकांक 2022 के मुताबिक, भारत की स्थिति और खराब हुई है और वह 121 देशों में 107वें नंबर पर पहुंच गया है। हमारा देश इससे पहले वर्ष 2021 में 116 देशों में 101वें नंबर पर था जबकि 2020 में वह 94वें पायदान पर था।

इस रिपोर्ट को देखने पर यह भी पता चलता है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान (99), बांग्लादेश (84), नेपाल (81) और श्रीलंका (64) भारत के मुकाबले कहीं अच्छी स्थिति में हैं। एशिया में केवल अफगानिस्तान ही भारत से पीछे है और वह 109वें स्थान पर है।

इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि दुनिया में सबसे अधिक भूख के स्तर वाले क्षेत्र, दक्षिण एशिया में बच्चों में नाटेपन की दर (चाइल्ड स्टंटिंग रेट) सबसे अधिक है। इसमें कहा गया है, ‘भारत में ‘चाइल्ड वेस्टिंग रेट’ 19.3 प्रतिशत है जो दुनिया के किसी भी देश में सबसे अधिक है और भारत की बड़ी आबादी के कारण यह इस क्षेत्र के औसत को बढ़ाता है।’

भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बच्चों में नाटेपन की दर (चाइल्ड स्टंटिंग रेट) 35 से 38 फीसदी के बीच है और क्षेत्र में अफगानिस्तान में यह दर सबसे अधिक है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अल्पपोषण की व्यापकता 2018-2020 में 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 2019-2021 में 16.3 हो गई है। इसका मतलब है कि दुनियाभर के कुल 82.8 करोड़ में से भारत में 22.43 करोड़ की आबादी अल्पपोषित है।

पांच साल की आयु तक के बच्चों में मृत्यु दर के सबसे बड़े संकेतक ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ की स्थिति भी बदतर हुई है। 2012-16 में 15.1 प्रतिशत से बढ़कर 2017-21 में यह 19.3 प्रतिशत हो गया है।

[आईएएनएस इनपुट के साथ]

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